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Fact Check: यह भारत-नेपाल सीमा पर मौजूदा बांध नहीं, पुणे स्थित भाटघर डैम का वीडियो है

जिस वीडियो को शेयर कर यह दावा किया जा रहा है कि इसमें दिख रहा बांध गंडक बैराज परियोजना है और जिसकी वजह से नेपाल में आई भयंकर बाढ़ का असर बिहार में नहीं हुआ, वह वास्तव में महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित भाटघर डैम का वीडियो है।

  • By: Abhishek Parashar
  • Published: Sep 2, 2026 at 04:19 PM
  • Updated: Sep 2, 2026 at 06:14 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। नेपाल में 26 अगस्‍त 2026 को आए फ्लैश फ्लड के बाद गंडक नदी में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इसी संदर्भ में सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें पानी से भरे हुए एक बांध को देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह गंडक बैराज प्रोजेक्ट के तहत भारत-नेपाल सीमा पर बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर में बना बांध है, जिसकी वजह से नेपाल में आई बाढ़ की आपदा से बिहार सुरक्षित रहा। दावा किया जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की देन है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत पाया। वायरल वीडियो में नजर आ रहे बांध का भारत-नेपाल से कोई संबंध नहीं है। यह महाराष्ट्र के पुणे स्थित ‘भाटघर डैम’ का वीडियो है। हाल ही में जब यह डैम अपनी पूरी क्षमता तक भर गया था, तब इसके वीडियो इंटरनेट पर सामने आए थे। इसी पुराने और असंबंधित वीडियो को नेपाल की हालिया बाढ़ और गंडक बैराज से जोड़कर भ्रामक तरीके से वायरल किया जा रहा है। गौरतलब है कि असली गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर) भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एक अलग बांध है।

क्या है वायरल?

इंस्टाग्राम यूजर ‘bharat_junction.in‘ ने वायरल वीडियो (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा, “गंडक बैराज परियोजना भारत और नेपाल के बीच एक बहुत बड़ी संयुक्त पहल थी। भारत की ओर से इस परियोजना को राजनीतिक रूप से प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने आगे बढ़ाया था और इसका औपचारिक उद्घाटन 4 मई, 1964 को हुआ था। भारत-नेपाल सीमा पर भैंसालोटन (जिसे अब बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में वाल्मीकिनगर के नाम से जाना जाता है) में स्थित इस परियोजना की कल्पना नेहरू ने एक विनाशकारी नदी को क्षेत्रीय विकास के लिए एक संपत्ति में बदलने के उद्देश्य से की थी। #india #reality #news”

इसके अलावा वायरल वीडियो पर टेक्स्ट भी नजर आ रहा है, जिसमें लिखा है, “बिहार (इस बांध की वजह से) नेपाल में आई बाढ़ से सुरक्षित बच गया।”

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो को समान दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

वायरल वीडियो में नजर आ रहे बांध के कीफ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें यह वीडियो कई सोशल मीडिया यूजर्स की प्रोफाइल्स पर मिला, जिनमें इसे पुणे के भाटघर बांध का बताते हुए शेयर किया गया है।

यूट्यूब यूजर ‘@prajapat6528’ ने इस वीडियो को आठ अगस्त 2026 को शेयर करते हुए इसे महाराष्ट्र के पुणे के भाटघर बांध का बताया था।

गौरतलब है कि नेपाल में फ्लैश फ्लड की घटना 26 अगस्त 2026 को हुई थी।

एक अन्य यूट्यूब यूजर ‘@GeoDisha05’ ने भी इस वीडियो को पुणे के भाटघर बांध का बताते हुए 28 अगस्त 2026 को शेयर किया था। उन्होंने इसे शेयर करते हुए लिखा, “मानसून की भारी बारिश के बाद पुणे का भाटघर (लॉयड) बांध अपनी पूरी क्षमता तक भर गया है, जिससे पानी के ओवरफ्लो होने का शानदार नजारा देखने को मिल रहा है। स्पिलवे से पानी छोड़े जाने के साथ ही, यह बांध इलाके में पानी के भंडारण और बाढ़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभा रहा है।”

‘जनसंपर्क न्यूज’ की फेसबुक प्रोफाइल से भी इस वीडियो को पुणे के भाटघर बांध का बताते हुए शेयर किया था। हमारी जांच से स्पष्ट है कि वायरल हो रहा वीडियो भारत-नेपाल सीमा पर मौजूद गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर) का नहीं है।

इसके बाद हमने गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर) की तस्वीरों को सर्च किया। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर इस बैराज की तस्वीरें मौजूद हैं, जो वायरल वीडियो में नजर आ रहे बांध से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं। नीचे दिए गए कोलाज में इस अंतर को साफ-साफ देखा जा सकता है।

दी गई जानकारी के मुताबिक, “पहले ‘भैंसा लोटन’ के नाम से मशहूर यह एक प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट है, जहां गंडक नदी पर एक बांध (गंडक प्रोजेक्ट) बना हुआ है। यह बांध और इसकी नहरें उत्तर-पश्चिमी बिहार के लिए जीवनरेखा हैं। यह नहर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी सिंचाई का काम करती है। इस बांध से पनबिजली (हाइड्रो-इलेक्ट्रिसिटी) भी पैदा की जाती है। देश को यह बांध तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सौंपा था।”

वायरल वीडियो को लेकर हमने अपने सहयोगी ‘दैनिक जागरण’ के पश्चिमी चंपारण के बगहा के ब्यूरो प्रभारी विनोद राव से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया, “यह वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज का वीडियो नहीं है।” उन्होंने हमारे साथ दो सितंबर की रिपोर्ट को साझा किया, जिसमें गंडक बैराज के जलस्तर के बढ़ने का जिक्र है। वाल्मीकिनगर इसी ब्यूरो के तहत आता है।

आजतक की न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। इसे देखते हुए बिहार में छह जिले अलर्ट पर हैं, जबकि NDRF की नौ टीमें यहां तैनात की गई हैं।

क्या है संदर्भ?

नेपाली न्यूज पोर्टल ‘ईकांतिपुर डॉट कॉम’ के मुताबिक, एक सितंबर 2026 तक 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि 1,050 लोगों की इस आपदा में मृत्यु हुई है और करीब चार हजार लोग अभी भी लापता हैं। ये सरकार की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़े हैं।

‘हिमालयन टाइम्स’ की दो सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा है कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ का संबंध जलवायु परिवर्तन से है और उन्होंने हिमालय में बढ़ते जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में शाह ने कहा कि हिमालय के तापमान में 1.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि इस आपदा का एक कारण है।”

नेपाल आपदा से संबंधित अन्य #FactCheck रिपोर्ट्स को यहां पढ़ा जा सकता है। वायरल वीडियो को शेयर करने वाले यूजर को इंस्टाग्राम पर करीब 60 हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: जिस वीडियो को शेयर कर यह दावा किया जा रहा है कि इसमें दिख रहा बांध गंडक बैराज परियोजना है और जिसकी वजह से नेपाल में आई भयंकर बाढ़ का असर बिहार में नहीं हुआ, वह वास्तव में महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित भाटघर डैम का वीडियो है।

  • Claim Review : गंडक बैराज का वीडियो, जिसकी वजह से नेपाल बाढ़ से सुरक्षित रहा बिहार।
  • Claimed By : Insta User- bharat_junction.in
  • Fact Check : भ्रामक

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