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विश्वास न्यूज सत्यापन कार्य प्रणाली
विश्वास न्यूज कंटेट लिखने में तार्किक प्रवाह का अनुसरण करने में यकीन करता है। हमारी सभी स्टोरीज में एक जैसा पैटर्न फॉलो किया जाता है। स्टोरी प्लान करते समय सबसे पहले क्लेम की पड़ताल की जाती है। इस दौरान इनहाउस एसओपी और आईएफसीएन के सिद्धांतों का खास ख्याल रखा जाता है। इसके बाद मेकर-चेकर सिस्टम को क्रियान्वयन किया जाता है। तथ्यों, भाषा, नैतिकता व आचरण के आधार पर क्वालिटी चेक किया जाता है। इसके बाद स्टोरी का प्रकाशन व प्रसारण किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान यह ध्यान रखा जाता है कि पत्रकारिता की नैतिकता और आईएफसीएन के सिद्धांतों से कहीं समझौता न किया गया हो।
फेक न्यूज की पड़ताल करने या किसी न्यूज का सत्यापन करने के लिए विश्वास न्यूज की सर्टिफाइड व ट्रेंड फैक्ट चेकर्स की टीम इन-हाउस एडिटोरियल व एथिकल गाइडलाइंस और एसओपी का पूरी तरह पालन करती है। इसमें यह सब शामिल हैः

1. वेरिफिकेशन के लिए न्यूज का चयन
हम गलत जानकारी को पकड़ने के लिए लगातार सोशल मीडिया व अन्य मीडिया स्रोतों को मॉनिटर करते रहते हैं। हमारा मकसद पब्लिक इंटरेस्ट को प्रभावित करने वाले झूठे दावों का फैक्ट चेक करना होता है। लिहाजा हम ऐसे दावों की पड़ताल करते हैं, जिनका असर बड़ी संख्या में लोगों पर हो सकता है। विश्वास न्यूज ऐसे मुददों पर काम करता है, जिसका असर आम जनता के जीवन पर पड़ता हो। हमारे प्लेटफॉर्म पर राजनीति, खेल, स्वास्थ्य, सैनिटेशन, कानून और न्याय, शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार, नवाचार, विज्ञान और सामाजिक व जातीय रूप से वंचित समूह, इन सबसे संबंधित स्टोरीज मौजूद हैं।
इसके अलावा हम इन मुददों पर भी स्टोरीज करते हैं – 1. मेडिकल मिसइन्फॉर्मेशन और घरेलू नुस्खे 2. भड़काउ कंटेट, जिससे सामाजिक अराजकता पैदा हो सकती है 3. क्लिक्स पाने के लिए बनाया गया गलत, लेकिन जिज्ञासु कंटेट क्लिकबेट।
हम उस न्यूज स्टोरी का चयन करते हैं, जिसे हम वेरिफाई करना चाहते हैं। विश्वास न्यूज के सीनियर टीम मेंबर्स हर सुबह टीम मीटिंग लेते हैं, जिनमें उन सारे क्लेम्स पर चर्चा होती है, जिन्हें फैक्ट चेकर्स वेरिफाई करने के लिए चुनते हैं। क्लेम के चयन के लिए इन मापदंडों पर विचार किया जाता है:
• वायरल क्लेम का नेचर
• क्लेम कितना वायरल है, मसलन इसे कितने लागों ने लाइक व शेयर किया है।
• वायरल पोस्ट का सोर्स क्या है।

– स्टोरीज अलग अलग प्लेटफॉर्म्स से चुनी जाती हैं। इसमें ये सब शामिल हैं:
• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स
• विश्वास न्यूज वॉट्सऐप टिपलाइन (+91 9599299372)
• विश्वास न्यूज वॉट्सऐप नंबर (+91 9205270923)
• विश्वास न्यूज के ईमेल (contact@vishvasnews.com ) पर यूजर्स की भेजी गईं स्टोरीज
• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डायरेक्ट मैसेज के जरिए यूजर्स की भेजी गई स्टोरीज
• क्षेत्रवार बनाए गए वॉट्सऐप ग्रुप्स पर यूजर्स की ओर से भेजी गई स्टोरीज। यह ग्रुप्स 17 जगहों (लखनऊ, दिल्ली, मेरठ, काशी, जयपुर, मध्य प्रदेश, बिहार, प्रयागराज, भागलपुर, चंडीगढ़, भोपाल, मुजफ्फरपुर, पटना, कानपुर, दरभंगा, नोएडा और रांची) पर हुई सच के साथी फैक्ट चेक लिटरेसी ड्राइव के दौरान बनाए गए थे।

2. दावे की पड़ताल
वायरल दावे के तथ्यों की पड़ताल करने के लिए विश्वास न्यूज एक या एक से ज्यादा विधियों का इस्तेमाल करता है। यह इस प्रकार हैं:
हम किसी भी दावे की पड़ताल करने के लिए तकनीक और पत्रकारिता के गुरों का इस्तेमाल करते हैं। हम फेक न्यूज बस्ट करने के लिए 20 से ज्यादा वेरिफिकेशन टूल्स का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें गूगल रिवर्स इमेज सर्च, यांडेक्स, इनविड, फॉलर.मी, हूइज आदि शामिल हैं। इन टूल्स की मदद से हम यह पता करते हैं कि असल में वायरल तस्वीर या वीडियो का ओरिजन क्या है और इससे पहले यह कब और किस संदर्भ में इस्तेमाल हुआ था।

गूगल रिवर्स इमेज सर्च या यांडेक्स सर्च को इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले हम वायरल तस्वीर या वीडियो में से जरूरी हिस्सा स्नाइप करते हैं और फिर इसे सर्च करते हैं। इससे हम यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि क्या वायरल तस्वीर या वीडियो इससे पहले भी कहीं इस्तेमाल हुआ है। किसी भी स्टोरी में वायरल तस्वीर या वीडियो के ओरिजन के बारे में निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विश्वास न्यूज की टीम कई सारे टूल्स का इस्तेमाल करती है।
विश्वास न्यूज में फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य है। हम प्राइमरी सोर्स या सेकंडरी सोर्स या फिर कोई अन्य विश्वसनीय व्यक्ति, जिसमें जागरण नेटवर्क के बीट स्पेशलिस्ट या ब्यूरो रिपोर्टर्स शामिल हैं, से संपर्क करते हैं और मामले की तह तक पहुंचते हैं।
अंत में, हम अपने आर्टिकल में पड़ताल का पूरा तरीका और सारे सबूत सामने रखते हैं, ताकि हमारा रीडर हमारी फैक्ट चैकिंग की विधि को समझ सके और चाहे तो खुद से भी फैक्ट चेक कर सके। हम अपने पाठकों को अपने आप निष्कर्ष तक पहुंचने देते हैं। हम अपने किसी भी फैक्ट चेक पर कोई भी नीति स्थान नहीं लेते।
मोटे तौर पर इन मापदंडों का पालन करते हुए तथ्य की जांच की जाती हैः
• हेडलाइन में दावा व तथ्य समझाया जाता है।
• इंट्रो में दावा और निष्कर्ष बताया जाता है।
• दावे की पड़ताल ऑनलाइन टूल्स जैसे: गूगल रिवर्स इमेज सर्च, फॉलर.मी, इनविड, स्टॉकस्कैन, एग्जिफडेटा, मैपिया, वेयबैकमशीन आदि का इस्तेमाल कर की जाती है।
• पत्रकारिता के तजुर्बे का इस्तेमाल अथॉरिटीज से संपर्क करने, आर्काइव्स निकालने, ऐतिहासिक संदर्भ देने आदि में किया जाता है। इस प्रणाली को हम फिजिकल वेरिफिकेशन कहते हैं।
• फैक्ट चैक के पूरे प्रॉसेस को स्क्रीनशॉट्स व बैकलिंक्स की मदद से समझाया जाता है।
• स्टोरी में सरल व स्पष्ट भाषा का प्रयोग किया जाता है।
• स्टोरी के अंत में आंकड़े व विश्लेषण दिया जाता है।

3. इन शैलियों को कवर किया जाता है
विश्वास न्यूज पब्लिक डोमेन पर उपलब्ध राजनीति, खेल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानून और न्याय, शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार, नवाचार, विज्ञान और सामाजिक और जातीय रूप से वंचित समूह के मुद्दों को कवर करता है।

4. मेकर-चेकर सिस्टम (अतिरिक्त क्वालिटी चेक के लिए)
स्टोरी ड्राफ्ट करते समय विश्वास न्यूज की टीम मेकर-चेकर सिस्टम का पालन करते हैं। मेकर-चेकर सिस्टम के तहत नीचे दिया गया प्रॉसेस फॉलो किया जाता है। जिस दिन से इस सिस्टम को एसओपी में शामिल किया गया है, उस दिन से विश्वास न्यूज पर पब्लिश होने वाले हर आर्टिकल में इसका पालन किया जाता है। इस प्रॉसेस के पीछे आइडिया यह है कि फैक्ट चेकर जिस क्लेम पर काम कर रहा है वह उस कॉपी को खुद पब्लिश नहीं कर सकता। टीम में से ही कोई दूसरा चेकर उसकी कॉपी को चेक करेगा और एसओपी का पालन करते हुए उसकी कॉपी पब्लिश करेगा।
मेकर-चेकर सिस्टम को ऐसे समझा जा सकता है:
A. दावे की पड़ताल कर पहला फैक्ट चेकर कॉपी ड्राफ्ट करता है – उसे मेकर कहा जाता है।
B. आर्टिकल तैयार होने के बाद मेकर इसे टीम में मौजूद दूसरे फैक्ट चेकर को री-चेकिंग के लिए भेज देता है – इस दूसरे फैक्ट चेकर को चेकर कहा जाता है। चेकर की जिम्मेदारी है कि कॉपी को जांचे कि यह एडिटोरियल एसओपी और आईएफसीएन के कोड ऑफ प्रिंसिपल्स पर खरी उतरती है या नहीं।
C. अगर चेकर कॉपी या किसी इनपुट से संतुष्ट नहीं होता, तो वह मेकर को अपने सुझावों के साथ कॉपी वापस भेजता है, ताकि उसमें सुधार किया जा सके।
D. मेकर कॉपी पर सुझावों के अनुसार बदलाव करता है और फिर से कॉपी चेकर को भेजता है।
E. जब चेकर को लगता है कि अब कॉपी पब्लिश करने योग्य बन गई है तो मेकर इस कॉपी को क्वालिटी चेक मैनेजर को भाषा, व्याकरण व सिंटेक्स एरर जांचने के लिए भेजता है।
F. इसके बाद फाइनल कॉपी टीम के वरिष्ठ सदस्य के पास जाती है।
G. फाइनल अप्रूवल के बाद चेकर इस कॉपी को वेबसाइट पर पब्लिश करता है।
H. वेबसाइट पर पब्लिश हुए इस आर्टिकल के नीचे मेकर और चेकर दोनों का नाम दिखाई देता है।

5. फैक्ट चेक पब्लिश करना
विश्वास न्यूज अपनी पड़ताल को स्टोरी के रूप में पब्लिक डोमेन में अपनी वेबसाइट पर पब्लिश करता है। इसमें स्क्रीनशॉट्स और लिंक्स के रूप में सबूत भी शामिल किए जाते हैं, ताकि पाठक खुद भी दावे को डीबंक कर सके। इसके अलावा मिलती-जुलती फैक्ट चेक स्टोरीज को मेन आर्टिकल के साथ इंटरलिंक भी किया जाता है।

6. रेटिंग
हमारे पास तीन रेटिंग विकल्प हैं, जिनमें हम फैक्ट चेक्स को श्रेणीबद्ध करते हैं।
• फॉल्सः इसमें स्टोरी का प्राइमरी क्लेम तथ्यात्मक रूप से गलत होता है। यह आमतौर पर “फॉल्स” या “मोस्टली फॉल्स” रेटिंग से मेल खाता है।
• मिसलीडिंगः इसमें क्लेम गलत और सही तथ्यों का मिक्सचर होता है या फिर प्राइमरी क्लेम भ्रामक या अधूरा होता है।
• ट्रूः इसमें प्राइमरी क्लेम तथ्यात्मक रूप से सही होता है। यह आमतौर पर “ट्रू” या “मोस्टली ट्रू” रेटिंग से मेल खाता है।

7. प्रमोशंस
वेबसाइट पर स्टोरी पब्लिश होने के बाद फैक्ट चेकर इसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रमोट भी करता है।

8. फीडबैक
हम हमारे पाठकों से कमेंट्स, ईमेल्स और फोन कॉल के जरिए मिलने वाले सुझावों व सुधार का स्वागत करते हैं। यह फीडबैक किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप) के डायरेक्ट मैसेज सुविधा के जरिए, विश्वास न्यूज वॉट्सऐप टिपलाइन (+91 9599299372) के जरिए, विश्वास न्यूज वॉट्सऐप नंबर (+91 9205270923) के जरिए, या फिर विश्वास न्यूज ईमेल (contact@vishvasnews.com) के जरिए मिल सकते हैं। अगर हमें हमारे कंटेट की एक्यूरेसी को लेकर कोई शिकायत मिलती है तो हम तुरंत उसे होल्ड पर रख कर पहले तथ्यों की दोबारा जांच करते हैं। तथ्यों की जांच करने के बाद हम निर्णय लेते हैं और उसके अनुसार ही फीडबैक पर जवाब देते हैं। अगर हमारी खबर में गलती होती है तो हम उससे संबंधित जानकारी को कॉपी में से हटाते या एडिट करते हैं। वहीं, अगर हमारी खबर में त्रुटि नहीं होती तो भी हम अपने पाठक को अपने निर्णय के आधार के बारे में जानकारी देते हैं।

9. करेक्शन पॉलिसी
हमारी करेक्शन पॉलिसी के अनुसार, हमने मिसइन्फॉर्मेशन के खिलाफ अपनी इस लड़ाई को मजबूती दी है और ऐसी टीम बनाई है, जो नियमित तौर पर वेबसाइट के कंटेंट को मॉनिटर करती है और फैक्ट चेकिंग करती है। अगर हमारी फैक्ट चेक की हुई स्टोरी पर कोई अपील मिलती है तो हम इस पर गौर करते हैं और जरूरत पड़ने पर अपनी एसओपी और आईएफसीएन की गाइडलाइंस का पालन करते हुए संशोधन करते हैं। संशोधित आर्टिकल्स के नीचे डिसक्लेमर जोड़ा जाता है। यह करेक्शन रिकॉर्ड संबंधित फैक्ट चेकर के बायोग्राफी में भी शामिल किया जाता है।

अगर यूजर को लगता है कि हम आईएफसीएन कोड का उल्लंघन कर रहे हैं तो वे आईएफसीएन को इस बारे में सूचित कर सकते हैं। आईएफसीएन की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज करने का लिंक यहां हैः https://ifcncodeofprinciples.poynter.org/complaints-policy

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