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Fact Check: दिसंबर में नागपुर में हुए प्रदर्शन के वीडियो को किया जा रहा हालिया सांप्रदायिक हिंसा के बाद भ्रामक दावे से वायरल

विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो का हालिया नागपुर हिंसा से कोई लेना- देना नहीं है। यह वीडियो तकरीबन पांच महीने पुराना और नागपुर में बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों  के खिलाफ हिंसा से जुड़े एक प्रदर्शन का है। दिसंबर 2024 के इस वीडियो को अब भ्रामक दावे के साथ फैलाया जा रहा है।

  • By: Umam Noor
  • Published: Mar 21, 2025 at 04:05 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार को औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए किए गए प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम समुदाय के पवित्र ग्रंथ को जलाए जाने की अफवाह फैल गई। इसके बाद दो गुटों के बीच तनाव बढ़ गया और झड़प हो गई, जिससे शहर में हालात तनावपूर्ण हो गए। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रह है। वायरल किए  जा रहे इस वीडियो में बहुत-से लोगों को प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। वहीं, सभी के हाथों में भगवा झंडे नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए यूजर इसे हालिया रोज हुए नागपुर दंगों से जोड़कर वायरल कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि ये इसी मामले से जुड़ा वीडियो है।

विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो का हालिया नागपुर सांप्रदायिक हिंसा से कोई लेना- देना नहीं है। यह वीडियो तकरीबन पांच महीने पुराना और नागपुर में बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा से जुड़े एक प्रदर्शन का है। दिसंबर 2024 के इस वीडियो को अब भ्रामक दावे के साथ फैलाया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक पेज ‘अजी हाँ जी’ ने 20 मार्च को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “पॉवर ऑफ नागपुर। मत छोड़ो।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए पहले हमने वीडियो को गौर से देखा। वीडियो में फ्लाईओवर पर लगाए गए बैनर में ‘सकल हिन्दू समाज’ लिखा हुआ नजर आया।

पड़ताल के लिए हमने वीडियो के की- फ्रेम्स निकाले और उन्हें गूगल लेंस के जरिये सर्च किया। सर्च किये जाने पर हमें यह वीडियो एक फेसबुक यूजर द्वारा शेयर किया हुआ मिला। यहां वीडियो को 10 दिसंबर 2024 को नागपुर के ही हवाले से अपलोड किया गया है।

इसी बुनियाद पर हमने अपनी पड़ताल बढ़ाई और ‘नागपुर हिंसा 10 दिसंबर’ कीवर्ड के साथ न्यूज़ सर्च किया। सर्च किये जाने पर हमें टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर 7 दिसंबर को छपी एक खबर मिली। यहां खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक, ‘बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों  के समर्थन में हिन्दू सकल समाज की तरफ से 10 दिसंबर को नागपुर में प्रदर्शन का आयोजन किया गया है।’

एबीपी मांझा के यूट्यूब चैनल पर हमें इसी प्रदर्शन का वीडियो 10 दिसंबर 2024 को लाइव किया हुआ मिला। यहां वीडियो में बताया गया, इस प्रदर्शन का आयोजन हिन्दू सकल समाज ने किया। वहीं, इस प्रदर्शन का उद्देश्य बांग्लादेश में हिन्दुओं से हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना था।  

वायरल पोस्ट और एबीपी मांझा के यूट्यूब चैनल पर मिले एक जैसे फ्रेम को नीचे दिए गए कोलाज में देखा जा सकता है।

सर्च में हमें इस प्रदर्शन का लाइव ‘राष्ट्र बाण न्यूज़’ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर भी 10 दिसंबर अपलोड किया हुआ मिला।

वायरल वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने नागपुर कवर करने वाली पत्रकार सुरभि शिवपुरकर से संपर्क साधा और वायरल पोस्ट उनके साथ साझा की। उन्होंने हमने पुष्टि देते हुए बताया, ‘नागपुर हिंसा के बाद वहां इस तरह का कोई प्रदर्शन नहीं हुआ है।’

दैनिक जागरण 18 मार्च की खबर के मुताबिक, ‘महाराष्ट्र के नागपुर में सोमवार रात हिंसक झड़प देखने को मिली। औरंगजेब की कब्र को लेकर हो रहे विवाद को लेकर दो गुटों के बीच हिंसा इतनी फैल गई कि घरों और वाहनों में आगजनी तक हो गई। नागपुर के महाल में शुरू हुई हिंसा हंसपुरी तक फैल गई।’ इस मामले से जुड़ी पूरी खबर यहां पढ़ी जा सकती है।

अब बारी थी भ्रामक पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक पेज ‘अजी हाँ जी’ की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि इस पेज को 16 हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो का हालिया नागपुर हिंसा से कोई लेना- देना नहीं है। यह वीडियो तकरीबन पांच महीने पुराना और नागपुर में बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों  के खिलाफ हिंसा से जुड़े एक प्रदर्शन का है। दिसंबर 2024 के इस वीडियो को अब भ्रामक दावे के साथ फैलाया जा रहा है।

  • Claim Review : नागपुर हिंसा के बाद प्रदर्शन।
  • Claimed By : फेसबुक पेज- अजी हाँ जी
  • Fact Check : भ्रामक

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