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Explainer : दिल से लेकर दिमाग तक का दुश्‍मन है हाई BP, अच्‍छी जीवनशैली और सक्रियता ही है बचाव

  • By: Ashish Maharishi
  • Published: May 16, 2025 at 05:09 PM
  • Updated: May 16, 2025 at 05:12 PM

नई दिल्‍ली। दुनियाभर में 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है। पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, विश्व उच्च रक्तचाप दिवस इसलिए मनाया जाता है, ताकि इसे लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाई जा सके और उच्च रक्तचाप की रोकथाम, पता लगाने और नियंत्रण को बढ़ावा दिया जा सके। हृदय से जुड़ी बीमारियों के लिए यह काफी हद तक जिम्‍मेदार है।

वाराणसी स्थित बीएचयू के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर ओम शंकर कहते हैं कि हाइपरटेंशन डे मनाने का मुख्‍य लक्ष्‍य यही है कि दुनिया इसके खतरे को समझे। इसे लेकर जितनी ज्‍यादा जागरूकता होगी, उतनी ज्‍यादा जानें बचेंगी।

दो प्रकार का होता है ब्‍लड प्रेशर

रक्तचाप (ब्‍लड प्रेशर) दो प्रकार का होता है। हाई ब्लड प्रेशर को हाइपरटेंशन कहते हैं। वहीं, लो ब्लड प्रेशर को हाइपोटेंशन कहा जाता है। हाइपरटेंशन में धमनियों में खून का प्रेशर बढ़ जाता है, जबकि हाइपोटेंशन में यह कम हो जाता है। दोनों प्रकार के ब्‍लड प्रेशर से शरीर में कई प्रकार के रोग हो सकते हैं। इसलिए सही समय पर इनकी पहचान करके समुचित इलाज की आवश्‍यकता पड़ती है।

हाइपरटेंशन की वजह

हाइपरटेंशन के लिए काफी हद तक लोगों की खराब जीवनशैली जिम्‍मेदार है। लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो गई है। जंक फूड, ज्‍यादा समय तक बैठे रहना और तनाव भी हाई बीपी के लिए जिम्‍मेदार है। इसके कारण दिल, दिमाग, किडनी तक पर बुरा असर पड़ता है। कई बार मरीज की जान भी चली जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर तब होता है, जब आपकी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) में प्रेशर बहुत अधिक हो जाता है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं करवाया जाए तो यह गंभीर हो सकता है। हाई ब्‍लड प्रेशर वालों को लक्षण महसूस नहीं हो सकते हैं। इसका पता लगाने के लिए समय-समय पर इसकी जांच करवानी चाहिए।

हाई BP किन व्‍यक्तियों को हो सकता है

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या किसी भी व्‍यक्ति हो सकती है। 30 साल से अधिक उम्र के लोगों को हर 3 से 6 महीने में एक बार बीपी की जांच करानी चाहिए। इसके अलावा तनाव, खराब लाइफस्टाइल, मोटापा और कम उम्र के लोगों को भी हाई ब्‍लड प्रेशर हो सकता है।

हाई ब्‍लड प्रेशर के कारण

हाई ब्‍लड प्रेशर का कोई एक कारण नहीं हो सकता है। यह किसी को भी हो सकता है। फिर भी कुछ प्रमुख कारण नीचे दिए गए हैं।

हाई बीपी के लक्षण

हाई बीपी के कोई खास लक्षण नहीं होते हैं। इसलिए इसे साइलेंट किलर कहा जाता है। इससे बचाव का सबसे अच्‍छा तरीका है कि अपने ब्‍लड प्रेशर पर नजर रखें। उसे नियमित जांचते रहें। नीचे कुछ लक्षण बताए जा रहे हैं, उसमें से कोई भी लक्षण दिखने पर डॉक्‍टर से जरूर मिलें।

हाइपरटेंशन से बचने के लिए एक्‍सपर्ट DASH (Diet Approaches to Stop Hypertension) डाइट अपनाने की सलाह देते हैं।

लो ब्‍लड प्रेशर के बारे में जानें

अब बात करते हैं लो ब्‍लड प्रेशर की। नेशनल हर्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के अनुसार, लो ब्‍लड प्रेशर को हाइपोटेंशन कहते हैं। लो ब्‍लड प्रेशर में दिमाग को पर्याप्‍त ब्‍लड प्रेशर के साथ नहीं पहुंच पाता है, उसके कारण कई प्रकार की समस्‍या हो सकती है। हाई ब्‍लड प्रेशर की तुलना में लो ब्‍लड प्रेशर कम जानलेवा होता है। यह कोई बीमारी नहीं है। इसमें कमजोरी, चक्‍कर आना, थकान, उल्‍टी, त्‍वचा का पीला होना, हाथ-पैर का ठंडा होना प्रमुख लक्षण हैं। कई बार नजर धुंधली हो जाती है। कई बार शरीर में सोडियम की कमी होने के कारण भी लो बीपी होता है। यदि डिहाइड्रेशन हो गया है तो ऐसी स्थिति में पानी में नमक डालकर पिलाना चाहिए। इसके अलावा पानी में ग्‍लूकोज मिलाकर पिलाना चाहिए। स्ट्रॉन्ग कॉफी पिलाने से भी राहत मिल सकती है। मरीज को लिटाकर पैर को ऊंचा कर देना चाहिए, ताकि ब्रेन तक ब्‍लड पहुंच पाए। यदि ब्‍लड प्रेशर 100/60 से कम हो जाता है, तो यह स्थिति लो ब्‍लड प्रेशर कहलाती है।

डिस्क्लेमर : यह आर्टिकल एक्सपर्ट्स की मदद से लिखा गया है। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के लिए है। किसी भी सलाह के लिए अपने डॉक्‍टर से परामर्श लें।

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