X

Fact Check: रोंगटे खड़े कर देने वाला यह पुराना वीडियो चीन का है, अरुणाचल प्रदेश का नहीं

पहाड़ी पर सीढ़ी के सहारे चढ़ने और उतरने का रोंगटे खड़े कर देने वाला यह वीडियो चीन का है। इसका भारत के अरुणाचल प्रदेश से कोई संबंध नहीं है।

  • By Vishvas News
  • Updated: December 12, 2022
China, Arunachal Pradesh, Sky Ladders, Fact Check, Fake News,

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर सीढ़ी के जरिए पहाड़ी पर चढ़ते हुए बच्चों व महिलाओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है। 3.04 मिनट के इस वीडियो में पहाड़ी पर बेहद पतली पगडंडी पर खतरनाक तरीके से बच्चों व महिलाओं को आते-जाते देखा जा सकता है। चट्टानों के बीच बने घर भी इसमें दिख रहे हैं। कुछ यूजर्स इस रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि यह वीडियो अरुणाचल प्रदेश के एक गांव का है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह वायरल वीडियो चीन का है, भारत का नहीं। चीन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित इस गांव का वीडियो करीब ढाई साल पहले भी वायरल हो चुका है।

क्या है वायरल पोस्ट में

फेसबुक यूजर J K Singh Arya (आर्काइव लिंक) ने 10 दिसंबर को वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा,

हमें अपने यहाँ बस, ट्रेन सुविधा की शिकायत रहती है.
यह अरुणाचल का एक छोटा सा गांव है.
यहां जिंदगी की रोज की चुनौती भी देख लें…

ट्विटर यूजर ‘रतन कुमार अग्रवाल‘ (आर्काइव लिंक) ने भी वीडियो को पोस्ट करते हुए इसे अरुणाचल प्रदेश का बताया।

https://twitter.com/RatanKAgrawal/status/1601553357969072129

पड़ताल

वायरल वीडियो की पड़ताल के लिए हमने सबसे पहले ट्विटर यूजर ‘रतन कुमार अग्रवाल’ के कमेंट सेक्शन में देखा। इसमें कई यूजर्स ने इस वीडियो को चीन का बताया है।

https://twitter.com/realKKD/status/1601802015855718400

ट्वीट के रिप्लाई में हमें यूजर दीपक कुलश्रेष्ठ का कमेंट मिला। इसमें एक यूट्यूब चैनल का लिंक दिया गया है, जिसमें वायरल वीडियो को देखा जा सकता है। 19 अप्रैल 2020 को अपलोड इस वीडियो के टाइटल में लिखा है, Dangerous mountain village in china। (चीन का खतरनाक पहाड़ी गांव)।

कीवर्ड से सर्च करने पर हमें यूट्यूब चैनल Ali Official Entertainment and informative Floor पर 29 अप्रैल 2020 को अपलोड किया गया वायरल वीडियो मिला। इसमें भी इसे चीन का बताया गया है।

सीएनएन में 15 मई 2020 को चीन के इस गांव की खबर छपी है। इसके अनुसार, दक्षिण-पश्चिम चीन में 800 मीटर (2,624 फुट) ऊंची पहाड़ी की चोटी पर रहने वाले ग्रामीणों को स्थानांतरित कर दिया गया है। सिचुआन प्रांत के 200 साल पुराने गांव अतुल’एर ने दुनिया भर में तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब वर्ष 2016 में स्कूली बच्चों की तस्वीरें आई थीं, जिसमें वे सीढ़ी से चट्टान से नीचे आते हुए दिख रहे हैं। स्थानीय लोग इसे स्काई लैडर्स कहते हैं। दो घंटे की चढ़ाई के बाद ग्रामीण बाहरी दुनिया के संपर्क में आते थे। इसी सीढ़ी के जरिए किसान सामान लादकर पहाड़ी से नीचे मार्केट में जाते हैं। हालिया कुछ साल में स्थानीय अथॉरिटीज ने हाथ की बनी सीढ़ियों की जगह स्टील की बनी सीढ़ियां लगवा दी थीं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, इस हफ्ते 84 लोगों ने गांव और सीढ़ियों को पीछे छोड़ते हुए 75 किलोमीटर दूर झाओजु काउंटी में अपना आशियाना बसा लिया है। सभी गांव वाले वहां से नहीं गए हैं। करीब 30 परिवारों ने गांव में रुकने की योजना बनाई है।

यूट्यूब चैनल South China Morning Post पर 18 मई 2020 को इस बारे में वीडियो न्यूज अपलोड की गई है। ‘क्लिफ विलेज’ में जिंदगी आसान नहीं है। लोगों को 800 मीटर की पहाड़ी चढ़नी और उतरनी पड़ती है गांव में आने-जाने के लिए। 80 परिवार यहां से दूर अपार्टमेंट्स में शिफ्ट हो गए हैं।

वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले फेसबुक यूजर ‘जे के सिंह आर्य‘ की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। फरवरी 2016 से फेसबुक पर सक्रिय यूजर के करीब 4200 फ्रेंड्स हैं।

Disclaimer : इस फैक्‍ट चेक खबर में एक अनावश्यक पंक्ति को हटाया गया है।

निष्कर्ष: पहाड़ी पर सीढ़ी के सहारे चढ़ने और उतरने का रोंगटे खड़े कर देने वाला यह वीडियो चीन का है। इसका भारत के अरुणाचल प्रदेश से कोई संबंध नहीं है।

  • Claim Review : यह वीडियो अरुणाचल प्रदेश के एक गांव का है।
  • Claimed By : FB User- J K Singh Arya
  • Fact Check : झूठ
झूठ
फेक न्यूज की प्रकृति को बताने वाला सिंबल
  • सच
  • भ्रामक
  • झूठ

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...

टैग्स

अपनी प्रतिक्रिया दें

No more pages to load

संबंधित लेख

Next pageNext pageNext page

Post saved! You can read it later