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Fact Check: 2022 में कर्नाटक में दलित परिवार के बौद्ध धर्म अपनाए जाने की पुरानी घटना को हाल का बताकर किया जा रहा शेयर

2022 में कर्नाटक में एक दलित परिवार के बौद्ध धर्म को अपनाए जाने के बाद हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नदी में विसर्जित किए जाने की पुरानी घटना को हाल का बताकर भ्रामक संदर्भ में शेयर किया जा रहा है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स एक वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि कर्नाटक में एक दलित परिवार ने बौद्ध धर्म को अपनाते हुए हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नदी में विसर्जित कर दिया। वीडियो को शेयर किए जाने के समय से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह हाल की घटना है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को भ्रामक पाया। संबंधित घटना कर्नाटक की है, लेकिन 2022 की है, जिसे हालिया बताकर शेयर किया जा रहा है।

क्या है वायरल?

सोशल मीडिया यूजर ‘Vijay Kumar’ ने वायरल वीडियो (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, “कर्नाटक: बौद्ध धम्म को अपनाने के बाद दलित परिवार ने हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्ति को नदी में विसर्जित किया! -यदिगिरी में दलित बच्चे द्वारा गांव की कुल देवी की मूर्ति को छूने पर सवर्णो ने 60 हजार का जुर्माना लगाया था, दलित परिवार ने घटना के बाद हिन्दू धर्म त्याग दिया।”

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो को समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें द प्रिंट की वेबसाइट पर 14 अक्टूबर 2022 की रिपोर्ट मिली, जिसमें इस घटना का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, “कर्नाटक के यादगीर जिले के शोरापुर तालुक में शुक्रवार को सामूहिक धर्मांतरण कार्यक्रम हुआ, जहां सौ से अधिक दलित पुरुषों और महिलाओं ने बौद्ध धर्म की दीक्षा लेते हुए बौद्ध धर्म अपना लिया। 66 वर्ष पूर्व इसी दिन बी.आर. अंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपनाया था।”

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, “वेंटेशन होसमनी और अन्य ने कर्नाटक के यादगीर जिले में हिंदू देवताओं की मूर्तियों को नदी में विसर्जित कर दिया।”

हमें एक यू-ट्यूब चैनल पर इस घटना का वीडियो मिला, जिसे 12 अक्तूबर 2022 को समान संदर्भ में अपलोड किया गया है।

वायरल वीडियो ‘द मूकनायक’ का है। सर्च में हमें यह वीडियो ‘द मूकनायक’ के वेरिफाइड फेसबुक पेज पर लगा मिला, जिसे 11 अक्टूबर 2022 को शेयर किया गया है।

द हिंदू की 30 मई 2022 की रिपोर्ट में संबंधित घटना का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, “पुलिस सुरक्षा के साथ, यादगीर के शोरापुर तालुक के हुविनाहल्ली के एक दलित परिवार के आठ सदस्यों ने जिले के हुंसगी तालुक के अमलीहाल गांव में अंजनेया (हनुमान) मंदिर में प्रवेश किया और अपने बच्चे का मुंडन संस्कार किया। दलितों के मंदिर में प्रवेश का अमलीहाल के ‘सवर्णों’ ने कड़ा विरोध किया। इसके बाद, दलित समुदाय के लोगों ने केम्भवी पुलिस को एक याचिका दी और मंदिर में प्रवेश करने और परिवार के कार्यक्रम के दौरान उन्हें सुरक्षा देने की मांग की।”

हमारी जांच से स्पष्ट है कि वायरल हो रहा वीडियो 2022 की घटना का है। वायरल वीडियो को लेकर हमने बेंगलुरु के स्थानीय पत्रकार गिरधर नारायण से संपर्क किया और उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि यह पुरानी घटना (2022)  से संबंधित है।

वायरल वीडियो को भ्रामक संदर्भ में शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर करीब सात हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: 2022 में कर्नाटक में एक दलित परिवार के बौद्ध धर्म को अपनाए जाने के बाद हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नदी में विसर्जित किए जाने की पुरानी घटना को हाल का बताकर भ्रामक संदर्भ में शेयर किया जा रहा है।

  • Claim Review : कर्नाटक में दलित परिवार ने बौद्ध धर्म अपनाए जाने के बाद हिंदू देवी देवताओं की मूर्ति को विसर्जित कर दिया।
  • Claimed By : FB User-Vijay Kumar
  • Fact Check : भ्रामक

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