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Fact Check: पीएम मोदी के 2015 के शंघाई भाषण के वीडियो को काट-छांट कर गलत दावे के साथ किया जा रहा है वायरल

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि पीएम मोदी के 2015 के पुराने वीडियो को काट-छांटकर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। असल में, प्रधानमंत्री उस समय पुरानी सरकार के कार्यकाल की आलोचना कर रहे थे। वायरल पोस्ट का दावा झूठा है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक छोटा वीडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीएम मोदी को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “पिछले जन्म में कौन से पाप किए जो हम हिंदुस्तान में पैदा हो गए।” यूजर्स इस वीडियो को साझा करते हुए दावा कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री विदेश जाकर भारत और भारतीयों का अपमान कर रहे हैं।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि वायरल हो रहा दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत है। वायरल वीडियो प्रधानमंत्री के 2015 के शंघाई (चीन) दौरे के दौरान दिए गए एक विस्तृत भाषण का एक छोटा हिस्सा है, जिसे संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है। असल में, पीएम मोदी शंघाई में दिए भाषण में 2014 से पहले की सरकार के कार्यकाल की आलोचना कर रहे थे।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक पर ‘बिट्टू यादव‘ ने इस रील को साझा किया, जिसमें पीएम मोदी के इस बयान को दिखाकर उन्हें ‘भारत विरोधी’ बताने की कोशिश की जा रही है। पोस्ट के साथ कैप्शन में लिखा जा रहा है “देख लो और भक्तों अपने पापा का देश का तारीफ करते हुए।”

पड़ताल

जांच की शुरुआत के लिए हमने वायरल वीडियो के कीवर्ड्स को गूगल पर सर्च किया। हमें भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 16 मई 2015 को अपलोड किया गया पूरा वीडियो मिला। यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शंघाई, चीन में भारतीय समुदाय को संबोधित किए जाने का है।

57 मिनट के इस लंबे वीडियो में, 51 मिनट 25 सेकंड के बाद पीएम मोदी 2014 के चुनाव से पहले के भारत में मौजूद माहौल के बारे में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा,

“एक साल के भीतर-भीतर… ‘छोड़ो यार, अब कुछ होगा नहीं, पता नहीं पिछले जन्म में क्या पाप किए थे कि हिंदुस्तान में पैदा हुए’… यह जो मनोभाव था, उसमें से आज दुनिया कह रही है कि विश्व का सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला कोई देश है, तो उस देश का नाम हिंदुस्तान है।”

स्पष्ट है कि पीएम मोदी 2014 से पहले के कथित निराशावादी माहौल का उदाहरण दे रहे थे। उन्होंने इन शब्दों का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया कि अब भारत के प्रति दुनिया और देशवासियों का नजरिया बदल चुका है।

दैनिक जागरण में अंतरराष्ट्रीय मामलों के वरिष्ठ पत्रकार जेपी रंजन, जो पीएम मोदी की कई विदेश यात्राओं को कवर कर चुके हैं, ने इस वायरल दावे का खंडन करते हुए बताया, “यह वीडियो मई 2015 का है, जब प्रधानमंत्री मोदी चीन की यात्रा पर थे। शंघाई में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए उन्होंने तत्कालीन ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ और लोगों की हताशा का जिक्र किया था। उनका मकसद यह बताना था कि कैसे भारत अब एक आत्मविश्वासी राष्ट्र बन चुका है। वीडियो के एक छोटे हिस्से को काटकर गलत संदर्भ के साथ पेश करना सरासर गलत है।”

मई 2015 में प्रधानमंत्री की चीन यात्रा के दौरान कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि पीएम मोदी ने शंघाई में करीब 5,000 भारतीयों को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने भारत के आर्थिक विकास और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे विजन पर चर्चा की थी।

हालांकि, यह बात सही है कि प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान के बाद, “कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी। कांग्रेस प्रवक्ता ने उस समय कहा था कि प्रधानमंत्री ने विदेशी धरती पर भारतीयों की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। विपक्षी नेताओं का तर्क था कि प्रधानमंत्री यह संदेश दे रहे हैं कि 2014 से पहले भारतीयों को अपने देश में पैदा होने पर गर्व नहीं था। हालांकि, भाजपा और सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि प्रधानमंत्री का इरादा किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि पिछले शासनकाल के दौरान व्याप्त भ्रष्टाचार और निराशा के कारण लोगों में पैदा हुई ‘हताशा की भावना’ को रेखांकित करना था।”

वायरल वीडियो शेयर करने वाले यूजर बिट्टू यादव के फेसबुक पर लगभग 3000 फॉलोअर्स हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि पीएम मोदी के 2015 के पुराने वीडियो को काट-छांटकर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। असल में, प्रधानमंत्री उस समय पुरानी सरकार के कार्यकाल की आलोचना कर रहे थे। वायरल पोस्ट का दावा झूठा है।

  • Claim Review : पीएम मोदी ने भारत में जन्म लेने को
  • Claimed By : 'Bittu Yadav' on Facebook
  • Fact Check : झूठ
Our Sources

Video from BJP Official YouTube, Dated 16 May 2015
Report from NDTV News, Dated 16 May 2015
Report from The Hindustan Times, Dated 19 May 2015
Report from The Economic Times, Dated 19 May 2015

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