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Fact Check: द‍िल्‍ली में प्रदर्शन के दौरान सेना ने नहीं की युवक की प‍िटाई, 2017 का वीड‍ियो अब झूठे दावे के साथ वायरल

कश्‍मीर के 2017 के पुराने वीड‍ि‍यो को द‍िल्‍ली में हुए व‍िरोध-प्रदर्शन के बीच सेना के अत्‍याचार के झूठे दावे के साथ अब वायरल क‍िया जा रहा है। इसका द‍िल्‍ली से कोई संबंध नहीं है।

नई द‍िल्‍ली (विश्वास न्‍यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प‍िछले द‍िनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी), कांग्रेस समेत कई व‍िपक्षी दलों और छात्र संगठनों का द‍िल्‍ली में भारी व‍िरोध-प्रदर्शन देखने को म‍िला। अब इसी प्रदर्शन के नाम पर एक वीड‍ियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सेना के दो जवानों को एक शख्‍स को जमीन पर लेटाकर बुरी तरह पीटते हुए देखा जा सकता है। इस वीड‍ियो को द‍िल्‍ली का बताकर वायरल क‍िया जा रहा है।

विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्‍ट की व‍िस्‍तार से जांच की। यह फर्जी साब‍ित हुई। वायरल वीडियो द‍िल्‍ली का नहीं, बल्‍क‍ि कश्‍मीर का है। यह 2017 का वीड‍ियो है। इसका द‍िल्‍ली के व‍िरोध-प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।

क्‍या हो रहा है वायरल?

फेसबुक पेज ‘Teesri jung media’ ने 12 अक्‍टूबर 2026 को एक वीड‍ियो शेयर करते हुए इसे द‍िल्‍ली का बताकर अंग्रेजी में ल‍िखा, “Protesting in Delhi has become a crime. Indian Army has been deployed, markets are being shut down,and protesters are being beaten. There is widespread oppression and brutality in Delhi. This brutality is being carried out on the orders of Lieutenant General Rajesh Sethi.”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

विश्वास न्‍यूज ने वायरल वीड‍ियो की सच्‍चाई जानने के ल‍िए सबसे पहले इसके कई कीफ्रेम्स न‍िकाले। फ‍िर इन्‍हें गूगल लेंस टूल के जर‍िए सर्च क‍िया गया। विश्वास न्‍यूज को सर्च के दौरान ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट म‍िली। इसमें वीडियो का स्क्रीनशॉट इस्‍तेमाल करते हुए बताया गया क‍ि पुलवामा में ऐसे वीड‍ियो सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर सेना के जवान युवकों की पिटाई करते और उन्हें पाकिस्तान विरोधी नारे लगाने के लिए मजबूर करते दिख रहे हैं। य‍ह खबर 15 अप्रैल 2017 को प्रकाशित की गई थी। खबर में आगे बताया गया क‍ि पुलवामा डिग्री कॉलेज के एक छात्र को कथित तौर पर चार सैन्यकर्मियों ने जमीन पर गिराकर डंडे से पीटा।

सर्च करने पर हमें वायरल वीड‍ियो का लंबा वर्जन एक्‍स यूजर ‘Shahid Tantray’ (@shahidtantray) के हैंडल पर म‍िला। 15 अप्रैल 2017 को इसे कश्‍मीर का बताकर अपलोड क‍िया गया था।

विश्वास न्‍यूज को सर्च के दौरान 15 अप्रैल 2017 को ‘डेक्कन हेराल्ड’ द्वारा पब्‍ल‍िश एक न्‍यूज में भी वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट मिला। इस खबर में बताया गया क‍ि चार सैन्य कर्मियों द्वारा पीटा गया व्यक्ति पुलवामा डिग्री कॉलेज का छात्र था।

हमें ‘डीएनए’ के एक्‍स हैंडल पर भी एक पोस्‍ट मिली, जिसमें वायरल वीड‍ियो के ग्रैब्‍स का इस्‍तेमाल करते हुए इसे कश्‍मीर का बताया गया। इसे 15 अप्रैल 2017 को पोस्‍ट किया गया था।

जांच के दौरान हमें द‍िल्‍ली पुल‍िस का भी एक जवाब म‍िला। एक्‍स पर एक यूजर को र‍िप्‍लाई करते हुए द‍िल्‍ली पुल‍िस ने इस वायरल दावे को फेक बताया। उन्‍होंने स्पष्ट क‍िया क‍ि इसका प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।

हमारी अब तक की जांच से यह तो स्पष्ट हो गया क‍ि द‍िल्‍ली के व‍िरोध-प्रदर्शन के नाम पर वायरल हो रहा वीड‍ियो 2017 से इंटरनेट पर मौजूद है। इसका द‍िल्‍ली से कोई संबंध नहीं है।

‘दैन‍िक जागरण’, जम्‍मू-कश्‍मीर के उपमुख्य संवाददाता राहुल शर्मा ने पुष्‍ट‍ि करते हुए हमें बताया क‍ि वायरल हो रहा वीड‍ियो काफी पुराना है। इसे पहले भी कई बार झूठे दावे के साथ वायरल क‍िया जा चुका है।

क्‍या है संदर्भ?

द‍िल्‍ली समेत देश के कई ह‍िस्‍सों में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान के बहाने चुनाव आयोग पर तथाकथित ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाकर कांग्रेस समेत कई व‍िपक्षी दलों और कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफे मांगते हुए प्रदर्शन क‍िया।

12 अक्‍टूबर 2026 को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने दिल्ली में एक मार्च निकाला था। इस दौरान राहुल गांधी और विपक्ष के कुछ नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और चुनाव आयोग और एसआईआर के खिलाफ एक याचिका दाखिल की गई। ‘बीबीसी’ ह‍िंदी की 12 अक्‍टूबर 2026 की एक खबर में इस बारे में व‍िस्‍तार से पढ़ा जा सकता है।

10 और 11 अक्‍टूबर 2026 को द‍िल्‍ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों को ह‍िरासत में ल‍िया गया था। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमत‍ि नहीं होने के बावजूद हजारों की संख्‍या में लोग द‍िल्‍ली के अलग-अलग इलाकों में जुटे। ‘जागरण डॉट कॉम’ की खबर में इस बारे में व‍िस्‍तार से पढ़ा जा सकता है।

अंत में हमने कश्‍मीर के पुराने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले फेसबुक पेज की सोशल स्‍कैन‍िंग की। हमने पाया कि इसे 400 से अधिक लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट 2026 में बनाया गया था और अलीगढ़ से संचाल‍ित होता है।

न‍िष्‍कर्ष: विश्वास न्‍यूज की जांच में वायरल पोस्ट फेक साब‍ित हुई। कश्‍मीर के 2017 के पुराने वीड‍ि‍यो को द‍िल्‍ली में हुए व‍िरोध-प्रदर्शन के बीच सेना के अत्‍याचार के झूठे दावे के साथ अब वायरल क‍िया जा रहा है। इसका द‍िल्‍ली से कोई संबंध नहीं है।

  • Claim Review : द‍िल्‍ली में व‍िरोध प्रदर्शन के बीच भारतीय सेना ने युवक को जमीन पर ग‍िरा कर पीटा।
  • Claimed By : Facebook Page Teesri jung
  • Fact Check : झूठ

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