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Fact Check: नारायण भाऊराव दाभाड़कर के हॉस्पिटल में भर्ती होने और उनकी मौत की खबर को फर्जी बताने वाला यह वायरल पोस्ट है गलत

  • By Vishvas News
  • Updated: May 4, 2021

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर नागपुर के एक बुजुर्ग नारायण भाऊराव दाभाड़कर को लेकर पोस्ट वायरल हुई थी कि कोरोना के चलते वे हॉस्पिटल में भर्ती थे, लेकिन उन्होंने एक युवा पेशेंट के लिए अपना बेड छोड़ दिया और बाद में घर पर उनकी मृत्यु हो गई। इस किस्से को लेकर सोशल मीडिया पर अब एक पोस्ट वायरल हो रही है। इस पोस्ट के जरिए अब दावा किया जा रहा है कि ऐसी घटना कभी नागपुर में हुई ही नहीं। हॉस्पिटल के डीन की ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रही है। विश्वास न्यूज ने पड़ताल में पाया कि वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा गलत है।

दरअसल पड़ताल में यह पता चला कि 85 वर्षीय दाभाड़कर अस्पताल से घर भी आए थे और घर आकर उनकी मृत्यु भी हो गई थी। वायरल पोस्ट का यह दावा गलत है कि दाभाड़कर कभी अस्पताल नहीं गए और वे जिंदा हैं।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक यूजर स्वतंत्र विद्रोही ने यह पोस्ट शेयर किया है, जिसमें लिखे गए अंग्रेजी टेक्स्ट का हिंदी अनुवाद है: #NarayanDabhadkar स्टोरी, इंदिरा गांधी हॉस्पिटल नागपुर के सुपरिंटेंडेंट अजय प्रसाद ने कहा कि वायरल हो रही स्टोरी फर्जी है, ऐसा कोई मरीज इंदिरा गांधी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। आपको ऐसी फर्जी स्टोरीज की जरूरत क्यों है? सिर्फ सहानुभूति बटोरने के लिए।pic.twitter.com/NJlCTqLHF5 — Rohan (@rohanreplies) April 28, 2021

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

इसी तरह नेशनल मराठी डेली ने भी मराठी में फैक्ट चेक पब्लिश किया था, जिसका शीर्षक है: “खरोखर RSS च्या वयस्कर स्वयंसेवकाने करोना रुग्णासाठी बेड सोडला का?; जाणून घ्या काय घडलं?” इसका हिंदी अनुवाद है: क्या आरएसएस वर्कर ने सच में अन्य मरीज के लिए बेड छोड़ा, जानें क्या है सच

उन्होंने अपने आर्टिकल में Rohan @rohanreplies की पोस्ट में से ऑडियो क्लिक को भी अटैच किया था और आर्टिकल के अंत में लिखा था: सोशल मीडियावर या प्रकरणी उलटसुलट चर्चा होत असून आत्तापर्यंत हाती आलेल्या माहितीनुसार दाभाडकरांनी करोना रुग्णासाठी बेडचा त्याग केल्याचं दिसून येत नाही. इसका हिंदी अनुवाद है: जहां सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, अब तक मिली जानकारी के अनुसार ऐसा लगता है कि दाभाड़कर ने किसी अन्य मरीज के लिए बेड नहीं छोड़ा है।

हालांकि, इस पूरे आर्टिकल को बदलकर, इस बार हॉस्पिटल अथॉरिटीज और परिजनों से बात कर अगले दिन इसे फिर से छापा गया।

आर्टिकल का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

वॉट्सऐप पर वायरल पोस्ट में भी एबीपी माझा न्यूज चैनल का स्क्रीनशॉट दिखता है, जिसमें दावा किया गया है कि दाभाड़कर जिंदा हैं।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट में किए गए दावे की पड़ताल शुरू करते हुए सबसे पहले इंटरनेट पर इस घटना के बारे में सर्च किया। हमें ऐसी बहुत-सी मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं, जिसमें नागपुर में हाल ही हुई इस घटना और दाभाड़कर की मृत्यु का जिक्र मिला।

हमें इंटरनेट पर वायरल एक न्यूज की क्लिपिंग भी मिली। पड़ताल में हमने पाया कि यह क्लिपिंग लोकमत न्यूज नेटवर्क की है। यह अखबार नागपुर में प्रकाशित होता है।

न्यूज क्लिप को यहां देखा जा सकता है।

इंटरनेट पर कई तरह के दावे इस घटना को लेकर किए जा रहे हैं। ऐसे में सच का पता लगाने के लिए विश्वास न्यूज ने मीडिया रिपोर्ट्स में बताए गए इंदिरा गांधी हॉस्पिटल, गांधी नगर नागपुर में संपर्क किया।

बता दें कि नागपुर में इंदिरा गांधी के नाम पर दो हॉस्पिटल हैं — इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल जिसे मेयो के नाम से भी जाना जाता है। यह नागपुर के सेंट्रल एवेन्यू में स्थित है, जबकि नागपुर के गांधी नगर में भी एक इंदिरा गांधी हॉस्पिटल है।

इंटरनेट पर वायरल डियो क्लिप मेयो के डीन डॉ अजय प्रसाद की है, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में डॉ, अजय हरदास का नाम बताया गया है। अजय हरदास इंदिरा गांधी हॉस्पिटल में कोविड इंचार्ज हैं।

हमने अजय हरदास से संपर्क किया, जिन्होंने यह स्वीकार किया कि नारायण दाभाड़कर उनके हॉस्पिटल में भर्ती थे और उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि दाभाड़कर का ऑक्सीजन लेवल बेहतर होने पर उन्होंने व उनके परिवार ने उन्हें घर ले जाने का निवेदन किया। हालांकि, हरदास परिवार के ऐसे निर्णय के पीछे का कारण नहीं बता सके।

हमने इंदिरा गांधी हॉस्पिटल की सुपरिंटेंडेंट डॉ शीलू चिमुरकर गंतावर से भी संपर्क किया। उन्होंने भी बताया कि दाभाड़कर उनके अस्पताल में कैजुअल्टी वॉर्ड में एडमिट थे और उस दिन वॉर्ड पूरा भरा हुआ था।

हमें दाभाड़कर की बेटी असावरी दाभाड़कर का एक वीडियो भी मिला, जिसमें उन्होंने पूरी घटना का जिक्र किया है। वह साफ तौर पर बताती हैं कि पिता ने परिवार से उन्हें घर ले जाने को कहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पिता इस बात से परेशान थे कि अन्य मरीजों के परिजन बार-बार उनसे आ कर गुहार लगा रहे थे। असावरी ने यह पुष्टि की कि उनके पिता की कोविड कॉम्प्लिकेशंस के चलते घर में मृत्यु हो गई थी।

असावरी का वीडियो यहां देखा जा सकता है।

भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा की स्टेट जनरल सेक्रेटरी शिवानी दानी वाखरे ने अपने फेसबुक पोस्ट में तस्वीर साझा की हैं, जिसमें दाभाड़कर को अस्पताल में भर्ती देखा जा सकता है। इसके साथ ही एक तस्वीर में डिस्चार्ज अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (DAMA) से संबंधित पत्र और बेटी का वीडियो देखा जा सकता है।

शहर के एक सीनियर जर्नलिस्ट ने DAMA से जुड़े पत्र की तस्वीर भी विश्वास न्यूज के साथ साझा की है।

अब हमें यह पता लगाना था कि क्या एबीपी माझा ने सच में ऐसी कोई खबर चलाई थी, जिसमें दावा किया गया हो कि दाभाड़कर सुरक्षित हैं और परिवार के साथ हैं। हमने जब इस बारे में इंटरनेट पर सर्च किया तो हमें एबीपी माझा का एक ट्वीट मिला, जिसमें उन्होंने लिखा कि उनके चैनल के नाम से वायरल हुआ स्क्रीनशॉट फर्जी है और उन्होंने ऐसी कोई न्यूज प्रकाशित नहीं की।

एबीपी माझा का ट्वीट यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल के अंतिम चरण में विश्वास न्यूज ने दाभाड़कर की बेटी असावरी दाभाड़कर कोठीवान से संपर्क किया। नाराज असावरी ने कहा कि उनके पिता अपनी जिंदगी जी कर गए हैं और वे कभी भी अपने पिता के उन्हें अस्पताल से घर लाने के निर्णय को इस तरह भुनाना नहीं चाहती थीं। उन्होंने कहा: हम दुखी हैं कि इस तरह के दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं। अगर कोई दावा करता है कि मेरे पिता जिंदा है तो उन्हें वापस ले आए मैं ज्यादा खुश हो जाउंगी। हम अभी भी शोक में हैं और इस तरह के दावे हमारी पीड़ा को बढ़ाने के काम कर रहे हैं।

अब बारी थी फेसबुक पर पोस्ट को साझा करने वाले यूजर स्वतंत्र विद्रोही की प्रोफाइल को स्कैन करने का। प्रोफाइल को स्कैन करने पर हमने पाया कि यूजर उत्तर प्रदेश के कानपुर का रहने वाला है।

निष्कर्ष: हमारी पड़ताल में यह साफ हुआ कि वायरल पोस्ट में किया गया यह दावा कि नारायण दाभाड़कर हॉस्पिटल में भर्ती नहीं हुए और जिंदा हैं व अपने परिवार के साथ हैं, यह फर्जी है।

  • Claim Review : #NarayanDabhadkar स्टोरी, इंदिरा गांधी हॉस्पिटल नागपुर के सुपरिंटेंडेंट अजय प्रसाद ने कहा कि वायरल हो रही स्टोरी फर्जी है, ऐसा कोई मरीज इंदिरा गांधी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
  • Claimed By : fb User: स्वतंत्र विद्रोही
  • Fact Check : झूठ
झूठ
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