Fact Check: UGC विवाद के बीच शाहरुख खान का फेक बयान वायरल
यूजीसी के नए नियमों के समर्थन को लेकर शाहरुख खान का वायरल बयान गलत है। शाहरुख खान ने यूजीसी को लेकर इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। फर्जी बयान को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
- By: Pragya Shukla
- Published: Jan 29, 2026 at 02:03 PM
- Updated: Jan 30, 2026 at 06:15 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों का संगठन विरोध कर रहे हैं। इससे जोड़कर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। पोस्ट को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि अभिनेता शाहरुख खान ने UGC के नए नियमों का समर्थन किया है। उन्होंने इसके बारे में कहा है, “जो लोग शिक्षा सुधार चाहते हैं, उन्हें UGC बिल का समर्थन करना चाहिए – क्योंकि बदलाव यहीं से शुरू होता है।”
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। शाहरुख खान ने यूजीसी को लेकर इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। फर्जी बयान को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल?
इंस्टाग्राम यूजर ‘pragyagautamibaudhh’ ने 27 जनवरी 2026 को पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “जो लोग शिक्षा सुधार चाहते हैं, उन्हें UGC बिल का समर्थन करना चाहिए— क्योंकि बदलाव यहीं से शुरू होता है।” शाहरुख खान
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी ऐसी कोई न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें शाहरुख खान के इस बयान का जिक्र किया गया हो। अगर सच में शाहरुख खान ने इस तरह का कोई बयान दिया होता, तो उससे जुड़ी कोई न कोई न्यूज रिपोर्ट जरूर मौजूद होती।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने शाहरुख खान के एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक के आधिकारिक अकाउंट्स को भी खंगाला। हमें वहां भी दावे से जुड़ी कोई पोस्ट नहीं मिली।
अधिक जानकारी के लिए हमने शाहरुख की पीआर पर्सन (पब्लिक रिलेशन्स) शिल्पा हांडा से संपर्क किया। उन्होंने वायरल बयान को फर्जी बताया है।
क्या है पूरा विवाद
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समता विनियमन (इक्विटी रेगुलेशन) को लेकर देश के कुछ हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। नए नियम में अनूसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को जाति आधारित भेदभाव के तहत रखा गया है। दुरुपयोग होने पर कार्रवाई जैसा प्रवधान हटा दिया गया है। जिसके कारण इसका सबसे ज्यादा विरोध हो रहा है। इसके 3सी में दिया गया है, “जाति-आधारित भेदभाव” का अर्थ अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध केवल जाति या जनजाति के आधार पर भेदभाव है।”

आजतक की वेबसाइट पर 29 जनवरी 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए भेदभाव-विरोधी नियमों को लागू करने पर रोक लगा दी है।”
फोटो की सच्चाई जानने के लिए हमने संबंधित कीवर्ड्स और गूगल रिवर्स इमेज के जरिए सर्च किया। लेकिन हमें दावे से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में हमें फोटो के एआई होने का संदेह हुआ। हमने गूगल डीपमाइंड के Synth ID टूल का इस्तेमाल किया। यहां वायरल तस्वीर को सर्च करने पर नतीजों से पता चला कि यह तस्वीर एआई की मदद से बनाई गई है। नतीजे को नीचे देखा जा सकता है।

हमने एक अन्य टूल हाइव मॉडरेशन की मदद से भी फोटो को सर्च किया। इस टूल ने भी फोटो के एआई होने की संभावना जताई।

अंत में हमने इंस्टाग्राम पर गलत पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को करीब 20 हजार लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर शाहरुख खान का वायरल बयान गलत है। शाहरुख खान ने यूजीसी को लेकर इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। फर्जी बयान को गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
- Claim Review : UGC विवाद पर शाहरुख खान का बयान।
- Claimed By : Inst pragyagautamibaudhh's profile picture pragyagautamibaudhh
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