नई दिल्ली (विश्वास टीम)। पत्रकार और फिल्म निर्माता प्रीतिश नंदी ने स्टैचू ऑफ़ यूनिटी की एक तस्वीर शेयर की और कैप्शन में लिखा “The statue of Sardar Patel is so tall that you can hardly see his face. If you did you will notice there is no resemblance to the real man.” इसका हिंदी अनुवाद होता है कि “सरदार पटेल की मूर्ति इतनी लंबी है कि आप शायद ही कभी उसका चेहरा देख सकें। यदि आप देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि इस मूर्ति की असली सरदार पटेल के साथ कोई समानता नहीं है।”

शेयर किया गया फोटो किसी मैगज़ीन का लगता है, जिसमें दावा किया गया है,”सरदार पटेल की मूर्ति ‘चीनी शैली’ में बनाई गई है, क्योंकि चीन के लोगों ने इस परियोजना पर काम किया था।” प्रीतिश नंदी द्वारा साझा की गई छवि फर्जी है।

पड़ताल

ऑनलाइन टूल गूगल रिवर्स इमेज का उपयोग करके हमने इस फोटो को सर्च किया और पाया कि इस फोटो को पहले भी कई बार सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है। पिछले कई सालों से इस तस्वीर का व्यापक रूप से विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में उपयोग किया गया है। विश्वास टीम ने जांच के दौरान पाया कि तस्वीर असल में 2008 की है। गेट्टी इमेजेज पर दिए गए विवरण के अनुसार, ‘सरदार वल्लभभाई पटेल की कांस्य प्रतिमा प्रसिद्ध मूर्तिकार जशूबेन शिल्पी द्वारा गांधीनगर के पास अपनी कार्यशाला में बनाया जा रहा है।’ शिल्पी की 2013 में मृत्यु हो गई।

image courtesy: Gettyimages

स्टैचू ऑफ़ यूनिटी की असली फोटो में देखा जा सकता है कि मूर्ति कहीं से भी चीनी नहीं लगती।

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Claim Review : प्रीतिश नंदी ने स्टैचू ऑफ़ यूनिटी की गलत तस्वीर शेयर की थी
Claimed By : Pritish Nandy
Fact Check : False

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