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Quick Fact Check: COVID-19 टेस्ट के लिए साल 2015 में फाइल नहीं किया गया था पेटेंट, फर्जी पोस्ट फिर वायरल

  • By Vishvas News
  • Updated: February 7, 2021

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। एक पेटेंट एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फोटो के साथ दिए गए कैप्शन में दावा किया जा रहा है कि कोविड-19 टेस्ट का पेटेंट 2015 में ही फाइल किया गया था। विश्वास न्यूज पहले भी इस दावे की पड़ताल कर चुका है। वायरल दावा झूठा है। हमारी पड़ताल में सामने आया है कि वायरल तस्वीर 2020 में फाइल किए गए चाइल्ड एप्लिकेशन का स्क्रीनशॉट है। यह एप्लिकेशन साल 2015 में सबमिट की गई पेरेंट पेटेंट एप्लिकेशन के तहत दाखिल की गई थी और इसका कोविड-19 से कोई लेना-देना नहीं है।

क्या हो रहा है वायरल

Mike Major नाम के फेसबुक यूजर ने पेटेंट एप्लिकेशन के स्क्रीनशॉट को पोस्ट किया है। इस पोस्ट के साथ दिए कैप्शन में लिखा है, ‘कोविड-19 पेटेंट 2015 में भरा गया।’

इस पोस्ट के आर्काइव्ड वर्जन को यहां क्लिक कर देखा जा सकता है।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने स्क्रीनशॉट को बारीकी से देखा। स्क्रीनशॉट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, यह पेटेंट एप्लिकेशन “कोविड 19 टेस्टिंग के मेथड व सिस्टम” के लिए है, जिसे रिचर्ड ए रॉथ्सचाइल्ड नाम के आवेदक ने फाइल किया है।

स्क्रीनशॉट के मुताबिक, एप्लिकेशन 17 मई 2020 को फाइल किया गया है। इसके अलावा हाइलाइटेड हिस्से में लिखा है कि प्रोविजनल एप्लिकेशन 13 अक्टूबर 2015 को फाइल किया गया था।

इस वायरल स्क्रीनशॉट को लेकर पहले किए गए विश्वास न्यूज के फैक्ट चेक को यहां नीचे विस्तार से पढ़ा जा सकता है।

हमारी पड़ताल के मुताबिक, फाइल की गई एप्लिकेशन पहले से मौजूद एप्लिकेशन के ही अंतर्गत डाली गई है। रॉथ्सचाइल्ड ने 2015 में जो पेटेंट फाइल किया था, वह बायोमेट्रिक डेटा ट्रांसमिट करने व एक्वायर करने के मेथड के लिए था।

पेटेंट एजेंट चैतन्य जानपुरे ने भी इस दावे को फर्जी बताया है।

यह पोस्ट एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसे फेसबुक यूजर Mike Major ने शेयर किया है। यूजर की प्रोफाइल को स्कैन करने पर हमने पाया कि उन्होंने पहले भी फर्जी पोस्ट शेयर कर रखी है।

निष्कर्ष: पोस्ट का यह दावा फर्जी है कि कोविड-19 टेस्टिंग पेटेंट 2015 में फाइल किया गया था। फर्जी पोस्ट एक बार फिर शेयर की जा रही है।

  • Claim Review : दावा किया जा रहा है कि कोविड-19 टेस्ट का पेटेंट 2015 में ही फाइल किया गया था।
  • Claimed By : Mike Major
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