Fact Check: तबादले के बाद डीएम के बिना तामझाम के अगले जिले का प्रभार लेने जाने की घटना 2022 की है
बिहार के नालंदा जिले के तत्कालीन डीएम या जिलाधिकारी रहे योगेंद्र सिंह के तबादले के बाद बिना किसी तामझाम अगले जिले का प्रभार लेने के लिए जाने की घटना 2022 की है, जिसे हाल का बताकर भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
- By: Abhishek Parashar
- Published: Apr 9, 2025 at 03:27 PM
- Updated: Apr 9, 2025 at 04:09 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया यूजर्स हिंदी अखबार में छपी खबर के स्क्रीनशॉट को शेयर कर रहे हैं, जिसमें दावा किया गया है कि बिहार के नालंदा जिले के जिलाधिकारी रहे योगेंद्र सिंह का जब तबादला हुआ तो वे बिना किसी तामझाम के जिले से चले गए और उन्होंने उनके सम्मान में रखी फेयरवेल पार्टी को भी शालीनता से मना कर दिया। पोस्ट को शेयर किए जाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह हाल की घटना है।
विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इसे भ्रामक पाया। संबंधित घटना बिहार के नालंदा जिले की है, लेकिन यह 2022 की है, जिसे हालिया संदर्भ में भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
क्या है वायरल?
सोशल मीडिया यूजर ‘आपका अपना उन्नाव’ ने छह अप्रैल को वायरल पोस्ट (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, “”जब अफसर अफसर नहीं, मसीहा बन जाए…”
तबादले के बाद न कोई विदाई, न कोई तामझाम।
न माला, न गुलदस्ता।
बस एक ट्रॉली बैग उठाया, लाइन में लगकर टिकट लिया, और ट्रेन से निकल पड़े।
ये कहानी है बिहार के नालंदा के पूर्व डीएम योगेन्द्र सिंह की,
जो उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के छोटे से गाँव हरिहरपुर के रहने वाले हैं।
जहाँ आज अफसरशाही का मतलब है रौब, रुतबा और सत्ता,
वहीं ये अफसर बिना शोर-शराबे के, बिना किसी प्रचार के
बस चुपचाप अपनी जिम्मेदारी पूरी कर अगली मंज़िल की ओर रवाना हो गया।
ना VIP रवैया, ना सरकारी ड्रामा…
बस सादगी, शालीनता और जनता जैसी सरलता।
उन्नाव—एक ऐसा जिला जहाँ झूठ, दिखावा और घमंड अब “नॉर्मल” हो चुका है,
वहीं से निकले इस अफसर ने दिखा दिया कि असली शक्ति चुपचाप काम करने में होती है।
आज ये अफसर एक उदाहरण है उन युवाओं के लिए
जो सिविल सर्विस में जाकर बदलाव लाना चाहते हैं।
कोई अवॉर्ड नहीं मिला इन्हें,
लेकिन जनता के दिलों में जो जगह मिली है,
वो किसी सम्मान से कम नहीं।
ऐसे अफसर अगर हर जिले में हो जाएं,
तो अफसरशाही नहीं, जनसेवा का युग शुरू हो जाएगा।
सलाम है योगेन्द्र सिंह को…
आप जैसे अफसर इस देश की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।”

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इसे समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है।
पड़ताल
वायरल पोस्ट में नजर आ रही खबर दैनिक जागरण की है। इसी आधार पर की-वर्ड सर्च में हमें कई पुरानी रिपोर्ट्स मिली, जिसमें इस घटना का जिक्र है।
2 जनवरी 2022 की जागरण.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, “नालंदा के 37वें डीएम रहे योगेंद्र सिंह की सादगी उनके स्थानांतरण के बाद दिखी। इसके चर्चे इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया। बिना तामझाम के योगेंद्र सिंह जिले को अलविदा कह गए। डीएम ने फेयरवेल पार्टी को भी शालीनता से मना कर दिया। हाथ में ट्राली बैग व बाडीगार्ड को नए डीएम के साथ रहने की नसीहत देकर स्टेशन रवाना हो गए। आम पब्लिक की तरह लाइन में लगकर ट्रेन का टिकट लिया। श्रमजीवी में बैठकर पटना के लिए रवाना हो गए। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के रहने वाले योगेंद्र सिंह नालंदा में 35 महीनों तक जिलाधिकारी रहे। योगेंद्र की पहचान तेजतर्रार अफसरों में की जाती रही। अपने कार्यकाल के दौरान उनके कई फैसले चर्चा में रहे।”
कई अन्य रिपोर्ट्स में भी इस घटना का समान संदर्भ में जिक्र है।
हमारी जांच से स्पष्ट है कि संबंधित घटना आज की नहीं, बल्कि 2022 की है। वायरल पोस्ट को लेकर हमने बिहारशरीफ के दैनिक जागरण के जिला प्रभारी रजनीकांत से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया, “यह करीब तीन साल पुरानी घटना है।”
वायरल पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर करीब 35 हजार लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: बिहार के नालंदा जिले के तत्कालीन डीएम या जिलाधिकारी रहे योगेंद्र सिंह के तबादले के बाद बिना किसी तामझाम अगले जिले का प्रभार लेने के लिए जाने की घटना 2022 की है, जिसे हाल का बताकर भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।
- Claim Review : तबादले के बाद बैग उठाया और ट्रेन से निकल पड़े डीएम।
- Claimed By : FB User-आपका अपना उन्नाव
- Fact Check : भ्रामक
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