Fact Check : UP के प्रतापगढ़ में फायरिंग के बाद हथियारों की पुरानी तस्वीरें वायरल, भ्रामक है VIRAL POST
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। पोस्ट में इस्तेमाल की गईं तस्वीरें पुरानी साबित हुईं।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Jul 25, 2025 at 01:49 PM
नई दिल्ली (Vishvas News)। यूपी के प्रतापगढ़ जिले में इनदिनों एक के बाद एक कई फायरिंग की घटना हो चुकी है। गुरुवार को जिले के रानीगंज में जमीन विवाद में फायरिंग हो गई। इस घटना में दो महिलाओं को गोलियों के छर्रे लग गए। इसी बीच सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए अवैध असलहे के कारोबार पर सवाल उठाया गया।
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। पोस्ट में इस्तेमाल की गईं तस्वीरें पुरानी साबित हुईं। प्रतापगढ़ पुलिस की ओर से भी वायरल पोस्ट का खंडन किया गया है।
क्या हो रहा है वायरल
एक्स हैंडल खुलासा इंडिया ने 25 जुलाई को दो तस्वीरों को एक साथ पोस्ट करते हुए दावा किया, “जनपद प्रतापगढ़ में हो रही अपराधिक घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि 90 फीसदी घरों में अवैध असलहे रखे हैं और उन्हीं असलहों से घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। यक्ष प्रश्न:- आखिर असलहों का सौदागर कौन है…?”
वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले यहां इस्तेमाल की गईं तस्वीरों के बारे में जाना । इसके लिए हमने गूगल लेंस टूल का इस्तेमाल किया।
वायरल पोस्ट की पहली तस्वीर गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च करने पर हमें यह तस्वीर कई जगह मिली। सबसे पुरानी तस्वीर जागरण डॉट कॉम पर 25 मई 2022 को प्रकाशित एक खबर में मिली। इस खबर में बताया गया कि यूपी के जौनपुर में अवैध असलहा फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ। वहां चार आरोपित को गिरफ्तार किया। फैक्ट्री में 20 तमंचे बरामद हुए। पूरी खबर को यहां पढ़ा जा सकता है।

इसी तरह जांच को आगे बढ़ाते हुए दूसरी तस्वीर के बारे में सर्च किया गया। हमें भास्कर डॉट कॉम पर चार साल पहले पब्लिश एक खबर मिली। इस खबर में वायरल पोस्ट की दूसरी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए बताया गया, “उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में अवैध असलहा और कारतूस बनाने की बड़ी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। यूपी एटीएस और प्रतापगढ़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में सरगना समेत छह आरोपियों को पकड़ा। बिहार के मुंगेर से कारीगरों को बुलाकर अवैध असलहा बनवाते थे। जिसके बाद यूपी समेत 7 राज्यों में असलहों की सप्लाई करते थे।”

वायरल पोस्ट की स्कैनिंग के दौरान हमें प्रतापगढ़ पुलिस का एक जवाब मिला। इसमें लिखा था, “उक्त फोटो/वीडियो के संबंध में तत्समय कार्यवाही की जा चुकी है। इस प्रकार के पुराने एवं भ्रामक फोटो/वीडियो को वायरल कर जनपद प्रतापगढ़ पुलिस की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है । जो न केवल भ्रामक है, बल्कि जनमानस में भ्रम उत्पन्न करने वाला है। किसी भी भ्रामक खबर को बिना सत्यापन के न फैलाएं । सोशल मीडिया पर भ्रामक खबर फैलाना एक दण्डनीय अपराध है।”

प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक डा. अनिल कुमार ने विश्वास न्यूज को बताया, “जनपद में अवैध असलहों की बराबर धरपकड़ की जाती है। आरोपितों पर आर्म्स एक्ट भी लगाया जाता है। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित पोस्ट से प्रतापगढ़ का कोई संबंध नहीं है। आधारहीन फोटो और सूचनाएं प्रसारित करके पुलिस की छवि खराब करने और जनता में भय का माहौल बनाने वालों पर बराबर कार्रवाई की जा रही है।”
निष्कर्ष : विश्वास न्यूज की पड़ताल में वायरल पोस्ट भ्रामक साबित हुई। पोस्ट में इस्तेमाल की गई हथियारों की दोनों तस्वीरें पुरानी है।
- Claim Review : जनपद प्रतापगढ़ में हो रही अपराधिक घटनाओं से ऐसा प्रतीत होता है कि 90 फीसदी घरों में अवैध असलहे रखे हैं और उन्हीं असलहों से घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।
- Claimed By : X user Khulasa India
- Fact Check : भ्रामक
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