Explainer- इन तरीकों से अपने जाल में फंसाते हैं साइबर अपराधी, सतर्क रहकर बचा जा सकता है फ्रॉड से
किसी शख्सियत की शादी हो या कोई त्योहार, साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लुभावने मैसेज के साथ फिशिंग लिंक्स भेजने का मौका देखते रहते हैं। आइए जानते हैं किस तरह के तरीके अपनाते हैं ये साइबर अपराधी और इस तरह की धोखाधड़ी से कैसे बचा जाए-
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Aug 28, 2024 at 05:40 PM
- Updated: Sep 26, 2025 at 12:14 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। किसी शख्सियत की शादी हो या कोई त्योहार या फिर चुनाव, साइबर अपराधी लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए लुभावने मैसेज के साथ फिशिंग लिंक्स भेजने का मौका देखते रहते हैं। इनकी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की योजना में लखपति बनने के चक्कर में कई लोग अपना बैंक बैलेंस जीरो करा चुके हैं। भारत में फिशिंग अटैक के मामलों में बढ़ोतरी इनकी गंभीरता की ओर इशारा करते हैं।
आरबीआई (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय यूजर्स इंटरनेट पर औसतन एक दिन में पौने सात घंटे यानी 6.45 घंटे बिताते हैं। इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में डेटा चोरी के मामले बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में इनमें से सबसे ज्यादा 22 फीसदी मामले फिशिंग अटैक के हैं।

फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने 2023 में इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट जारी की थी। इसके मुताबिक, पिछले पांच साल में आईसी3 को इंटरनेट स्कैम की हर साल औसतन सात लाख 58 हजार शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें पूरी दुनिया के लोगों से संबंधित हैं। 2023 में पर्सनल डेटा ब्रीच की शिकायतों की संख्या 55851 है। अगर फिशिंग की बात करें तो 2023 में करीब तीन लाख शिकायतें मिली हैं। पांच साल पहले यानी 2019 में यह संख्या 1 लाख 14 हजार 702 थी।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में पूरे देश में साइबर क्राइम के 65893 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2020 और 2021 में यह संख्या 50035 और 52974 थी। मतलब हर साल इस तरह के मामले बढ़े हैं। 2022 में डेटा चोरी के मामलों में दर्ज केस की बात करें तो इनकी संख्या 97 है।

प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की 24 जुलाई 2024 को जारी की गई प्रेस रिलीज में लिखा है कि एनसीआरबी की 2022 की रिपोर्ट में दिया गया है कि 2022 में साइबर क्राइम के तहत किए गए फ्रॉड के 17470 केस दर्ज किए गए, जो 2020 में 10395 और 2021 में 14007 थे। एनसीआरबी पर फेक वेबसाइट के जरिए होने वाली धोखाधड़ी जैसी घटनाओं का अलग से डेटा नहीं होता है।

क्या है फिशिंग अटैक?
यूके सरकार की नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, फिशिंग तब होती है, जब अपराधी स्कैम ईमेल (या टेक्स्ट मैसेज) भेजते हैं, जिसमें फेक वेबसाइट के लिंक होते हैं। वेबसाइट में मैलवेयर (जैसे रैनसमवेयर) हो सकता है, जो सिस्टम और संस्थानों को नुकसान पहुंचा सकता है। या इनको यूजर को संवेदनशील जानकारी (जैसे पासवर्ड) बताने या पैसे ट्रांसफर करने के लिए धोखा देने के लिए डिजाइन किया जा सकता है।

विश्वास न्यूज ने वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान फिशिंग लिंक्स से संबंधित 53 स्टोरी फाइल की हैं। आइए एक नजर डालते हैं कुछ लुभावने तरीकों पर-
– मुकेश अंबानी या रतन टाटा के जन्मदिन की खुशी में फ्री रिचार्ज
– होली, दिवाली या नए साल पर फ्री रिचार्ज
– सरकारी योजनाओं के नाम पर रुपये देने का झांसा। जैसे- प्रधानमंत्री जन धन योजना, बेरोजगारी भत्ता योजना, फ्री सिलाई मशीन योजना के नाम से रुपये मिलने का झांसा।
– टीम इंडिया के मैच जीतने के खुशी में फ्री रिचार्ज
– किसी प्रसिद्ध कंपनी की सालगिरह के नाम का मैसेज। जैसे- कतर एयरवेज या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के नाम से गिफ्ट।
– चुनाव के दौरान फ्री रिचार्ज। जैसे- भाजपा या कांग्रेस दे रही फ्री रिचार्ज
– नौकरी के नाम से। जैसे- अयोध्या एयरपोर्ट पर नौकरी।
– कैशबैक के नाम से।
– केबीसी में लॉटरी का झांसा।
कहां करें शिकायत?
पीआईबी की प्रेस रिलीज के अनुसार, गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पर आम लोग सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सकते हैं। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है। संदिग्ध वेबसाइट URL का उपयोग करके साइबर अपराध करने के प्रयासों की त्वरित रिपोर्टिंग के लिए नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 31 जनवरी 2024 से ‘Report Suspect’ की सुविधा जोड़ी गई है। अब तक 5252 संदिग्ध URL की रिपोर्ट की गई है।
कैसे करें जांच?
NCRP पर ‘Suspect Data’ श्रेणी के तहत किसी भी वेबसाइट की प्रामाणिकता की जांच करने के लिए आम जनता के लिए सुविधा जोड़ी गई है। ‘डॉट इन’ डोमेन के दुरुपयोग को रोकने के लिए नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) के साथ सहयोग किया गया है। अक्टूबर 2023 से मई 2024 के बीच 310 ‘फिशिंग’ डोमेन को निष्क्रिय कर दिया गया है। इसके अलावा 91 फिशिंग/नकली वेबसाइटों को निष्क्रिय किया गया है।
टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930
वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और धोखेबाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली’ (Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System) शुरू की गई है। अब तक 7.6 लाख से अधिक शिकायतों में 2400 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई गई है। ऑनलाइन साइबर शिकायत दर्ज कराने में सहायता प्रदान करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ को चालू किया गया है।

ऐसे रखें ईमेल को सुरक्षित
NCRP पोर्टल पर अपलोड बुकलेट के अनुसार, साइबर अपराधी विश्वसनीय ईमेल जैसी दिखने वाली फर्जी ईमेल भेजकर आपकी जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं। इसका शीर्षक काफी लुभावना हो सकता है। इसके जरिए मैलवेयर भी भेजा जा सकता है।
– ईमेल की सुरक्षा के लिए उसका जटिल पासवर्ड होना चाहिए और समय-समय पर इसे बदलते रहना चाहिए।
– टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन का प्रयोग करें।
– अपरिचित से प्राप्त लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें।
– अगर किसी दूसरे के सिस्टम से मेल लॉगइन कर रहे हैं तो पासवर्ड सेव के ऑप्शन पर क्लिक मत करें।
– ईमेल हैक हो जाने की स्थिति में जानकारों को इस बारे में जानकारी दे दें।
– अज्ञात सोर्स से प्राप्त ऐप, मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक मत करें।
– लॉटरी जीतने जैसे ईमेल या मैसेज पर प्रतिक्रिया न दें।
– किसी परिचित के ईमेल से रुपये मांगने का कोई संदेश आए तो उससे फोन पर कन्फर्म करें।

एक्सपर्ट की राय
इस बारे में हमने साइबर एक्सपर्ट एवं दिल्ली व यूपी पुलिस से जुड़े किसलय चौधरी से संपर्क किया। वह दिल्ली और यूपी पुलिस से भी जुड़े हुए हैं। उनका कहना है, “सोशल मीडिया पर अक्सर फिशिंग लिंक शेयर किए जाते हैं। ये मैसेज के जरिए भी होते हैं। इन पर क्लिक करते ही फोन हैक हो जाता है। पुलिस के पास इस तरह के कई केस आते हैं।”

वहीं, साइबर एक्सपर्ट एवं सेंटर फॉर रिसर्च ऑन साइबर क्राइम एंड साइबर लॉ के चेयरमैन अनुज अग्रवाल का कहना है, “इस तरह के मैसेज या ईमेल से सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए।”

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं
सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...












