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Fact Check:  शव दफनाने को लेकर हो रहे विवाद का यह वीडियो 2017 से इंटरनेट पर मौजूद है, वक्फ (संशोधन) अधिनियम से नहीं है कोई लेना-देना

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। कब्रिस्तान में शव को दफनाने को लेकर हुए विवाद का यह वीडियो वक्फ (संशोधन) अधिनियम के पास होने के बाद का नहीं है। यह क्लिप 2017 से इंटरनेट पर मौजूद है।

  • By: Pallavi Mishra
  • Published: Apr 7, 2025 at 02:10 PM
  • Updated: Apr 8, 2025 at 09:48 AM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)।  राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद वक्फ संशोधन कानून बन चुका है। अब सोशल मीडिया पर  एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शव के साथ खड़ी  भीड़ को बोलते सुना जा सकता है कि यह शव 3 दिनों से कब्रिस्तान के बहार रखा है और इसे दफनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। यूजर इस वीडियो को हालिया बताते हुए दावा कर रहे हैं कि यह मामला वक्फ संशोधन अधिनियम के पास होने के बाद का है।

विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। वायरल वीडियो 2017 से इंटरनेट पर मौजूद है।

क्‍या हो रहा है वायरल

Ishaq Mohammed नाम के फेसबुक यूजर ने 5 अप्रैल को इस वीडियो को शेयर किया और अंग्रेजी में लिखा “वक्फ बिल पास होने के बाद पहला मामला”

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने सबसे पहले वीडियो को ठीक से देखा। वीडियो में दिख रहे लोगों ने सर्दियों के कपडे पहने हैं, जबकि वक्फ (संशोधन) अधिनियम अप्रैल में पास हुआ है। हमें शक हुआ कि यह वीडियो पुराना हो सकता है।

जांच के लिए हमने इस वीडियो के कई कीफ्रेम्‍स निकाले। फिर इन्‍हें गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया। हमें यह पूरा वीडियो एक्टर अजाज़ खान के फेसबुक पेज पर 22 दिसंबर 2017 को अपलोड मिला।

 हमें यह वीडियो 22 दिसंबर 2017 को ही साहेबे खान नाम के फेसबुक पेज पर भी अपलोड मिला।

यह वीडियो दिसंबर 2017 में और भी कई जगह भी अपलोड मिला।

वीडियो में बताया गया है कि मामला उत्तम नगर के ककरोला मोड़ का है। कीवर्ड्स और टाइम टूल का इस्तेमाल करके सर्च करने पर हमें इस मामले को लेकर कुछ खबरें मिलीं। न्यूज़ वेबसाइट जागरण जोश की 28 दिसंबर 2017 की एक खबर के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई भी व्यक्ति सरकारी भूमि को बिना अनुमति के कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकता। न्यायालय ने एक NGO द्वारा पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर में सरकारी जमीन पर कब्रिस्तान बनाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की।

हमने इस विषय में पुष्टि के लिए दैनिक जागरण के लिए वेस्ट दिल्ली कवर करने वाले रिपोर्टर गौतम मिश्रा से बात की, जिन्होंने कन्फर्म किया कि ककरोला मोड़ पर हाल-फिलहाल में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

वायरल क्लिप को फेक दावे के साथ शेयर करने वाले फेसबुक यूजर Ishaq Mohammed को लगभग 300 यूजर फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह दावा गलत है। कब्रिस्तान में शव को दफनाने को लेकर हुए विवाद का यह वीडियो वक्फ (संशोधन) अधिनियम के पास होने के बाद का नहीं है। यह क्लिप 2017 से इंटरनेट पर मौजूद है।

  • Claim Review : `हाल ही में पास हुए वक्फ संशोधन अधिनियम के बाद एक शव को दफनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उसे कब्रिस्तान के बाहर रखा गया है।
  • Claimed By : FB user Ishaq Mohammed
  • Fact Check : झूठ

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