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Explainer : सिर दर्द, याददाश्त में कमी, ब्रेन ट्यूमर के हैं प्रमुख संकेत

ब्रेन ट्यूमर के किसी भी लक्षण को हल्‍के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए, वरना जान जा सकता है। आइए विस्‍तार से ब्रेन ट्यूमर के बारे में जानते हुए इसके लक्षण और बचाव के बारे में जानते हैं।

नई दिल्‍ली। दुनियाभर में 8 जून को वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस घातक बीमारी से जागरूक किया जा सके। जब मस्तिष्‍क में कोशिकाएं असामान्‍य तरीके से बढ़ने लगती हैं, तो ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। ये कोशिकाएं कैंसर युक्‍त भी हो सकती हैं और कैंसर रहित भी। मतलब यह है कि हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। ब्रेन में जब ट्यूमर होता है तो उसका दुष्‍प्रभाव शरीर के दूसरे अंगों पर दिखना शुरू हो जाता है। इसलिए ब्रेन ट्यूमर के किसी भी लक्षण को हल्‍के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए, वरना जान जा सकता है। आइए विस्‍तार से ब्रेन ट्यूमर के बारे में जानते हुए इसके लक्षण और बचाव के बारे में जानते हैं।

सबसे पहले बात करते है कि आखिर ब्रेन ट्यूमर क्‍या होता है।

हावर्ड के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर असामान्य रूप से बढ़ने वाली कोशिकाओं का एक समूह है। यह गैर-कैंसरयुक्त या कैंसरयुक्त भी हो सकता है। सभी प्रकार के ब्रेन ट्यूमर गंभीर होते हैं। इसके कारण मस्तिष्क की संरचनाएं संकुचित और क्षतिग्रस्त हो जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हर साल ब्रेन ट्यूमर के 28 हजार से ज्‍यादा केस सामने आते हैं। जबकि 24 हजार से ज्‍यादा लोगों की मौत इस जानलेवा बीमारी के कारण हो जाती है। डॉक्‍टर्स कहते हैं कि ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर बीमारी है। यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।

बीएचयू के चिकित्‍सा विज्ञान संस्‍थान के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय कहते हैं कि ब्रेन ट्यूमर का ठीक-ठीक कारण बताना संभव नहीं है। मस्तिष्‍क में जब कोशिकाएं असामान्‍य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो कई प्रकार की समस्‍या पैदा होने लगती है, क्‍योंकि हमारे पूरे शरीर को ब्रेन ही संचालित करता है। दुनियाभर में इसके कारण और इलाज को लेकर रिसर्च चल रही हैं। ब्रेन ट्यूमर होने के कुछ कारणों में डीएनए में परिवर्तन, कुछ आनुवंशिक स्थितियाँ, जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस और वॉन हिप्पेल-लिंडौ रोग, रेडिएशन के संपर्क में आने से, खासकर पुरानी रेडिएशन थेरेपी और पर्यावरणीय कारण भी हो सकते हैं।

दिल्‍ली स्‍टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. शांभवी शर्मा ब्रेन ट्यूमर के बारे में विस्‍तार से बताते हुए कहती हैं कि ट्यूमर का मतलब होता है शरीर के किसी भाग में असामान्य कोशिकाओं का बढ़ना। यह सामान्य या घातक दोनों हो सकता है। ब्रेन में भी दोनों प्रकार के ट्यूमर हो सकते हैं। घातक ब्रेन ट्यूमर को ग्रेड 1 से 4 तक बांटा जाता है। ग्रेड जितना ज़्यादा होता है, ट्यूमर उतना ही खतरनाक होता है।

डॉ. शांभवी शर्मा ब्रेन ट्यूमर से बचाव के लिए बताते हुए आगे कहती हैं कि अधिकांश ब्रेन ट्यूमर को रोकना मुश्किल होता है। फिर भी पर्याप्‍त नींद लेना जरूरी है। इसके अलावा खुद को रेडिएशन से बचाना जरूरी है। बिना कारण के स्‍कैन नहीं करवाना चाहिए। मोबाइल फोन को सोते समय कभी भी अपने सिरहाने नहीं रखना चाहिए। नियमित एक्‍सरसाइज के साथ किसी भी प्रकार के नशे से दूरी आवश्‍यक है। अपने भोजन में प्रतिदिन फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

प्रो. मनोज पांडेय कहते हैं कि ब्रेन में ट्यूमर कहां है, उसके आधार पर इसका नाम होता है। पौष्टिक खानपान और नशे से दूर रहकर इसके खतरे को कम तो किया जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। इसलिए किसी भी प्रकार की समस्‍या आने पर अपने डॉक्‍टर से जरूर संपर्क करना चाहिए।

एक्‍सपर्ट कहते हैं कि ब्रेन ट्यूमर के कोई तयशुदा लक्षण या संकेत नहीं है,लेकिन सामान्‍य तौर पर ब्रेन ट्यूमर होने पर मरीज को सिर में दर्द होता है, वक्‍त बीतने के साथ लगातार बढ़ता जाता है। इसके अलावा शरीर के दूसरे अंगों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। इसमें नजरें कम हो सकती हैं। कई बार दौरे आ सकते हैं। इतना ही नहीं, लकवा भी मार सकता है। उल्‍टी आना भी इसके लक्षण हो सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी लक्षण ब्रेन ट्यूमर के ही हैं। यह बहुत सामान्‍य लक्षण हैं, जो दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं।

नेशनल ब्रेन ट्यूमर सोसायटी के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के कारण होने वाले कुछ सामान्य लक्षण हैं। जिन पर ध्‍यान रखने की आवश्‍यकता है।

डिस्क्लेमर : यह आर्टिकल एक्सपर्ट्स की मदद से लिखा गया है। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के लिए है। किसी भी सलाह के लिए अपने डॉक्‍टर से परामर्श लें।

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