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2022 में विश्‍वास न्‍यूज की उपलब्धियां : मीडिया से लेकर आमजन तक के लिए चलाया फैक्‍ट चेकिंग साक्षरता अभियान

  • By Vishvas News
  • Updated: January 4, 2023

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज): कोरोना वायरस टीकों को बदनाम करने से लेकर, नए कोरोना वायरस के खतरे को कम आंकने तक, बड़ी संख्या में लगातार गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। विश्वास न्यूज ने गलत सूचनाओं से लड़ने को एक मिशन के रूप में अपनाया है। COVID-19 महामारी के कारण लोगों को सामाजिक दूरी अपनाने को विवश होने के साथ-साथ क्वारंटाइन होना पड़ा था। इसके साथ ही कोरोना के दौरान समाज के हर वर्ग को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा, लेकिन मिस इन्फॉर्मेशन को लेकर फैक्ट चेकिंग और जागरूकता का प्रयास बंद नहीं हुआ।

विश्वास न्यूज के जरिए हम लगातार व्यावहारिक प्रशिक्षण और जागरूकता का कार्यक्रम करते रहे हैं, जिससे कि आम जनता के बीच फैल रहे हानिकारक, भ्रामक और झूठी सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सका। इस मिशन में हम काफी हद तक कामयाब रहे।

2022 में जब कोविड-19 के मामले कम होने लगे, तो विश्वास न्यूज ने ट्रेनिंग को ऑनलाइन से हाइब्रिड मोड में शिफ्ट कर दिया। इस दौरान विश्वास न्यूज ने भारत के 10 प्रमुख मीडिया घरानों के पत्रकारों को भी प्रशिक्षित किया। हम सच के साथी (SKS) कार्यक्रम के माध्यम से सीधे 50,000 लोगों (हमारे चैम्प्स) तक पहुंचे और हमारी कुल पहुंच 58 मिलियन यानी 5.80 करोड़ तक हो चुकी है। इतना ही नहीं, हमने वरिष्ठ और मध्यम स्तर के सैन्य अधिकारियों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के अधिकारियों के लिए भी ट्रेनिंग कार्यक्रमों का आयोजन किया है।

सच के साथी : विधानसभाचुनाव 2022

सच के साथी: विश्वास न्यूज द्वारा 15 फरवरी से 2 मार्च तक विधानसभा चुनाव (स्वस्थ मतदाताओं के लिए) के दौरान सच के साथी कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। मीडिया साक्षरता कार्यक्रम के तहत आम जनता को कोविड19 और इलेक्शन से जुड़े ट्रेंड और प्रोपेगेंडा के बारे में जागरूक किया गया। यह कार्यक्रम वेबिनार के रूप में इलेक्शन कमीशन और समाज में प्रभाव रखने वाले लोगों के सहयोग से सर्टिफाइड और प्रशिक्षित फैक्ट चेकर्स के द्वारा आयोजित किया गया था। इलेक्शन कमीशन और मेडिकल एक्सपर्ट्स ने सच के साथी कार्यक्रम से जुड़े प्रतिभागियों के सवालों के जवाब दिए। यह वेबिनार दो राज्यों के पांच शहरों में आयोजित किया गया था। वेबिनार के जरिए हम 19.9 मिलियन यानी 1 करोड़ 99 लाख लोगों तक पहुंचे थे। सच के साथी कार्यक्रम के तहत हम ओवरऑल 58 मिलियन लोगों यानी 5 करोड़ 80 लाख लोगों तक अपनी पहुंच बनाने में कामयाब रहे थे।

सच के साथी फैक्ट्स-अप

सच के साथी फैक्ट्सअप प्रशिक्षण और मीडिया साक्षरता कार्यक्रम के तहत, टीम विश्वास न्यूज भारत के 10 राज्यों में श्रोताओं के साथ जुड़ी और नागरिकों को फर्जी खबरों, गलत सूचना की पहचान करने और अपने साथियों के बीच झूठ के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने का प्रशिक्षण दिया। हमारा लक्ष्य लोगों को विश्वास टिपलाइन नंबर +91 9599299372 से कनेक्ट करके रोजाना आने वाली गलत सूचनाओं के बारे में जागरूक करना है। इसके साथ ही फैक्ट चेकर्स की एक टीम द्वारा टिपलाइन पर प्राप्त की गई गलत सूचनाओं की जांच कर सच्चाई को सामने रखना है। यह कार्यक्रम अक्टूबर 2022 में शुरू हुआ है और मार्च 2023 में समाप्त होगा।

फैक्ट चेकिंग एंड न्यूज वेरिफिकेशन फेलोशिप

विश्वास न्यूज ने अपने फैक्ट चेकिंग फेलोशिप प्रोग्राम के तहत मेटा और इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) के साथ मिलकर द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, हिंदुस्तान टाइम्स, एशियानेट न्यूज, मनोरमा ऑनलाइन, लोकमत, डेक्कन हेराल्ड, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया, प्रजावाणी और मातृभूमि सहित मीडिया जगत के 20 पत्रकारों को प्रशिक्षित किया।

फैक्ट चेकिंग पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का प्रशिक्षण

विश्वास न्यूज ने 2022 में सीआरपीएफ के अधिकारियों के लिए दो प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। पहला सत्र 2 जून, 2022 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) के कैंपस में ऑफलाइन आयोजित किया गया था, जिसमें विश्वास न्यूज के प्रशिक्षकों ने फैक्ट चेकिंग पर दो घंटे का प्रशिक्षण दिया। दूसरा सत्र जुलाई 2022 में ऑनलाइन आयोजित किया गया था।

फैक्ट चेकिंग पर भारतीय सेना का प्रशिक्षण

विश्वास न्यूज ने भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए 21 नवंबर, 2022 को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) में फैक्ट चेकिंग पर एक सत्र आयोजित किया था।

ग्लोबल फैक्ट 9, नॉर्वे में अपना काम प्रस्तुत किया

टीम विश्वास न्यूज ने ग्लोबल फैक्ट 9 में अपने सच के साथी (ट्रुथ वॉरियर्स) प्रोग्राम यस फॉर वैक्‍सीन को प्रस्तुत किया। IFCN की वार्षिक अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-चेकिंग कॉन्फ्रेंस नार्वे में हुई थी। यह कार्यक्रम नॉर्वेजियन फैक्ट-चेकिंग संस्था Faktisk.no के साथ ओस्लोमेट विश्वविद्यालय,
पत्रकारिता प्रशिक्षण संस्थान और खोजी पत्रकारिता के लिए फाउंडेशन, SKUP की साझेदारी में आयोजित किया गया।

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