Fact Check : मथुरा के मंदिर की जमीन से जुड़े केस के पुराने फैसले को भ्रामक तरीके से किया गया वायरल
मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव स्थित मंदिर बांके बिहारी जी महाराज के नाम दर्ज जमीन से जुड़े केस के फैसले को गलत संदर्भ के साथ भ्रामक तरीके से वायरल किया जा रहा है।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Mar 5, 2025 at 05:29 PM
नई दिल्ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें दावा किया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में बांके बिहारी मंदिर की 12 एकड़ जमीन वापस कर दी है। यह जमीन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कब्रिस्तान के लिए मुस्लिम ट्रस्ट को दे दी थी।
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। वर्ष 2023 की खबर को अभी का बताकर भ्रम फैलाया जा रहा है। मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव स्थित मंदिर बांके बिहारी जी महाराज के नाम दर्ज जमीन से जुड़े केस के फैसले को गलत संदर्भ के साथ भ्रामक तरीके से वायरल किया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल
फेसबुक यूजर अजय कुमार सोनी ने 4 मार्च को एक पोस्ट करते हुए दावा किया, “इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने मथुरा में बांके बिहारी मंदिर की 12 एकड़ जमीन वापस कर दी है। यह जमीन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रातों-रात अवैध रूप से कब्रिस्तान के लिए मुस्लिम ट्रस्ट को दे दी थी। माननीय न्यायालय ने कहा कि यह मामला दुनिया में अपनी तरह का अनूठा मामला है, जहां एक हिंदू मंदिर की भूमि को बिना किसी वैध कारण के अचानक दूसरे समूह को हस्तांतरित कर दिया गया। कल्पना कीजिए कि अगर ऐसा नेता दोबारा सत्ता में आ जाए तो क्या होगा! और कितने अन्यायपूर्ण कार्य होंगे? आज न्याय की जीत हुई है और मंदिर की भूमि को सही तरीके से वापस लौटा दिया गया है। निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय का आभार।”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों ही लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले गूगल ओपन सर्च टूल का इस्तेमाल किया। संबंधित दावे के आधार पर कुछ कीवर्ड बनाए गए और फिर इन्हें सर्च किया गया। हमें हाल के दिनों की एक भी ऐसी खबर नहीं मिली, जिससे यह पुष्टि हो सके कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल-फिलहाल में ऐसा कोई फैसला दिया हो। सभी खबरें हमें सितंबर 2023 की मिलीं।
जागरण डॉट कॉम पर 17 सितंबर 2023 को पब्लिश एक खबर में विस्तार से पूरे मामले को बताया गया। खबर के अनुसार, “इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव स्थित मंदिर बांके बिहारी जी महाराज के नाम दर्ज जमीन 13 अगस्त 1970 को ग्राम सभा के नाम दर्ज किए जाने और फिर 21 साल बाद 30 अक्टूबर 1991 के आदेश से पोखर के रूप में दर्ज करने संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने तहसीलदार/ एसडीएम को एक माह में जमीन मंदिर बांके बिहारी जी विराजमान के नाम दर्ज करने की कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया है। श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट की याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया है कि मंदिर और कब्रिस्तान की जमीन अलग-अलग है। इनका एक-दूसरे से कोई सरोकार नहीं है। वर्ष 2004 में भोला खान व अन्य ने मुख्यमंत्री को अर्जी देकर प्लाट संख्या 1081 और 108/4,108/5 तथा 1093/190 पर कब्रिस्तान दर्ज करने की मांग की। इसके बाद 13 दिसंबर 2004 को तीनों प्लाट उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज कर दिए गए। बाद में प्लाट 1081 भी कब्रिस्तान के नाम दर्ज हो गया। इसका पता चलने पर गांव वालों ने 16 जून 2020 को उपजिलाधिकारी को अर्जी दी। आठ सदस्यीय कमेटी गठित की गई। उसने जांच रिपोर्ट पेश की। प्लाट 1081 से कब्रिस्तान का नाम हटाने को कहा गया, किंतु तमाम अर्जियों के बाद भी कुछ नहीं हो सका। पांच नवंबर 2021 को याची ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की अर्जी दी।”
संबंधित खबर को विस्तार से यहां पढ़ा जा सकता है।
सर्च के दौरान 18 सितंबर 2023 को रिपब्लिक भारत के यूट्यूब चैनल पर हमें एक वीडियो रिपोर्ट मिली। इसमें बताया गया कि मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव में भगवान बांके बिहारी की जमीन पहले तालाब फिर कब्रिस्तान में दर्ज कर दी गई थी। अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया।
वर्ष 2003 से 2007 के दरमियान यूपी में सपा की सरकार थी। उस वक्त मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण, मथुरा के संपादकीय प्रभारी विनीत मिश्र से संपर्क किया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि मामला पुराना है। वर्ष 2023 में यह फैसला आया था। यह मंदिर मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव स्थित मंदिर बांके बिहारी जी महाराज का है।
जांच के अंत में हमने वायरल पोस्ट करने वाले यूजर की जांच की। अजय कुमार सोनी को फेसबुक पर चार सौ से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। इनके फेसबुक फ्रेंड की तादाद तीन हजार से ज्यादा है।
निष्कर्ष : विश्वास न्यूज की पड़ताल में पता चला कि वर्ष 2023 में मथुरा की छाता तहसील के शाहपुर गांव स्थित मंदिर बांके बिहारी जी महाराज से जुड़े जमीन को लेकर एक फैसला आया था। उसी फैसले के साथ छेड़छाड़ करके भ्रामक दावे के साथ अब वायरल किया जा रहा है।
- Claim Review : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने मथुरा में बांके बिहारी मंदिर की 12 एकड़ जमीन वापस कर दी है।
- Claimed By : FB User Ajai Kumar Soni
- Fact Check : भ्रामक
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