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Fact Check: जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन को डीजल इंजन से चलाने का दावा निकला FAKE

मेंटेनेंस के लिए लोकोमोटिव इंजन के साथ जा रही हाइड्रोजन ट्रेन के वीडियो को गलत दावे के साथ वायरल किया गया है। रेलवे की ओर से भी इसका खंडन किया जा चुका है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच चल रही है। अब इसी ट्रेन का एक वीडियो वायरल करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह एक ही दिन में खराब हो गई इसलिए इसे डीजल इंजन से चलाया जा रहा है। इस वीडियो को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा जा रहा है। वायरल पोस्ट को सच मानकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं।

विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की जांच की। यह दावा फर्जी साबित हुआ। वायरल वीडियो के साथ किया गया दावा गलत है। दरअसल, हाइड्रोजन ट्रेन को रखरखाव के लिए ले जाने और वापस लाने के लिए लोकोमोटिव (अतिरिक्त इंजन) का इस्तेमाल किया जा रहा है। वायरल दावे को रेलवे ने भी गलत बताया है।

क्या है वायरल?

फेसबुक पेज ‘INDIA POLLS 24’ ने 19 जुलाई 2026 को एक वीडियो को पोस्ट करते हुए दावा किया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस हाईड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई को हरि झंडी दिखाकर चालू किया था, वो एक ही दिन में खराब हो गई और डीजल इंजन की मदद से अब उसे चलाया जा रहा है। हरियाणा के जींद से चालू की थी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन,इस ट्रेन का बताया था सरकार की उपलब्धि।”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसके आर्काइव वर्जन को यहां देखा जा सकता है। इसे सच मानकर कई यूजर्स सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल पोस्ट के आधार पर कुछ कीवर्ड बनाए और फिर इन्हें गूगल ओपन सर्च टूल के जरिए सर्च किया। हमें ‘भास्कर डॉट कॉम’ की 20 जुलाई 2026 की एक खबर में जींद मुख्यालय में तैनात सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट मेहर सिंह का एक बयान छपा हुआ मिला। इसमें बताया गया था, “18 जुलाई को हाइड्रोजन ट्रेन को रेलवे शेड में ले जाया गया था। इसे कुछ लोगों ने तकनीकी खराबी मान लिया, जबकि वास्तविकता यह है कि ट्रेन को नियमित धुलाई और मेंटेनेंस के लिए भेजा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी कोई ट्रेन शेड में जाती है, तो उसे डीजल इंजन की सहायता से ले जाया जाता है। यह रेलवे की सामान्य प्रक्रिया है और इसका तकनीकी खराबी से कोई संबंध नहीं होता है।”

इसी तरह ‘टीवी9 भारतवर्ष’ ने भी हाइड्रोजन ट्रेन के वायरल वीडियो को लेकर 20 जुलाई 2026 को एक खबर प्रकाशित की थी। इसमें रेलवे के हवाले से वायरल वीडियो के साथ किए गए दावे का खंडन किया गया था।

विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए नॉर्दन रेलवे के एक्स हैंडल को स्कैन किया। यहां हमें रेलवे का वायरल वीडियो को लेकर दिया गया जवाब मिला। नॉर्दन रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन और रखरखाव को लेकर एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन जींद-सोनीपत के बीच ही किया जा रहा हैं। स्टैंडर्ड प्रोसीजर के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन को मेंटेनेंस के लिए ले जाने के लिए, लोकोमोटिव का उपयोग किया जाएगा। उक्त पोस्ट भ्रामक एवं तथ्यहीन है।” यह पोस्ट 19 जुलाई 2026 को की गई थी।

विश्वास न्यूज से बातचीत में उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने वायरल पोस्ट को फेक बताया।

विश्वास न्यूज ने जांच के दौरान दैनिक जागरण, जींद के वरिष्ठ संवाददाता बिजेंद्र मलिक से संपर्क किया और उनके साथ वायरल वीडियो शेयर किया। उन्होंने बताया कि वायरल पोस्ट गलत है। हाइड्रोजन इंजन से यह ट्रेन जींद-सोनीपत ट्रैक पर चल रही है। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि दरअसल, 18 जुलाई 2026 को इस हाइड्रोजन ट्रेन को सर्विसिंग व मेंटेनेंस के लिए डीजल इंजन के साथ शकूरबस्ती ले जाया गया था। उसी रात को ट्रेन जींद वापस आ गई थी। इसके बाद 19 जुलाई से यह ट्रेन हाइड्रोजन इंजन से ही चल रही है।

क्या है संदर्भ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया। कुछ अन्‍य देशों के साथ भारत भी दुनिया का ऐसा देश बन गया है, जहां हाइड्रोजन ट्रेन चलती है। यह ट्रेन जींद-सोनीपत के बीच चल रही है। भारत के अलावा, जर्मनी, फ्रांस, इटली, चीन और जापान में इस तकनीक से ट्रेन चलती है। भारत की हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच हैं, जिनमें एक साथ 2600 यात्री सवारी कर सकते हैं।

‘दैनिक जागरण’ के जींद संस्करण में 18 जुलाई 2026 को प्रकाशित एक खबर के अनुसार, “यह भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन है, जिसे भारतीय रेलवे और उसके सार्वजनिक उपक्रमों ने देश में ही विकसित किया है। भविष्य में अन्य गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर भी ऐसी ट्रेनें चलाने की योजना है। ट्रेन की ऊर्जा हाइड्रोजन फ्यूल सेल से बनती है, जिससे संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता। निकास के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है।”

जांच के अंत में फर्जी दावा करने वाले फेसबुक पेज की जांच की गई। इस पेज को तीन हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह पेज गुरुग्राम से संचालित होता है। इसे जुलाई 2015 में बनाया गया था।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। मेंटेनेंस के लिए लोकोमोटिव इंजन के साथ जा रही हाइड्रोजन ट्रेन के वीडियो को गलत दावे के साथ वायरल किया गया है। रेलवे की ओर से भी इसका खंडन किया जा चुका है।

  • Claim Review : हाइड्रोजन ट्रेन खराब हुई तो उसे डीजल इंजन से चलाया गया।
  • Claimed By : FB User India Polls 24
  • Fact Check : झूठ

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