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Fact Check: महिला पर लाठीचार्ज करती यूपी पुलिस का वीडियो पुराना, अंबेडकर नगर की हालिया घटना का नहीं

महिलाओं पर लाठीचार्ज करती पुलिस के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा भ्रामक है। असल में वायरल हो रहा वीडियो हाल-फिलहाल में हुई घटना का नहीं, बल्कि करीब चार साल पुराना है। साल 2022 में विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।  इसका महरुआ के नसीरपुर गांव में हुए हंगामें से कोई संबंध नहीं है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के एक गांव में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जंयती (14 अप्रैल) के मौके पर उनकी प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। महिलाओं ने पुलिस व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसी से जोड़ते हुए महिला पर लाठीचार्ज करते पुलिसकर्मी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को हाल की घटना का बताते हुए पोस्ट में कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस ने महिलाओं पर लाठीचार्ज किया। दावा है कि महिलाएं अंबेडकर नगर में भीमराव रामजी आंबेडकर की मूर्ति पर कालिख लगाने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। 

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा भ्रामक है। असल में वायरल हो रहा वीडियो हाल-फिलहाल में हुई किसी घटना का नहीं, बल्कि करीब चार साल पुराना है। साल 2022 में आंबेडकर की मूर्ति पर कालिख लगाने को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसका महरुआ के नसीरपुर गांव में हुए हंगामें से कोई संबंध नहीं है।

क्या हो रहा है वायरल?

फेसबुक यूजर ‘पासी बढ़ेगा आगे’ ने 17 अप्रैल 2026 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने महिलाओं को सरेआम पीटा। अंबेडकर नगर में बाबा साहेब की मूर्ति पर कालिक पोतने को लेकर महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया तो पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को डंडों से पीटा गया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल 

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें वायरल वीडियो ‘TIMES NOW’ के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर मिला। वीडियो को 7 नवंबर 2022 को शेयर किया गया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया था और उन पर लाठियां बरसाई थीं। इसका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कहा कि महिलाओं द्वारा पुलिस और उनके वाहनों पर पत्थर फेंकने के बाद “मामूली बल” का प्रयोग किया था।

प्राप्त जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट एनडीटीवी की वेबसाइट पर मिली। इस रिपोर्ट को  7 नवंबर 2022 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के जलालपुर का है। पुलिस ने इलाके में बीआर आंबेडकर की प्रतिमा के विध्वंस के विरोध में प्रदर्शन कर रही महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की थी। महिलाओं का एक समूह विरोध प्रदर्शन कर रहा था, तभी पुलिस उन्हें तितर-बितर करने के लिए पहुंची। पुलिस के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर, जिनमें एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे, पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को “मामूली बल” का प्रयोग करना पड़ा।

यूपी पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से वायरल वीडियो को लेकर 17 अप्रैल 2026 को एक पोस्ट किया था। इसके कैप्शन में लिखा है, “UPPFactCheck – पोस्ट में उल्लिखित वीडियो वर्ष 2022 का है जिसमें तत्समय अराजकतत्वों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा चुकी है। उक्त पुराने वीडियो को वर्तमान में भ्रामक तरीके से प्रसारित किए जाने का @ambedkarnagrpol द्वारा खंडन किया गया है।”

पड़ताल के दौरान हमें वायरल वीडियो से जुड़ी एक पोस्ट ‘AMBEDKARNAGAR POLICE’ के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी मिली। पोस्ट को 6 नवंबर 2022 को शेयर किया गया था। कैप्शन के अनुसार, “जनपद अम्बेडकरनगर थाना को0 जलालपुर क्षेत्रान्तर्गत ग्राम वाजिदपुर में अंबेडकर प्रतिमा पर कालिख पोतने के विवाद में अराजकतत्वों द्वारा किये गये उपद्रव में स्थानीय पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक अम्बेडकरनगर द्वारा दी गयी।” इस पोस्ट में पुलिस अधीक्षक की बाइट भी मौजूद है।

अधिक जानकारी के लिए हमने दैनिक जागरण के अंबेडकर नगर के ब्यूरो चीफ अजय कुमार से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल वीडियो करीब चार साल पहले हुई घटना का है।

क्या है संदर्भ?

दैनिक जागरण की वेबसाइट पर 15 अप्रैल 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर अंबेडकर नगर में बवाल हो गया। महरुआ के नसीरपुर गांव में बिना अनुमति कुछ लोगों ने डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा रखी थी। इसी वजह से दूसरे पक्ष नाराज हो गया और विरोध करना शुरू कर दिया। अंबेडकर नगर में बवाल के मामले में एसपी प्राची सिंह ने एक्शन लिया है। इस प्रकरण में एक महिला उपनिरीक्षक, आरक्षी व एलआईयू उपनिरीक्षक समेत तीन पुलिसकर्मियों को लापरवाही का दोषी पाया गया है। एसपी प्राची सिंह ने दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। वहीं, मामले की स्थिति के सम्बंध में एलआईयू उपनिरीक्षक राम सूरत के विरुद्ध कार्रवाई के लिए संस्तुति सहित रिपोर्ट लखनऊ भेज दिया गया है।

‘News Khabar india’ ने 15 अप्रैल 2025 को हंगामें के वीडियो को अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किया था। 

अंत में हमने वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर करने वाले फेसबुक यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को दो लाख से अधिक लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि महिलाओं पर लाठीचार्ज करती पुलिस के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा भ्रामक है। असल में वायरल हो रहा वीडियो हाल-फिलहाल में हुई घटना का नहीं, बल्कि करीब चार साल पुराना है। साल 2022 में विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।  इसका महरुआ के नसीरपुर गांव में हुए हंगामें से कोई संबंध नहीं है।

  • Claim Review : विरोध प्रदर्शन करती महिलाओं पर लाठी चार्ज करती उत्तर प्रदेश पुलिस।
  • Claimed By : FB User पासी बढ़ेगा आगे
  • Fact Check : झूठ

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