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Fact Check: वायरल तस्वीर में सुभाष चंद्र बोस के साथ गजानन महाराज नहीं, शंकराचार्य हैं

सुभाष चंद्र बोस को गजानन महाराज के साथ क्लिक नहीं किया गया था, वायरल फोटो में पुरी के कर्नल निजामुद्दीन और शंकराचार्य हैं।

  • By Vishvas News
  • Updated: September 21, 2021

विश्वास न्यूज (नई दिल्ली): सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी वायरल है जिसमें दावा किया जा रहा है कि स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के साथ बैठे शख्स अकोला के संत गजानन महाराज हैं। विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि तस्वीर में सुभाष चंद्र बोस के साथ दिख रहे शख्स गजानन महाराज नहीं बल्कि पुरी के शंकराचार्य थे।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक यूजर दिनेश रंभिया ने 16 सितंबर को ‘आठवनितली मराठी गानी’ ग्रुप में सुभाष चंद्र बोस की एक तस्वीर पोस्ट की और दावा किया कि यह श्री संत गजानन महाराज और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक दुर्लभ तस्वीर है। यह भी दावा किया जा रहा है कि चूंकि गजानन महाराज अकोला आते थे, इसलिए इसे रामदासपेठ, अकोला के एक भक्त ने अपने स्टूडियो में क्लिक किया था। तस्वीर का नेगेटिव अभी भी संरक्षित है।

पोस्ट और उसके आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल:

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल की शुरुआत गूगल रिवर्स इमेज सर्च से की। हमें इस तस्वीर के लिए कई परिणाम मिले।

हमें यह तस्वीर 5 अप्रैल, 2016 को #IndianHistory @RareHistorical पर पोस्ट किए गए ट्ववीट में मिली। पोस्ट के साथ लिखा था ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुरी-उड़ीसा के शंकराचार्य के साथ‘।

हमें यह तस्वीर कांग्रेस के वेरिफाइड ट्विटर हैंडल पर भी शेयर की गई मिली।

बेटरफोटोग्राफी डॉट इन पर भी यह तस्वीर मिली। वेबसाइट के मुताबिक फोटो को मनोरंजन घोष ने क्लिक किया था।

हमने यह भी चेक किया कि तस्वीर में दिख रहा दूसरा व्यक्ति कौन था। गूगल रिवर्स इमेज सर्च के जरिए विश्वास न्यूज को पता चला कि तस्वीर में दिख रहा दूसरा शख्स था ‘कर्नल’ निजामुद्दीन, एक ड्राइवर, जिसने नेताजी बोस को बचाने के लिए 3 गोलियां खायी थीं।

अब यह स्पष्ट हो गया था कि तस्वीर में सुभाष चंद्र बोस के साथ अन्य दो लोग पुरी के शंकराचार्य और कर्नल निजामुद्दीन हैं।

जांच के अगले चरण में विश्वास न्यूज ने अंबरीश पुंडलिक से संपर्क किया, जिन्होंने सुभाष चंद्र बोस पर अपनी पढ़ाई की है। उन्होंने कहा, “गजानन महाराज ने 1910 में समाधि ली थी जबकि सुभाष चंद्र बोस का जन्म 1897 में हुआ था। यानि 1910 में उनकी उम्र 13 साल रही होगी। साफ़ है कि तस्वीर में सुभाष चंद्र बोस के साथ गजानन महाराज नहीं हो सकते। तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति पुरी के शंकराचार्य हैं।”

विश्वास न्यूज ने इसके बाद तस्वीर शेयर करने वाले यूजर का सोशल बैकग्राउंड चेक किया। दिनेश रंभिया मुंबई के रहने वाले हैं और ‘आठवणीतली मराठी गाणी’ समूह के 3.3 लाख से अधिक सदस्य हैं।

निष्कर्ष: सुभाष चंद्र बोस को गजानन महाराज के साथ क्लिक नहीं किया गया था, वायरल फोटो में पुरी के कर्नल निजामुद्दीन और शंकराचार्य हैं।

  • Claim Review : सुभाष चंद्र बोस इनके साथ चित्र में गजानन महाराज
  • Claimed By : Dinesh Rambhia
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