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Fact Check : गुजरात के अंबाजी के मॉकड्रिल का वीडियो फर्जी दावे के साथ वायरल

नई दिल्‍ली (विश्‍वास न्‍यूज)। सोशल मीडिया पर 45 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि गुजरात स्थित अंबाजी मंदिर में दो आतंकी घुस गए थे। एक को जिंदा पकड़ लिया गया तो दूसरा मारा गया। इस वीडियो के माध्‍यम से गुजरात पुलिस को बधाई दी जा रही है।

विश्‍वास टीम ने जब इस वीडियो की पड़ताल की तो हमारे सामने सच कुछ और सामने आया। दरअसल वायरल वीडियो मार्च 2019 का। लोकसभा चुनाव से पहले अंबाजी मंदिर में सुरक्षा के लिहाज से एक मॉक ड्रिल की गई थी। उसी का वीडियो अब फर्जी दावे के साथ कुछ लोग वायरल कर रहे हैं। एक ऐसा ही वीडियो पिछले दिनों महाराष्‍ट्र स्थित अंबाजी मंदिर का भी फर्जी दावे के साथ वायरल हुआ था।

क्‍या है वायरल पोस्‍ट में

सोशल मीडिया पर कई ऐसे यूजर्स हैं जो अंबाजी मंदिर में हुई मॉक ड्रिल के वीडियो को फर्जी दावे के साथ वायरल कर रहे हैं।

अजय त्‍यागी नाम के एक फेसबुक अकाउंट से पुराने वीडियो को अपलोड करते हुए दावा किया गया, ”गुजरात के माँ अम्बाजी मंदिर में कल 2 आतंकवादी घुसे एक को ज़िंदा पकड़ा गया ओर एक को 72 के पास भेज दिया गया! देखिए पुरा विडियो…शाबाश गुजरात पुलिस!”

पड़ताल

विश्‍वास टीम ने सबसे पहले वायरल हो रहे वीडियो को ध्‍यान से देखा। 45 सेकंड के इस वीडियो के बीच-बीच में कुछ लोग गुजराती भाषा में बोल रहे थे। यानि यह तो तय था कि वीडियो गुजरात से ही जुड़ा हुआ था। इसके बाद विश्‍वास टीम ने InVID टूल की मदद ली। इसके लिए हमने वायरल वीडियो को InVID टूल में अपलोड करके कई वीडियो ग्रैब निकाले। इसके बाद इन वीडियो ग्रैब को गूगल रिवर्स इमेज में सर्च किया।

आखिरकार हमें एक अखबार की वेबसाइट पर एक खबर मिली। इसमें बताया गया कि बनासकांठा जिले के अंबाजी मंदिर में आतंकवादियों के प्रवेश की मॉकड्रिल आयोजित की गई। यह मॉकड्रिल जिला पुलिस अधीक्षक प्रदीप शेजुल के निदेश पर की गई।

अपनी सर्च को आगे बढ़ाते हुए हमने ‘गुजरात के अंबाजी मंदिर में आतंकी’ कीवर्ड को गूगल ट्रांसलेट टूल की मदद से गुजराती में अनुवाद किया।

इसके बाद गुजराती कीवर्ड को गूगल में सर्च किया तो गुजरात की एक वेबसाइट पर हमें मॉकड्रिल से संबंधित खबर मिली। इस खबर में भी बताया गया कि यह एक मॉकड्रिल थी।

पड़ताल को हमने जारी रखी। काफी सर्च के बाद हमें हिंदी में प्रकाशित एक खबर का लिंक मिला। इस खबर में हमें वही पुलिसवाले और लोकेशन दिखे जो वायरल वीडियो में था। खबर में बताया गया था कि गुजरात के शक्तिपीठ अंबाजी में बनासकांठा पुलिस की ओर से मॉक ड्रिल किया गया। यह ड्रिल एक घंटे चली थी।

विश्‍वास टीम की पड़ताल जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, हमें खबरें और वीडियो मिलते रहे। वायरल वीडियो का कुछ हिस्‍सा हमें ICBI NEWS के एक वीडियो पर मिला। यह वीडियो यूट्यूब पर भी मौजूद है। इसमें बताया गया कि गुजरात के अंबाजी मंदिर में पुलिस द्वारा किया गया मॉक ड्रिल।

इसके बाद विश्‍वास टीम ने गुजरात पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट को खंगालना शुरू किया। हमें गुजरात पुलिस का एक ट्वीट मिला। इसमें वायरल वीडियो की सच्‍चाई बताते हुए कहा गया कि यह वीडियो मार्च 2019 में हुई मॉक ड्रिल का है।

जांच के दौरान हम अंबाजी टेंपल के फेसबुक पेज पर गए। वहां काफी खंगालने पर हमें एक फेसबुक पोस्‍ट मिली। इसमें आरासुरी अंबाजी माता देव स्थान ट्रस्ट की ओर से बताया गया था कि अंबाजी मंदिर में आतंकवादी घुस आए वाली बातें सिर्फ अफवाह हैं। वह सिर्फ एक मॉकड्रिल थी।

इसके बाद विश्‍वास टीम ने अंबाजी टेंपल के मीडिया कॉडिनेटर आशीष रावल से संपर्क किया। उन्‍होंने हमें बताया कि वायरल हो रहा वीडियो रूटीन मॉकड्रिल का वीडियो है। इसका आतंकियों वाली बात से कोई संबंध नहीं है। पहले भी कई बार यह वीडियो गलत संदर्भ के साथ सोशल मीडिया में वायरल हो चुका है।

अब बारी थी बनासकांठा के पुलिस अधीक्षक प्रदीप सेजल के बयान की। एसपी प्रदीप सेजल के मुताबिक, जो वीडियो आतंकी के नाम पर वायरल हो रहा है। दरअसल, वह एक मॉक ड्रिल का वीडियो है। कुछ महीने पहले अंबा देवी के मंदिर में यह मॉक ड्रिल की गई थी।

अंत में हमने अंबाजी मंदिर के मॉकड्रिल के पुराने वीडियो को गलत दावे के साथ अपलोड करने वाले फेसबुक अकाउंट की सोशल स्‍कैनिंग की। हमें पता चला कि अजय त्‍यागी नाम के फेसबुक अकाउंट से हमेशा वायरल हो रहे कंटेंट को पोस्‍ट और शेयर किया जाता रहा है।

निष्‍कर्ष : विश्‍वास टीम की पड़ताल में पता चला कि मार्च 2019 में गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थित अंबाजी मंदिर में एक मॉकड्रिल हुई थी। उसी वक्‍त के वीडियो को अब आतंकियों के नाम पर वायरल किया जा रहा है।

पूरा सच जानें…

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  • Claim Review : गुजरात के अंबाजी मंदिर से आतंकी पकड़ाए
  • Claimed By : अजय त्‍यागी
  • Fact Check : False
False
    Symbols that define nature of fake news
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