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Fact Check : शख्स को डंडों से पीटती पुलिस का वीडियो बंगाल हिंसा से संबंधित नहीं, वायरल दावा भ्रामक

व्यक्ति को डंडों से पीटती पुलिस के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। वीडियो का हालिया बंगाल हिंसा से कोई संबंध नहीं है। वीडियो साल 2014 से इंटरनेट पर मौजूद है और अलग-अलग दावों से वायरल है।

  • By: Pragya Shukla
  • Published: Apr 22, 2025 at 05:23 PM
  • Updated: Apr 22, 2025 at 05:36 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। वक्फ (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में कई लोगों की जान चली गई। पिता-पुत्र की हत्या समेत तीन लोगों की मृत्यु हुई और सैकड़ों की संख्या में लोगों को पलायन करना पड़ा। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक शख्स को पीटती पुलिस का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को हाल ही में बंगाल में हुई घटना का बताते हुए दावा किया जा रहा है कि वहां पर इस तरह से हिंदुओं पर पुलिस अत्याचार कर रही है। एक मुस्लिम पुलिसकर्मी बेरहमी से हिंदू युवक को हनुमान जयंती पर प्रभात फेरी का आयोजन करने पर पीट रहा है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा भ्रामक है। वीडियो साल 2014 से इंटरनेट पर मौजूद है और अलग-अलग दावों से वायरल है। हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह बंगाल में हुई हालिया हिंसा का नहीं है। लेकिन हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं कि वीडियो कहां का है।

क्या हो रहा है वायरल ?

फेसबुक यूजर ‘मुकुंद उपाध्याय’ ने 17 अप्रैल 2025 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “ वीडियो बीरभूमि बंगाल से आया है, पिटने वाला हिन्दू है, पीटने वाले पुलिस वाले SP का नाम निशात परवेज़ और ADSP फ़रहत अब्बास है, पिटने वाले हिंदू का अपराध ये है कि हनुमान जयंती पर प्रभात फेरी का आयोजन किया था, ममता बानो ने बंगाल में शरिया लगा रखा है और हिंदुओं का जीवन नर्क बना दिया है। वीडियो में आप आवाज सुन सकते हो, पीड़ित व्यक्ति जय बजरंग बली, जय बजरंग बली बोल रहा है।”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल 

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए इनविड टूल की मदद से वीडियो के कई कीफ्रेम निकाले और उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें वायरल वीडियो इंडिया जोन नामक एक यूट्यूब चैनल पर मिला। वीडियो को 30 सितंबर 2014 को शेयर किया गया था। 

पड़ताल के दौरान हमें वायरल वीडियो अलग-अलग दावों के साथ कई अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स पर शेयर हुआ मिला।

गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च करने पर हमें दावे से जुड़ी एक पोस्ट पश्चिम बंगाल पुलिस के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर मिली। पोस्ट 12 जुलाई 2017 को शेयर की गई थी। पुलिस ने दावे को फर्जी बताया था। पुलिस ने वीडियो की तस्वीर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा था कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल में भाजपा आईटी सेल के सचिव तरुण सेनगुप्ता को फर्जी खबर फैलाने और सांप्रदायिक विद्वेष पैदा करने के आरोप में आज गिरफ्तार किया गया।

आजतक की वेबसाइट पर 12 जुलाई 2017 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता को सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। कार्यकर्ता पर सोशल मीडिया के जरिए माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा है। गिरफ्तार कार्यकर्ता तरुण को बीरभूम के सूरी जिले की कोर्ट में पेश किया जाएगा। तरुण बीजेपी IT सेल का प्रमुख है। आसनसोल से गिरफ्तार तरुण का घर बर्नपुर में है, जो कि अभी बंद है।”

अन्य न्यूज रिपोर्ट को यहां पर देखें।

अधिक जानकारी के लिए हमने कोलकाता दैनिक जागरण के रिपोर्टर  राजीव झा से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि हाल-फिलहाल में यहां पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।

अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर एक विचारधारा से जुड़ी पोस्ट को  शेयर करता है। यूजर ने प्रोफाइल पर खुद को दिल्ली का रहने वाला बताया है। यूजर को 12 हजार लोग फॉलो करते हैं। 

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि एक व्यक्ति को डंडों से पीटती पुलिस के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। वीडियो का हालिया बंगाल हिंसा से कोई संबंध नहीं है। वीडियो साल 2014 से इंटरनेट पर मौजूद है और अलग-अलग दावों से वायरल है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं कि वीडियो कहां का है, लेकिन यह साफ है कि इसका बंगाल में हुए हालिया हिंसा से कोई संबंध नहीं है।

  • Claim Review : मुर्शिदाबाद में हिंदू शख्स को पीटती पुलिस का वीडियो।
  • Claimed By : FB User Mukund Upadhyay
  • Fact Check : भ्रामक

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