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‘विश्वास’ न्यूज वेरिफिकेशन जांच प्रक्रिया

‘VISHVAS’ अपने कंटेंट निर्माण में तार्किकता को अपनाए जाने में विश्वास रखता है। हमारी सभी खबरों में एक ही पैटर्न को फॉलो किया जाता है। इसके तहत प्लानिंग के साथ आइडिया को डेवलप, पब्लिश और डिस्ट्रिब्यूट किया जाता है। तथ्यों, भाषा, एथिक्स और कंडक्ट के आधार पर इसकी क्वालिटी चेक की जाती है। पूरी प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाता है कि पत्रकारिकता की नैतिकता से किसी भी स्तर पर कोई समझौता न हो।

फेक न्यूज के खुलासे या किसी खबर की पुष्टि के लिए ‘VISHVAS’ टीम खास गाइडलाइंस फॉलो करती है। ये इस तरह हैं:

1.पुष्टि के लिए खबर का चुनाव

हम नियमित तौर पर सोशल मीडिया और दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म की मॉनिटरिंग करके ये देखते रहते हैं कि कहीं गलत सूचना तो नहीं फैलाई जा रही। हमारा मुख्य उद्देश्य उन झूठे दावों की पोल खोलना है जो आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं। यही वजह है कि हम ऐसी गलत सूचना/भ्रामक दावों को उठाते हैं जो लोगों के बड़े समूह पर असर डालने वाले होते हैं।

नेताओं और पदों पर बैठे अधिकारियों के बयान और ट्वीट और सोशल मीडिया पर राजनीतिक दलों के दावे हमारे सोर्स होते हैं। इसके अलावा हमारी नजर पब्लिक ओपिनियन को प्रभावित करने के लिए बनाए गए भड़काऊ हैशटैग पर भी होती है।

इन सबके साथ हम,

1- गलत स्वास्थ्य सूचनाएं और अजीबोगरीब घरेलू उपचार,

2- सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से तैयार किए गए भड़काऊ कंटेंट,

3- क्लिक हासिल (क्लिकबेट) करने के लिए बनाए गए फर्जी कंटेंट से जुड़े पोस्ट भी उठाते हैं।

हम उन खबरों का चयन करते हैं जिनकी हमें पुष्टि करनी होती है। खबरों के चयन के लिए निम्नलिखित मापदंडों का पालन किया जाता है:

  • वायरल दावे की प्रकृति
  • वायरल दावे की पहुंच (कितने लोगों ने इसे लाइक, शेयर किया।
  • वायरल पोस्ट का सोर्स

2.हमारी पड़ताल

हम व्यवस्थित रूप से पड़ताल कर तथ्यों की पुष्टि करते हैं। किसी फर्जी दावे के खुलासे के लिए ‘VISHVAS’ निम्नलिखित में एक या कई मेथड अपनाता है:

हम किसी दावे की पुष्टि के लिए पत्रकारिता के पुराने सिद्धांतों (ओल्ड स्कूल ऑफ जर्नलिज्म) और तकनीक के मेलजोल का इस्तेमाल करते हैं। हम फर्जी खबरों के खुलासे के लिए 20 से अधिक टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। इनमें,  Google Reverse Image search, Yendex, InVid, Foller.me, Whois समेत अन्य टूल्स शामिल हैं। ये टूल्स वायरल तस्वीरों या वीडियो की असल उत्पत्ति का निर्धारण करने में हमारी मदद करते हैं। साथ ही, इनसे हमें यह भी पता चलता है कि उस तस्वीर या वीडियो को पहले किसी ऐसे या अलग संदर्भ में इस्तेमाल किया गया था या नहीं।

Google Reverse Image search या Yendex search के इस्तेमाल के लिए हम तस्वीर या वीडियो के किसी खास हिस्से को काटते (स्नाइप) हैं। फिर इस हिस्से का इस्तेमाल कर इसे सर्च करते हैं। तस्वीर के इस हिस्से की मदद से हम यह पता लगाते हैं कि क्या इसी तस्वीर का इस्तेमाल पहले भी दूसरी जगह पर हुआ है या नहीं। अधिक सटीक जानकारी और तस्वीर/टेक्स्ट/वीडियो की उत्पत्ति के निर्धारण के लिए ‘VISHVAS’ टीम कई टूल्स जैसे Whois, Stalkscan, Foller.me, time, date की मदद लेती है।

फिजिकल वेरिफिकेशन Vishvas टीम की अनिवार्य मानक संचालक प्रक्रिया (SOP) में शामिल है। हम उस व्यक्ति से संपर्क करने की कोशिश करते हैं जो वायरल दावे में फर्स्ट पार्टी के रूप में मौजूद है। यह किसी तस्वीर, वीडियो या टेक्स्ट पोस्ट में मौजूद मुख्य शख्स हो सकता है। इसके अलावा उस शख्स की तरफ से पुष्टि करने वाले कोई दूसरा भी हो सकता है। हम दावे की पुष्टि के लिए संबंधित क्षेत्र के एक्सपर्ट से भी संपर्क करते हैं।

अंत में हम अपनी खबरों में सारे सबूत प्रस्तुत करते हैं, ताकि हमारे पाठक खुद से भी इस तरह फैक्ट चेक कर सकें। हम पाठकों को उनके अपने निष्कर्ष तक पहुंचने की सहूलियत देते हैं। हम खुद से किए गए किसी फैक्ट चेक पर कोई नीतिगत पोजिशन नहीं लेते हैं।

3.हमारा दायरा

पब्लिक डोमेन में मौजूद चीजों को ‘VISHVAS’ के दायरे में रखा गया है। इनमें राजनीति, खेल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानून और न्याय, शिक्षा, पर्यावरण, रोजगार, इनोवेशन, विज्ञान के साथ सामाजिक व संजातीय रूप से वंचित समूह शामिल हैं।

4.फैक्ट चेक को पब्लिश करना

‘VISHVAS’ टीम अपनी पड़ताल के बाद मिली जानकारियों को स्टोरी के रूप में पब्लिक डोमेन में पब्लिश करती है। इस स्टोरी को अपनी साइट पर लगाया जाता है जिसमें स्क्रीनशॉट्स, लिंक्स के प्रूफ होते हैं, ताकि पाठक खुद से भी फेक खबरों की पहचान और खुलासे कर सकें। सूचनाओं का कोई समय या दायरा नहीं होता इसलिए हम खबरों को नियमित तौर पर अपडेट करते हैं। हम सूचनाओं पर नजर रखते हैं और कोई भी नई जानकारी सामने आने पर उसे पहले से मौजूद आर्टिकल में जोड़ते हैं।

5.रेटिंग

हमारे पास फैक्ट चेक की गई स्टोरी को रेटिंग देने के 3 ऑप्शन हैं। इन्हें हम ग्राफिक इमोटिकॉन्स की मदद से दिखाते हैं।

  1. फॉल्स (False): कंटेंट का प्राथमिक दावा (दावे) तथ्यात्मक रूप से सही नहीं। इसे ‘फॉल्स’ या ‘मोस्ट्ली फॉल्स’ रेटिंग मिलती है।
  2. मिसलीडिंग (Misleading): दावा (दावे) में सही और गलत, दोनों ही तरह की सूचनाएं शामिल हैं या प्राथमिक दावा भ्रामक या अधूरा है।
  3. ट्रू (True): प्राथमिक दावा (दावे) तथ्यात्मक रूप से सही है। इसे ‘ट्रू’ या ‘मोस्ट्ली ट्रू’ रेटिंग मिलती है।

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