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Explainer: 9 सालों में 0 से 17 बिलियन UPI ट्रांजैक्शंस का रिकॉर्ड, रियल टाइम पेमेंट में टॉप 5 देशों में शीर्ष पर भारत

2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण में वित्तीय समावेशन के मामले में यूपीआई की अहमियत का जिक्र है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, "यूपीआई का उपयोग करने की जरूरत ने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को बैंक खाता खोलने के लिए प्रोत्साहित किया।"

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की तरफ से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन को लेकर जारी नए दिशानिर्देश एक अप्रैल 2025 से लागू हो जाएंगे। उपभोक्ताओं की सुरक्षा को देखते हुए एनपीसीआई ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके मुताबिक बैंकों को अब नियमित रूप से उन मोबाइल नंबर्स को हटाना होगा, जो बंद हो चुके हैं या जिन्हें नए यूजर्स को आवंटित किया जा चुका है। एनपीसीआई का यह दिशानिर्देश यूपीआई लेनदेन में होने वाली चूक को रोकने में मददगार साबित होगा।

अक्टूबर 2024 में यूपीआई ने एक महीने में 16.58 अरब फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस का रिकॉर्ड बनाते हुए कुल कुल 23.49 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन को पूरा किया। अक्तूबर 2023 के 11.40 अरब ट्रांजैक्शंस के मुकाबले सालाना आधार पर 45% की जबरदस्त वृद्धि रही।

इसके बाद यूपीआई कुल ट्रांजैक्शंस और लेनदेन की रकम के मामले में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। जनवरी 25 में यूपीआई ने रिकॉर्ड करीब 17 बिलियन ट्रांजैक्शंस संख्या के साथ कुल 23.48 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन को पूरा किया।

क्या है UPI और कैसे हुई शुरुआत?

 यह एक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 21 सदस्य बैंकों के साथ पायलट लॉन्च किया था। तत्कालीन RBI गवर्नर डॉ. रघुराम राजन के नेतृत्व में 11 अप्रैल 2016 को यह पायलट लॉन्च हुआ।

इसके बाद 25 अगस्त 2016 से बैंकों ने यूपीआई सक्षम एप्स को गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड करना शुरू किया।

UPI पर लाइव बैंकों की संख्या

2016 को 21 बैंकों के साथ इसका पायलट लॉन्च हुआ था और इसके बाद से बैंकों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। फरवरी 2017 में बैंकों की संख्या बढ़कर 44 हुई और फरवरी 25 में इस प्लेटफॉर्म पर कुल 652 बैंक लाइव या उपलब्ध हैं, जिनके उपभोक्ता यूपीआई के जरिए आसान भुगतान सेवा का लाभ उठा रहे हैं।

2024-25 के आर्थिक सर्वेक्षण में वित्तीय समावेशन के मामले में यूपीआई की अहमियत का जिक्र है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, “यूपीआई का उपयोग करने की जरूरत ने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को बैंक खाता खोलने के लिए प्रोत्साहित किया।”

यूपीआई का लगातार बढ़ता वॉल्यूम (कुल ट्रांजैक्शंस की संख्या) और वैल्यू (लेनदेन की कुल रकम) भारत के भुगतान क्षेत्र में यूपीआई की लगातार मजबूत होती स्थिति को बताता है। साथ ही यह कैशलेस इकोनॉमी  की तरफ देश की यात्रा को गति दे रहा है।

वैल्यू और वॉल्यूम में लगातार होता इजाफा

अप्रैल 2016 में इस सेवा की शुरुआत हुई और अप्रैल, मई और जून 2016 में वॉल्यूम (कुल ट्रांजैक्शंस की संख्या) और वैल्यू (लेनदेन की कुल रकम) शून्य रही।

हालांकि, इसके बाद इसके इस्तेमाल में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई और अक्टूबर 2024 में यूपीआई ने नया रिकॉर्ड बनाया। एक महीने में यूपीआई ने 16 बिलियन ट्रांजैक्शंस (वॉल्यूम) के साथ कुल 23.49 लाख करोड़ रुपये (वैल्यू) के लेनदेन को पूरा किया। फरवरी 24 में कुल वैल्यू 18.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो फरवरी 25 में बढ़कर 21.96 लाख करोड़ रुपये हो गई।

वहीं, वॉल्यूम के आधार पर देखें तो अक्तूबर 2024 में जहां कुल ट्रांजैक्शंस की संख्या 16.58 बिलियन रही, वह जनवरी 25 में बढ़कर करीब 17 बिलियन की नई ऊंचाई को छूने में सफल रही।

यूपीआई की वैश्विक मौजूदगी

यूपीआई  केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी दर्ज कराने में सक्षम रहा है। फिलहाल यूपीआई कुल सात देशों यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस में काम कर रहा है।

फ्रांस में यूपीआई की मौजदूगी इस लिहाज से विशेष है, क्योंकि यह यूरोप में इसकी शुरुआत है। एसीआई वर्ल्डवाइड रिपोर्ट 2024 के अनुसार, 2023 में वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेनदेन में भारत की हिस्सेदारी लगभग 49% रही, जो डिजिटल भुगतान इनोवेशन में भारत के नेतृत्व की स्थिति को दर्शाता है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में भारत में रियल टाइम ट्रांजैक्शंस की कुल संख्या 129.3 अरब रही, जो सालाना करीब 45 फीसदी जबरदस्त वृद्धि है और यह कुल रियल टाइम में भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शंस का 84% हिस्सा है।

वॉल्यूम (ट्रांजैक्शंस की संख्या) के आधार पर रियल टाइम मार्केट में भारत टॉप 5 देशों में शीर्ष पर है। दूसरे नंबर पर ब्राजील, थाईलैंड, चीन और पांचवें पायदान पर दक्षिण कोरिया मौजूद है।

बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों की विस्तृत जानकारी प्रदान करती एक्सप्लेनर रिपोर्ट को विश्वास न्यूज के एक्सप्लेनर सेक्शन में पढ़ा जा सकता है।

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