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Fact Check: Art 30 अल्पसंख्यकों की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना के अधिकार से जुड़ा, मंदिर संचालन से नहीं है कोई संबंध

यह दावा गलत है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 हिंदू धर्म के लोगों को अपनी पंसद के धार्मिक संस्थाओं को नियंत्रित करने में बाधक है। भारतीय संविधान के भाग तीन में मौलिक अधिकारों का वर्णन है, जिसमें अनुच्छेद 25 से 28 जहां धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के बारे में हैं, वहीं अनुच्छेद 29-30 संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकारों से संबंधित है। संविधान का अनुच्छेद 30 साफ और स्पष्ट रूप से धर्म  या भाषा के आधार पर सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी पसंद की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और उसे संचालित करने का अधिकार देता है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया यूजर्स एक पोस्ट को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि संविधान के अनुच्छेद 30 को हटाए जाने की जरूरत है, ताकि इसकी वजह से हिंदू धर्म के लोगों को अपनी पंसद के धार्मिक संस्थाओं पर ज्यादा नियंत्रण मिल सके। वायरल पोस्ट को जिस संदर्भ में शेयर किया जा रहा है उससे यह प्रतीत हो रहा है कि अनुच्छेद 30 धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों से संबंधित है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को भ्रामक पाया। वास्तव में संविधान के अनुच्छेद 30 का धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से कोई संबंध नहीं है। धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के भाग तीन में अनुच्छेद 25-28 के तहत आता है। वहीं, संविधान का अनुच्छेद 30 देश में मौजूद धार्मिक या भाषाई अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थानों को स्थापित करने और उसे संचालित करने का अधिकार देता है।

सामान्य और आसान शब्दों में समझें तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने और उनका संचालन करने का अधिकार देता है।

क्या है वायरल?

विश्वास न्यूज के WhatsApp टिपलाइन नंबर पर यूजर्स ने इस पोस्ट को भेजते हुए इसकी सच्चाई बताए जाने का अनुरोध किया है।

विश्वास न्यूज के टिपलाइन पर भेजा गया क्लेम।

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस पोस्ट को समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

वायरल वीडियो में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 का जिक्र किया गया है। भारतीय संविधान की अद्यतन या अपडेटेड कॉपी हिंदी, अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं में भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद है। मौलिक अधिकारों का जिक्र भारतीय संविधान के भाग 3 में आता है और इसके तहत संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकारों का जिक्र अनुच्छेद 29 और 30 में आता है।

अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यक वर्गों के हितों को संरक्षित करता है, जिसमें 29 (1) भारत के नागरिकों को उनकी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार देता है। वहीं, 29 (2) राज्य पोषित या राज्य की वित्तीय मदद से चलने वाले किसी भी शिक्षा संस्थान में किसी भी नागरिक को उसकी धर्म, वंश, जाति या भाषा या इनमें से किसी के आधार पर प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता है।

कुल मिलाकर अनुच्छेद 29  धार्मिक एवं भाषायी अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का अधिकार देता है।

जबकि अनुच्छेद 30, शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना और उसे संचालित करने के मामले अल्पसंख्यकों वर्गों के अधिकार से संबंधित है। अनुच्छेद 30 (1) धर्म या भाषा आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि या पसंद की शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और उसके संचालन का अधिकार देता है।

Source-https://legislative.gov.in/constitution-of-india/

वहीं, अनुच्छेद 30 (2) इसका जिक्र करता है कि शैक्षणिक संस्थाओं को सहायता देने के मामले में राज्य किसी भी संस्था के खिलाफ इस आधार पर भेदभाव नहीं करेगा कि वह किसी धर्म या भाषा आधारित अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबंध के तहत संचालित है।

यानी अनुच्छेद 30 का संबंध धार्मिक स्वतंत्रता या मंदिरों के संचालन के अधिकार से जुड़ा हुआ नहीं है, जैसा कि वायरल पोस्ट में दावा किया गया है।

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)

गौरतलब है कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25-28 में वर्णित है। अनुच्छेद 25 जहां धर्म की उपासना और आचरण व उसका प्रचार की स्वतंत्रता देता है। अनुच्छेद 26, धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की आजादी देता है।

अनुच्छेद 27 के मुताबिक, किसी व्यक्ति को किसी विशिष्ट धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृद्धि या उसके रखरखाव में खर्च करने के लिये कोई कर देने हेतु बाध्य नहीं किया जाएगा। जबकि अनुच्छेद 28 इस बात का प्रावधान करता है कि राज्य पोषित किसी भी शैक्षणिक संस्थान में कोई भी धार्मिक शिक्षा न दी जाए।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25-28 धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों से संबंधित है। (Source-legislative.gov.in/constitution-of-india/)

हालांकि, यह प्रावधान उन शैक्षणिक संस्थानों में लागू नहीं होता है, जिनका प्रशासन तो राज्य कर रहा हो, लेकिन उसकी स्थापना किसी ट्रस्ट के अधीन हुई हो, जिसके मुताबिक उस संस्था में धार्मिक शिक्षा देना जरूरी है।

वायरल पोस्ट को लेकर हमने सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन-रिकॉर्ड और ‘आर्टिकल 32’ और ‘एंड ऑफ कोलोनियल लॉज’ के लेखक अश्विनी दुबे से संपर्क किया। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि आर्टिकल 30 का संबंध अल्पसंख्यकों (धार्मिक और भाषाई) को अपनी पसंद के शिक्षा संस्थानों को स्थापित करने और उसे संचालन का अधिकार देता है। इसका किसी भी धर्म के मंदिरों के संचालन से कोई लेनादेना नहीं है।

संविधान के अनुच्छेदों से संबंधित अन्य वायरल दावों की फैक्ट चेक रिपोर्ट्स को यहां पढ़ा जा सकता है।

निष्कर्ष: यह दावा गलत है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 हिंदू धर्म के लोगों को अपनी पंसद के धार्मिक संस्थाओं को नियंत्रित करने में बाधक है। भारतीय संविधान के भाग तीन में मौलिक अधिकारों का वर्णन है, जिसमें अनुच्छेद 25 से 28 जहां धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के बारे में हैं, वहीं अनुच्छेद 29-30 संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकारों से संबंधित है। संविधान का अनुच्छेद 30 साफ और स्पष्ट रूप से धर्म  या भाषा के आधार पर सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी पसंद की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और उसे संचालित करने का अधिकार देता है।

  • Claim Review : हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित कर रहा संविधान का अनुच्छेद 30
  • Claimed By : Tipline User
  • Fact Check : भ्रामक

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