Fact Check: छपरा स्टेशन पर जलभराव का वायरल वीडियो AI निर्मित, नेपाल का नहीं है शख्स को बचाते हुए हाथी का वीडियो
जांच में दोनों वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुईं। छपरा जंक्शन में बाढ़ के नाम पर वायरल वीडियो एआई की मदद से बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर, बाढ़ में फंसे व्यक्ति को हाथी द्वारा बचाने का वीडियो नेपाल का नहीं है।
- By: Ashish Maharishi
- Published: Sep 2, 2026 at 06:54 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। बिहार के छपरा जंक्शन के नाम पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इसमें स्टेशन को पानी में डूबा हुआ दिखाया गया है। इस वीडियो को सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, एक वीडियो में एक हाथी को बाढ़ में फंसे एक इंसान को बचाते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को नेपाल बाढ़ हादसे का बताकर वायरल किया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने विस्तार से दोनों पोस्ट की जांच की। छपरा वाला वीडियो एआई-निर्मित साबित हुआ। वहीं, हाथी वाला वीडियो नेपाल हादसे के पहले से असम के नाम पर इंटरनेट पर मौजूद है।
क्या है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘इंजीनियर विकास पटेल’ ने 2 सितंबर 2026 को एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा, “कोशी नदी से छपरा जक्शन पानी से डूब चुका है रेलवे स्टेशन।”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां देखें।
इसी तरह ‘Tysontae’ नाम के एक फेसबुक पेज ने हाथी वाले वीडियो को नेपाल का बताकर 27 अगस्त 2026 को शेयर किया।

एक फेसबुक यूजर ने इसी वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच हाथी ने अपने महावत की जान बचाई।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने दोनों वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए इनकी एक के बाद एक जांच की।
पहले वीडियो की जांच
सबसे पहले छपरा जंक्शन के नाम पर वायरल वीडियो की जांच की गई। इस वीडियो को हमने सबसे पहले ध्यान से स्कैन किया। वीडियो में पानी का बहाव और इमारत के रंंग में अंतर से स्पष्ट हो गया कि वीडियो को एआई की मदद से बनाया गया है।
इसके बाद पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल वीडियो को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले हमने ‘Hive Moderation’ की मदद से इसे स्कैन किया। हाइव के एनालिसिस में इस वायरल वीडियो के एआई से बने होने के करीब 97.9 फीसदी संकेत मिले।

इसके बाद हमने ‘AIorNot’ टूल का इस्तेमाल किया। इस टूल ने वायरल वीडियो के कीफ्रेम के लिए 71 फीसदी संभावना इस बात की जताई कि इसे एआई से बनाया गया है।

गूगल ओपन सर्च टूल की मदद से खोजने पर हमें ‘भास्कर डॉट कॉम’ की वेबसाइट पर एक खबर मिली। 1 सितंबर 2026 की इस खबर में बताया गया कि छपरा जंक्शन पर भारी जलजमाव दिखाने वाले एक एआई जनरेटेड वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने के मामले में रेलवे और जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इसे लेकर एफआईआर भी दर्ज की गई है।
सर्च के दौरान हमें ‘North Eastern Railway’ के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट मिली। 30 अगस्त 2026 की इस पोस्ट में बताया गया, “छपरा जं. रेलवे स्टेशन का यह वीडियो असत्य और भ्रामक है। यह AI द्वारा बनाया गया है, जो वास्तविकता से परे है। कृपया इस तरह का वीडियो पोस्ट कर आमजन के बीच भ्रम की स्थिति न पैदा करें। इसके लिए साइबर सेल में कानूनी कार्यवाही की जा रही है।”
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए एआई एक्सपर्ट डॉ. अजहर माचवे से संपर्क किया। उन्होंने इस वीडियो को एआई-निर्मित बताया। उन्होंने कहा कि वीडियो में पानी और स्टेशन की घड़ी को ध्यान से देखने पर साफ पता चलता है कि ये फेक हैं।
विश्वास न्यूज ने जांच के दौरान दैनिक जागरण, छपरा के प्रभारी राजीव रंजन से बात की। उन्होंने बताया कि छपरा में कोसी नदी नहीं बहती है। वीडियो फेक है।
दूसरे वीडियो की जांच
विश्वास न्यूज ने हाथी वाले वीडियो की जांच के लिए इसके कई कीफ्रेम्स निकाले। फिर इन्हें गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया गया। हमें ‘बांग्ला व्यूज 247’ नाम के एक यूट्यूब चैनल पर यह वीडियो मिला। इसे 9 अगस्त 2026 को अपलोड करते हुए बांग्ला भाषा में बताया गया कि भारत के असम में बाढ़ के दौरान पालतू हाथी ने अपने मालिक की जान बचाई।
जांच में हमें पता चला कि असम में हाथी का एक शख्स को बचाने वाला वीडियो नेपाल की बाढ़ से पहले का है। नेपाल में 26 अगस्त 2026 को बाढ़ आई थी, जिससे जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। हालांकि, वायरल वीडियो 9 अगस्त 2026 से इंटरनेट पर मौजूद है।
इसी तरह हमें ‘The Wire India’ के फेसबुक पेज पर भी यह वीडियो मिला। इसे असम में आई बाढ़ के दौरान का वीडियो बताया गया।
विश्वास न्यूज वायरल वीडियो की सत्यता और जगह की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह वीडियो नेपाल हादसे के पहले से इंटरनेट पर मौजूद है। इस वीडियो का 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई बाढ़ से कोई संबंध नहीं है।
क्या है संदर्भ?
नेपाल से लेकर असम तक इस साल बाढ़ का कहर देखने को मिला। 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई बाढ़ से जानमाल का काफी नुकसान हुआ है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट में बताया गया कि नेपाल के अलग-अलग जिलों और पड़ोसी देश भारत में शवों के मिलने का सिलसिला जारी है। जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई है, उनकी जानकारी नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड की जा रही है।
नेपाल के पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, भारत के 183 नागरिक अभी भी लापता हैं। नेपाल की ‘ईकांतिपुर’ वेबसाइट के अनुसार, 2 सितंबर 2026 तक कुल 1,050 शव मिले हैं, जबकि 3916 लोग अभी भी लापता हैं। सबसे अधिक शव चितवन जिले में मिले हैं।
जांच के अंत में छपरा जंक्शन और नेपाल के नाम पर वीडियो शेयर करने वाले दोनों यूजर्स के प्रोफाइल की जांच की गई। छपरा के नाम पर वायरल वीडियो शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर पांच हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह यूजर यूपी के हांडिया का रहने वाला है। यह अकाउंट अगस्त 2020 में बनाया गया था। हाथी वाले वीडियो को शेयर करने वाले यूजर को 22 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट जुलाई 2026 में बनाया गया था।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में दोनों वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुईं। छपरा जंक्शन में बाढ़ के नाम पर वायरल वीडियो एआई की मदद से बनाया गया है। वहीं दूसरी ओर, बाढ़ में फंसे व्यक्ति को हाथी द्वारा बचाने का वीडियो नेपाल का नहीं है।
- Claim Review : छपरा स्टेशन पर जलभराव
- Claimed By : FB User Vikash Patel
- Fact Check : झूठ
- Hive Moderation Analysis for AI Detection
- AIorNot Analysis for AI Detection
- Bhaskar.com News Report, Dated 1 Sep 2026
- X Post by North Eastern Railway, Dated 30 Aug 2026
- Video posted by Bangla View 247 Youtube Channel, Dated 9 Aug 2026
- FB handle of The Wire India, Dated 9 Aug 2026
- The Kathmandu Post Report, Dated 2 Sep 2026
- Tourism Department of Nepal
- EKantipur.com Report, Dated 2 Sep 2026
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