Fact Check: अखिलेश यादव की लखनऊ में नहीं बनाई जा रही यह भव्य प्रतिमा, वायरल तस्वीर फर्जी
सपा नेता अखिलेश यादव की मूर्ति की तस्वीर फर्जी है। असल में वायरल हो रहा तस्वीर वास्तविक नहीं, बल्कि सिंथेटिक है, जिसे एआई टूल्स की मदद से तैयार किया गया है।
- By: Pragya Shukla
- Published: Sep 15, 2025 at 04:03 PM
- Updated: Sep 16, 2025 at 11:31 AM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की मूर्ति बनाने की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। फोटो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि लखनऊ में अखिलेश यादव की इस भव्य मूर्ति को बनाया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा फर्जी है। असल में वायरल हो रहा तस्वीर वास्तविक नहीं, बल्कि सिंथेटिक है, जिसे एआई टूल्स की मदद से तैयार किया गया है।
क्या हो रहा है वायरल ?
फेसबुक यूजर ने ‘Shiva Yadav’ 12 सितंबर 2025 को वायरल तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “Akhilesh Yadav नाम नही एक ब्रांड हे लखनऊ में बन रहा है PDA जननायक का भव्य प्रतिमा।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्डस की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी कोई न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली। हमने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी खंगाला। हमें वहां पर भी दावे से जुड़ी कोई पोस्ट नहीं मिली।
वायरल तस्वीर के बारे में कोई जानकारी न मिलने पर हमें इसके एआई से बने होने का संदेह हुआ। हमने एआई डिक्टेशन टूल्स की मदद से फोटो को स्कैन किया। हमने सबसे पहले हाइव मॉडरेशन पर तस्वीर को अपलोड किया। टूल ने फोटो को डिटेक्ट किया और करीब 100 फीसदी तक फोटो के एआई से बने होने की संभावना जताई।

इसी तरह हमने एक अन्य टूल की मदद से फोटो के बारे में सर्च किया। दूसरे टूल ‘undetectable’ पर फोटो को अपलोड किया। टूल ने तस्वीर को स्कैन करते हुए इसके एआई से बने होने की संभावना जताई।

अधिक जानकारी के लिए हमने एआई एक्सपर्ट अजहर माचवे के साथ संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल तस्वीर को एआई की मदद से बनाया गया है। फोटो में जो लोग मूर्ति बना रहे हैं, उनके शरीर की बनावट सही नहीं है। पीले रंग के कपड़ों में एक शख्स के शरीर की बनावट का ही पता नहीं चल पा रहा है। ऐसा अक्सर तब होता है,जब तस्वीर को एआई टूल्स की मदद से बनाया जाता है।
अंत में हमने फोटो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर एक विचारधारा से जुड़ी पोस्ट को शेयर करता है। यूजर को करीब 2.5 हजार लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि सपा नेता अखिलेश यादव की मूर्ति की तस्वीर फर्जी है। असल में वायरल हो रहा तस्वीर वास्तविक नहीं, बल्कि सिंथेटिक है, जिसे एआई टूल्स की मदद से तैयार किया गया है।
- Claim Review : लखनऊ में बनाई जा रही है अखिलेश यादव की भव्य प्रतिमाष
- Claimed By : FB User Shiva Yadav
- Fact Check : झूठ
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