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Fact Check : हालिया ‘बिहार बंद’ के नाम पर वायरल हो रहा वीडियो अगस्त 2024 का है

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि पुलिस के लाठीचार्ज का हालिया बिहार बंद’ से कोई संबंध नहीं है। यह अगस्त 2024 का पुराना वीडियो है, जिसे अब भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

  • By: Umam Noor
  • Published: Jul 15, 2025 at 05:43 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। बिहार चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के विरुद्ध राज्‍य में विपक्ष दलों के महागठबंधन की ओर से 9 जुलाई को चक्‍का जाम का आयोजन किया। कई शहरों में बाजार पूरी तरह से बंद रहे तो कई जगह पर ट्रेनों को रोका गया। इसी से जोड़ते हुए एक वीडियो शेयर किया गया। इसमें कुछ पुलिसवालों को एक शख्‍स को लाठियों से पिटते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह बिहार बंद का हालिया वीडियो है। 

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि पुलिस के लाठीचार्ज का हालिया बिहार बंद’ से कोई संबंध नहीं है। यह अगस्त 2024 का पुराना वीडियो है, जिसे अब भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर ने 9 जुलाई को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “बिहार बंद करने पर पटना पुलिस, ख़ैर जो भी हो रहा हैं शांतिपूर्ण तरीके से हों रहा है..!! बाकी #बिहार_बंद।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले वीडियो को गौर से देखा। वीडियो में न्यूज एजेंसी एएनआई का लोगो देखा जा सकता है। वीडियो को इसी बुनियाद पर हमने सर्च किया। सर्च किए जाने पर हमें एएनआई के एक एक्स हैंडल पर वायरल वीडियो 21 अगस्त 2024 को पोस्ट किया हुआ मिला।  वीडियो के साथ दी गई  जानकारी के अनुसार, “बिहार में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ एक दिवसीय भारत बंद के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पटना में पुलिस ने लाठीचार्ज किया।”

इस मामले से जुड़ा न्यूज सर्च किये जाने पर हमें  दैनिक जागरण की वेबसाइट पर इससे जुड़ी जानकारी मिली। 21 अगस्त 2024 की खबर के अनुसार, “दलित और आदिवासी संगठनों ने हाशिए पर मौजूद समुदायों के लिए मजबूत प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की मांग को लेकर बुधवार को भारत बंद का आह्वान किया है। दलित और आदिवासी संगठनों के राष्ट्रीय परिसंघ (एनएसीडीएओआर) ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए न्याय और समानता सहित मांगों की एक सूची जारी की है। एनएसीडीएओआर ने सुप्रीम कोर्ट की सात न्यायाधीशों वाली पीठ के हालिया फैसले पर विरोधात्मक रुख अपनाया है।” पूरी खबर यहां पढ़ी जा सकती है।

10 जुलाई 2025 की खबर के अनुसार, “केंद्रीय श्रमिक संगठनों की देशव्यापी हड़ताल एवं आइएनडीआइए गठबंधन की ओर से बिहार बंद के कारण राज्य के बैंकों का 20-25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित रहा। वहीं, पटना में सवा सौ करोड़ का कारोबार प्रभावित रहा। आइएनडीआइए गठबंधन की ओर से बिहार बंद के कारण दुकानें बंद रहीं। बोरिंग रोड, बोरिंग कैनाल रोड, मौर्यालोक, हथुआ मार्केट, डाक बंगला  चौराहा, फ्रेजर रोड आदि इलाकों में दोपहर तक दुकानें बंद रही। जबकि प्रमुख बड़े कंपनियों के शोरूम भी नहीं खुले। इस कारण कारोबार प्रभावित हुआ।”

इससे पहले भी विश्वास न्यूज ने बिहार बंद को लेकर फैक्ट चेक किया है, हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

वायरल वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने हमारे सहयोगी दैनिक जागरण के पटना के क्राइम रिपोर्टर आशीष से संपर्क करते हुए वायरल वीडियो उनके साथ शेयर किया। उन्होंने हमें बताया कि यह वीडियो पिछले साल का है, हालिया नहीं।

अब बारी थी फर्जी  पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग करने की। यूजर को साढ़े सात हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। वहीं, यूजर के बायो के मुताबिक, वह कानपुर  के रहने वाले हैं। 

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि पुलिस के लाठीचार्ज का हालिया बिहार बंद’ से कोई संबंध नहीं है। यह अगस्त 2024 का पुराना वीडियो है, जिसे अब भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।

  • Claim Review : यह बिहार बंद का हालिया वीडियो है।
  • Claimed By : FB User- Sudhanshu Dixit
  • Fact Check : भ्रामक

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