Explainer: दिल्ली जल बोर्ड के नाम से कनेक्शन कटने का डर दिखा ठगी कर रहे साइबर अपराधी
क्या आपको भी दिल्ली जल बोर्ड के नाम का मैसेज मिला है और उसमें बिल की बकाया राशि की वजह से कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई है? अगर ऐसा है तो घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Jun 9, 2025 at 04:25 PM
- Updated: Sep 26, 2025 at 11:56 AM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। क्या आपको भी दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के नाम का मैसेज मिला है और उसमें बिल की बकाया राशि की वजह से कनेक्शन काटने की चेतावनी दी गई है? इस तरह का मैसेज दिल्ली के कई लोगों को मिल रहा है। इतना ही नहीं बिल बकाया होने पर पुणे और पानीपत में भी पानी कनेक्शन कटने का मैसेज लोगों को मिला है।
अगर ऐसा है तो घबराने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि यह साइबर अपराधियों की एक चाल है, जिसके जरिए वे लोगों से ठगी कर रहे हैं।
वायरल मैसेज
एक्स यूजर Nakul Tarun ने एक पोस्ट (आर्काइव लिंक) की है, उसमें लिखा है,
“Customer Your delhi jal board connection will be disconnected Tonight at 9:30 pm from delhi jal office. because your previous month metre reading was not update, please immediately contact with our delhi jal office Mr Atul kumar 9801224975 Thank you.”
(आपका दिल्ली जल बोर्ड कनेक्शन आज रात 9:30 बजे दिल्ली जल कार्यालय से काट दिया जाएगा, क्योंकि आपके पिछले महीने की मीटर रीडिंग अपडेट नहीं थी, कृपया तुरंत हमारे दिल्ली जल कार्यालय से संपर्क करें श्री अतुल कुमार 9801224975 धन्यवाद।)
उन्होंने इस मैसेज को फ्रॉड बताते हुए दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और दिल्ली पुलिस को टैग किया है।
फेसबुक यूजर Sandeep Pradeep Sahithi ने इसी तरह के मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर (आर्काइव लिंक) किया है।

केस स्टडी
दैनिक जागरण की वेबसाइट पर 2 अप्रैल को छपी रिपोर्ट के अनुसार, “अवधेश कुमार ने बताया कि उनके पास वॉट्सऐप पर कुछ दिन से पानी का बकाया बिल भरने के मैसेज आ रहे हैं। मैसेज में उनको बकाया बिल जमा करने के लिए एक नंबर पर संपर्क करने का लिखा हुआ था। मैसेज को अनदेखा करने पर उनके पास फोन आया। कॉलर ने उनको एक फाइल देकर दिल्ली जल बोर्ड का ऐप डाउनलोड कर बिल भरने को कहा। उसमें बिल का फरफॉर्मा था। इसमें अवधेश का 14 रुपये का बिल बकाया दिखा रहा था।”

रिपोर्ट के मुताबिक, “कॉलर ने उनसे बिल भरने के दौरान ऐप में ओटीपी नंबर डालने को कहा। उन्होंने उसमें डेबिट कार्ड और पिन नंबर भर दिया। कॉलर के हाथ में उनके फोन पर पूरा एक्सेस पहुंच गया और उनके अकाउंट से पैसे निकलने लगे। तीन बार में उनके अकाउंट से दो लाख रुपये निकाले गए।”
क्या बोला ठग?
हमने भी इसकी जांच के लिए इसी तरह के एक मैसेज में दिए गए नंबर पर कॉल की। कॉलर की प्रोफाइल पिक में दिल्ली जल बोर्ड का लोगो लगा दिखा। उसने हमें हमारे वॉट्सऐप पर इसका प्रॉसेस बताते हुए दिल्ली जल बोर्ड के नाम से एक एपीके फाइल भेजी। ठग ने कहा कि आपको बिल अपडेट करना पड़ेगा। इसके लिए फाइल को ओपन करिए और फिर उसके अनुसार उसे प्रॉसेस कीजिए।

दिल्ली जल बोर्ड ने किया सतर्क
दिल्ली जल बोर्ड के एक्स हैंडल से 4 जून को पोस्ट कर इस फ्रॉड से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसमें लिखा है, दिल्ली जल बोर्ड को पता चला है कि उसके उपभोक्ताओं को मोबाइल कॉल/एसएमएस/वॉट्सऐप संदेशों के माध्यम से संपर्क किया जा रहा है, जिसमें डीजेबी से होने का झूठा दावा किया जा रहा है। तत्काल भुगतान न करने पर पानी का कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है। ये कॉल/एसएमएस/वॉट्सऐप संदेश डीजेबी द्वारा अधिकृत नहीं हैं। यह ठगी का प्रयास है। कनेक्शन काटने की धमकी के तहत फोन कॉल/एसएमएस/वॉट्सऐप संदेशों पर भुगतान के लिए डीजेबी ने किसी तीसरे पक्ष या व्यक्ति को अधिकृत नहीं किया है। डीजेबी के सभी आधिकारिक मैसेज लिखित नोटिस या आधिकारिक डिजिटल चैनलों के माध्यम से बताए जाते हैं। उचित सत्यापन के बिना ऐसे किसी संदेश के आधार पर कोई भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।
पुणे में भी किया जा चुका है सतर्क
पुणे नगर निगम भी इस तरह के मैसेज से सावधान रहने को कह चुका है। वहां भी लोगों को पानी का कनेक्शन कटने के चेतावनी वाले मैसेज की जानकारी मिली थी।

इसी तरह से ठग पहले बिजली बिल का कनेक्शन कटने का डर दिखाकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर चुके हैं।

इस बारे में दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली BSES की तरफ से लोगों को सावधान किया गया था।

गैस कनेक्शन डिस्कनेक्ट करने की चेतावनी वाली मैसेज भेजकर भी साइबर अपराधियों ने लोगों को फंसाने की कोशिश की थी। इस बारे में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) की तरफ से अलर्ट जारी किया गया था।
इससे पता चलता है कि साइबर अपराधियों ने पहले बिजली और गैस कनेक्शन कटने का डर दिखाकर लोगों को फंसाया। इसके बाद अब उन्होंने पानी के कनेक्शन कटने के मैसेज भेजकर ठगी की है। इनमें ठगों का तरीका एक ही है। पहले मैसेज भेजकर डराते हैं और फिर बिल का बकाया जमा करने के लिए ऐप डाउनलोड कराते हैं। इसके बाद निजी जानकारी और बैंकिंग डिटेल भरवाकर फोन या सिस्टम का एक्सेस लेकर बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं।
झारखंड से गिरफ्तार किए गए तीन जालसाज
दक्षिण पश्चिम जिले के साइबर थाने की पुलिस ने तीन जालसाजों को झारखंड से गिरफ्तार किया है। ये दिल्ली जल बोर्ड के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे थे। इनकी पहचान रवि मंडल, रमेश कुमार मंडल व महेंद्र कुमार मंडल के रूप में हुई है। ये फर्जी मोबाइल ऐप के जरिए ठगी करते थे।

एक्सपर्ट की राय
इस बारे में पूर्व आईपीएस एवं साइबर एक्सपर्ट प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि एपीके फाइल का पूरा नाम एंड्रॉइड पैकेज किट है। यह फाइल ऐप डाउनलोड करने के काम आती है। यह तो एक तरह की प्रोग्रामिंग होती है, लेकिन साइबर अपराधी मैलिशियस एपीके का इस्तेमाल करते हैं, जिसका उद्देश्य गलत होता है।
उन्होंने कहा, इस पर क्लिक करते ही एक मैलवेयर एप्लीकेशन सिस्टम में डाउनलोड हो जाती है, जिससे फोन का कंट्रोल साइबर अपराधी के हाथ में चला जाता है। अपराधी बैंक या सरकारी विभाग के नाम पर मैलिशियस एपीके फाइल भेजकर लोगों को फंसा रहे हैं। जब भी इस तरह का कोई लिंक वॉट्सऐप पर आए तो उसे डाउनलोड न करें। इस तरह की फाइलों का एक्सटेंशन एपीके होता है।
एक्सपर्ट ने बताया, अगर सरकारी विभाग का कोई ऐप डाउनलोड करना हो तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल प्ले स्टोर का इस्तेमाल करें। वेबसाइट के लिए भी आए हुए लिंक पर क्लिक न करें। उसकी स्पेलिंग चेक करें और खुद से ब्राउजर पर जाकर टाइप कर वेबसाइट पर जाएं। सरकारी विभाग इस तरह से किसी को एपीके फाइल भेजकर ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहते हैं।
त्रिवेणी सिंह ने बताया कि एपीके फाइल डाउनलोड करते ही आपके फोन का एक्सेस तो साइबर अपराधी के पास चला गया, लेकिन उसके पास आपके डेबिट कार्ड का नंबर नहीं होता है। इसके लिए वह आपसे डेबिट कार्ड का नंबर, एक्सपायरी डेट और सीवीवी मांगता है। यह पता चलते ही वह अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं।

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