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Explainer: 10 FY में डबल हुआ FDI इन्फ्लो, सर्विस, मैन्युफैक्चरिंग टॉप सेक्टर्स, सिंगापुर-मॉरीशस शीर्ष निवेशक

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 2023-24 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में जहां भारत में सर्वाधिक एफडीआई सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका, नीदरलैंड्स और जापान से आया। देश में आए कुल एफडीआई में इन पांच देशों की हिस्सेदारी 73.9 फीसदी रही और इसका सर्वाधिक लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मिला।वहीं, सर्विस सेक्टर भारत में आने वाले एफडीआई का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा। सर्विस सेक्टर में कंप्यूटर सर्विसेज, कम्युनिकेशंस सर्विसेज, फाइनेंशियल  सर्विसेज और बिजनेस सर्विसेज शामिल हैं। इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी और अन्य एनर्जी, खुदरा और थोक ट्रेड और ट्रांसपोर्ट सेक्टर रहा।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, आर्थिक सुस्ती और भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 2% की गिरावट आई। भारत समेत अन्य विकासशील देशों के संदर्भ में देखें तो इन अर्थव्यवस्थाओं को मिलने वाले एफडीआई में 7% की गिरावट आई और यह घटकर 867 बिलियन डॉलर हो गया। हालांकि, गिरावट का स्तर क्षेत्र दर क्षेत्र अलग रहा।

अफ्रीका के एफडीआई इनफ्लो में जहां 3 फीसदी की गिरावट आई, वहीं एशिया के विकासशील देशों में एफडीआई इनफ्लो में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरे सबसे अधिक एफडीआई हासिल करने वाले देश चीन को भी इस गिरावट का सामना करना पड़ा और भारत के साथ पश्चिम एशिया और मध्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में भी कमी दर्ज की गई।

Source: unctad.org वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2024

मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के डिपार्टमेंट फॉर प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 2014 के बाद सरकार ने रक्षा, बीमा, पेंशन, अन्य वित्तीय सेवाएं, एआरसी, अंतरिक्ष, ब्रॉडकास्टिंग, फार्मास्यूटिकल्स समेत अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी निवेश को सुगम बनाने के लिए कई व्यापक एफडीआई सुधार किए हैं।

और इस सुधार को आगे बढ़ाते हुए 2025-26 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा क्षेत्र के लिए एफडीआई की लिमिट को 74 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी किए जाने की घोषणा की। हालांकि, यह लिमिट उन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगा, जो पूरी प्रीमियम राशि का भारत में निवेश करेंगी।

पिछले 10FY वर्षों में दोगुना हुआ एफडीआई प्रवाह

पिछले 10 वित्तीय वर्षों में भारत में एफडीआई दोगुना हो चुका है। डीपीआईआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक,2004-14 के बीच भारत में कुल 304.06 बिलियन डॉलर की एफडीआई आई, जो  2014-24 के बीच 120 फीसदी बढ़कर 667.74 बिलियन डॉलर हो गई।

यह पिछले 24 वर्षों में भारत में आए कुल एफडीआई (991.32 बिलियन डॉलर) का करीब 67 फीसदी हिस्सा है।

वित्त वर्ष 2014-15 में भारत में कुल 45.15 बिलियन डॉलर की एफडीआई आई, जो 2019-20 में बढ़कर 74.39 बिलियन डॉलर हो गई। वित्त वर्ष 2020-21 में भारत में कुल 81.97 बिलियन डॉलर एफडीआई आया, जो 2022-23 में बढ़कर 71.36 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच गया।

इस मामले में एक बड़ी उपलब्धि उस वक्त हासिल हुई, जब अप्रैल 2000 के बाद से भारत में कुल एफडीआई इनफ्लो 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। एफडीआई को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने सुगम कारोबार की नीति को बढ़ावा दिया है, जिसके तहत कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्र ऑटोमेटेड रूट के जरिए 100 फीसदी एफडीआई के लिए खुले हैं।

भारत में एफडीआई को लेकर 16 दिसंबर 2024 को लोकसभा में पूछे गए (अतारांकित) सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था, “प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निवेशक अनुकूल नीतियों को लागू किया है,जिसमें कुछ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्र स्वचालित मार्ग के तहत 100% एफडीआई के लिए खुले हैं। 90% से अधिक एफडीआई प्रवाह इसी रूट के जरिए आता है।”

इन सेक्टर्स को मिला सर्वाधिक FDI

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2023-24 में जहां भारत में सर्वाधिक एफडीआई सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका, नीदरलैंड्स और जापान से आया। देश में आए कुल एफडीआई में इन पांच देशों की हिस्सेदारी 73.9 फीसदी रही और इसका सर्वाधिक लाभ भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मिला।

वहीं, सर्विस सेक्टर भारत में आने वाले एफडीआई का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा। सर्विस सेक्टर में कंप्यूटर सर्विसेज, कम्युनिकेशंस सर्विसेज, फाइनेंशियल  सर्विसेज और बिजनेस सर्विसेज शामिल हैं। इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी और अन्य एनर्जी, खुदरा और थोक ट्रेड और ट्रांसपोर्ट सेक्टर रहा।

डीपीआईआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 55% है। अर्थव्यवस्था में इतनी बड़ी हिस्सेदारी के बावजूद सर्विस सेक्टर में कीमतों के उतार-चढ़ाव को मापने के लिए किसी प्राइसिंग इंडेक्स का अभाव बना हुआ है।

FDI वाले शीर्ष 5 राज्य

भारत में एफडीआई को लेकर 16 दिसंबर 2024 को लोकसभा में पूछे गए (अतारांकित) सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 2014 से एफडीआई निवेश का राज्यवार विवरण दिया था। अक्तूबर 2019 से सितंबर 2024 के बीच भारत में आए कुल एफडीआई का सर्वाधिक लाभ जिन पांच शीर्ष राज्यों को मिला, वे क्रमश: इस प्रकार हैं: महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली और तमिनलाडु।

वहीं, सबसे कम एफडीआई लाभ वाले राज्यों में पूर्वोत्तर भारत के राज्य शामिल हैं, जो त्रिपुरा, मेघालय, लद्दाख, नगालैंड और मणिपुर है। महाराष्ट्र को जहां उपरोक्त अवधि में करीब 83 अरब डॉलर का एफडीआई मिला, वहीं कर्नाटक को करीब 54 अरब डॉलर, गुजरात को 43, दिल्ली को 35 और तमिलनाडु को करीब 12 अरब डॉलर का एफडीआई मिला।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की वर्किंग पेपर सीरीज के तहत हालिया प्रकाशित रिपोर्ट “रिलेटिव इकोनॉमिक  परफॉर्मेंस ऑफ इंडियन स्टेट्स: 1960-61 to 2023-24” आजादी के बाद से भारत की जीडीपी में राज्यों के योगदान और औसत राष्ट्रीय आय के मुकाबले प्रति व्यक्ति आय के आधार पर राज्यों की इकोनॉमिक ग्रोथ के ट्रेंड्स का अध्ययन किया गया था, और इस रिपोर्ट में भी दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों का अन्य राज्यों के मुकाबले मजबूत प्रदर्शन का जिक्र है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में इकॉनमिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर राकेश कुमार सिंह बताते हैं, “किसी भी देश में एफडीआई के इनफ्लो का सीधा संबंध इस बात से है कि वहां पॉलिसी को लेकर कितनी निश्चितता की स्थिति है। साथ ही आर्थिक सुधारों को लेकर सरकारों का गंभीर रवैया, आर्थिक स्थिरता और इन्फ्रास्ट्रक्चर (परिवहन, ऊर्जा आदि) की स्थिति इसे तय करती है।”

सिंह ने कहा कि लॉन्ग टर्म की आर्थिक नीति निवेशकों में भरोसा पैदा करती है और हमने देखा है कि जिन देशों में आर्थिक स्थिरता का माहौल रहा है, वे एफडीआई के आकर्षक गंतव्य हैं। भारत भी समय-समय पर आर्थिक सुधारों के जरिए ऐसा करता रहा है। उन्होंने कहा, “कुल मिलाकर मजबूत आर्थिक क्षमता, व्यवसाय हितैषी नीतियां और मजबूत इनोवेशन ईकोसिस्टम किसी भी देश को एफडीआई निवेश के लिए अनुकूल बनाती हैं।”

इस रिपोर्ट (1960-61 से 2023-24) के मुताबिक, 1991 के आर्थिक उदारीकरण के पहले दक्षिणी राज्यों का आर्थिक प्रदर्शन बेहतर नहीं था, लेकिन 91 के आर्थिक उदारीकरण के बाद देश की कुल जीडीपी में दक्षिणी राज्यों की भूमिका अन्य राज्यों के मुकाबले अग्रणी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी और पश्चिम राज्यों का देश के अन्य राज्यों के मुकाबले प्रदर्शन शानदार रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात का प्रदर्शन मजबूत और स्थिर रहा है और अध्ययन में शामिल अवधि के दौरान गोवा की प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो गई। उत्तर भारतीय राज्यों में दिल्ली और हरियाणा का प्रदर्शन शानदार रहा है और दिल्ली प्रति व्यक्ति आय के लिहाज से शीर्ष पायदान पर काबिज है। वहीं, पूर्वी राज्यों की स्थिति चिंताजनक रही।

बताते चलें कि एफडीआई के मामले में शीर्ष राज्यों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, दिल्ली, तमिलनाडु और हरियाणा शुमार हैं।

बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों की विस्तृत जानकारी प्रदान करती एक्सप्लेनर रिपोर्ट को विश्वास न्यूज के एक्सप्लेनर सेक्शन में पढ़ा जा सकता है।

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