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Fact Check : देहरादून के शख्स का पुराना वीडियो फिर से दिल्‍ली शहर काजी के नाम पर वायरल

जून 2019 के देहरादून के वीडियो को दिल्ली के शहर काजी का बताकर वायरल किया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम मुफ्ती रईस अहमद है और वह देहरादून के रहने वाले हैं।

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। रमजान के पाक महीने के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक मुस्लिम शख्स को मीडिया के सामने विवादित बयान देते हुए सुना जा सकता है। वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स दावा कर रहे हैं कि वीडियो दिल्ली के शहर काजी का है।

विश्‍वास न्‍यूज ने एक बार पहले भी वायरल वीडियो की जांच की थी। पड़ताल में पता चला कि जून 2019 के वीडियो को मौके बे मौके वायरल करके झूठ फैलाया जाता है। वीडियो में दिख रहे शख्‍स दिल्‍ली शहर के काजी नहीं, बल्कि देहरादून का रहवासी मुफ्ती रईस है।

क्‍या हो रहा है वायरल

पूजा अरोड़ा नाम की एक थ्रेड यूजर ने 26 मार्च को वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “शांतिदूत”

वीडियो के ऊपर लिखा गया : “हम हिन्‍दुओं का जीना मुश्किल कर देंगे।”- शहर काजी दिल्‍ली

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों ही लिखा गया है। इसे सच समझकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज एक बार पहले भी वायरल वीडियो की जांच कर चुका है। इसके लिए हमने सबसे पहले कीवर्ड सर्च टूल का इस्‍तेमाल किया। संबधित कीवर्ड से सर्च करने पर हमें सुदर्शन न्‍यूज के यूट्यूब चैनल पर एक रिपोर्ट मिली। 3 जुलाई 2019 को अपलोड इस रिपोर्ट में वायरल वीडियो का इस्‍तेमाल करते हुए बयान दे रहे शख्‍स को देहरादून का मुफ्ती रईस बताया गया।

गूगल ओपन सर्च टूल की मदद से खोजने पर हमें जागरण डॉट कॉम पर एक खबर मिली। 27 जून 2019 की इस खबर में बताया गया कि झारखंड में एक मुस्लिम की हत्या के विरोध में देहरादून में मुस्लिम सेवा संगठन ने रैली निकाली। शहर काजी मो. अहमद कासमी के नेतृत्व में यह प्रदर्शन किया गया। इसमें मुफ्ती रईस भी मौजूद थे। खबर में वीडियो में दिख रहे शख्स की फोटो भी देखी जा सकती है।

इस कार्यक्रम को लेकर टाइम्‍स ऑफ इंडिया ने भी खबर प्रकाशित की थी। 1 जुलाई 2019 की खबर में बताया गया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मुफ्ती रईस अहमद पर आपत्तिजनक बयान देने के मामले में केस दर्ज किया गया। तबरेज अंसारी की हत्या के विरोध में किए गए प्रदर्शन के दौरान उन्होंने यह आपत्तिजनक बयान दिया था।

विश्‍वास न्‍यूज ने जांच के दौरान दैनिक जागरण, देहरादून के क्राइम रिपोर्टर सोबन सिंह गुसाईं से भी संपर्क किया था। उन्‍होंने भी वायरल वीडियो को 2019 का बताते हुए देहरादून का बताया था। उन्‍होंने बताया था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान यह आपत्तिजनक बयान दिया था। इसके बाद पुलिस ने केस भी दर्ज किया था।

पुराने वीडियो को गलत दावे के साथ वायरल करने वाले यूजर की सोशल स्‍कैनिंग में कोई खास जानकारी प्राप्‍त नहीं हुई।

निष्कर्ष: जून 2019 के देहरादून के वीडियो को दिल्ली के शहर काजी का बताकर वायरल किया जा रहा है। वीडियो में दिख रहे शख्स का नाम मुफ्ती रईस अहमद है और वह देहरादून के रहने वाले हैं।

  • Claim Review : हिंदुओं को धमकी देते हुए दिल्‍ली शहर काजी
  • Claimed By : Threads User Pooja Arora
  • Fact Check : झूठ

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