Explainer: कुछ देर में सैकड़ों ईमेल भेजकर ठगी कर रहे साइबर अपराधी
साइबर ठगी के तरीके ई-मेल बॉम्बिंग या ई-मेल ब्लास्टिंग के बारे में बता रहे हैं एक्सपर्ट।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Jan 22, 2025 at 03:42 PM
- Updated: Sep 17, 2025 at 01:23 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोचिए कि किसी दिन आपका इनबॉक्स सैकड़ों या कहें कि हजारों ईमेल से भरा पड़ा हो, जिसकी वजह से आपको पिछली या जरूरी मेल के बारे में पता न चल पाए। ऐसा ही कुछ हुआ था डेटा वैज्ञानिक कैथरीन वुड के साथ। यह ईमेल बॉम्बिंग या ब्लास्टिंग उनके साथ हुई धोखाधड़ी को छुपाने के लिए की गई थी।
केस स्टडी
फोर्ब्स में 30 सितंबर 2024 को छपी रिपोर्ट के अनुसार, धोखाधड़ी की रोकथाम करने वाली एक कंपनी में डेटा वैज्ञानिक कैथरीन वुड का ईमेल इनबॉक्स अंग्रेजी, चीनी, जापानी, रूसी और पोलिश भाषा के संदेशों से भरा हुआ था। उन साइटों पर उन्होंने कभी विजिट नहीं किया था। छानबीन करने पर उन्हें पता चला कि यह सब उसके साथ हुई धोखाधड़ी को छुपाने के लिए किया गया था। दरअसल, उनके ईमेल एड्रेस और क्रेडिट कार्ड के नंबर का प्रयोग करके फोन खरीदा गया था।

कैथरीन वुड ने खुद के साथ हुई इस घटना के बारे में लिखा है, “प्रत्येक मिनट पर ईमेल आते रहे। ईमेल प्रति मिनट 10 से 12 के हिसाब से आ रहे थे। इस बीच मैंने ऑनलाइन कुछ लेख पढ़े, जिसके बाद समझ आया कि यह ‘स्पैम अटैक’, ‘ईमेल बम’ या ‘स्पैम बम’ है। इसका मकसद अक्सर अनधिकृत लेनदेन के सबूतों को छिपाना होता है।”

दैनिक जागरण की वेबसाइट पर 3 अक्टूबर 2024 को छपी रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया। आरोपी विदेशी नागरिकों से धोखाधड़ी करते थे। वे लोगों के सिस्टम पर ईमेल ब्लास्टिंग करके उनसे जुड़ते थे। नामी कंपनियों की ओर से प्रोडक्ट ऑर्डर कैंसिल होने पर रिफंड प्रोसेस के लिए फर्जी हेल्पलाइन नंबर भी बताते थे। जब यूजर उनसे जुड़ता था तो रिफंड प्रोसेस के नाम पर ऐनीडेस्क आदि एप्लीकेशन से उनका सिस्टम कंट्रोल में ले लेते थे और निजी व बैंक खातों की जानकारी चुरा लेते थे।

यूपी एसटीएफ ने लखनऊ में भी एक गैंग को दबोचा था, जो ईमेल ब्लास्टिंग या बॉम्बिंग के जरिए विदेशियों को ठगते थे। टाइम्स ऑफ इंडिया में 23 अप्रैल 2024 को छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी कॉल सेंटर चलाते थे। वे विदेशियों को ई-मेल ब्लास्टिंग के जरिए भ्रामक संदेश भेजते थे। यूजर के लैपटॉप पर विज्ञापन का पॉप अप आने के बाद वह ठगों से संपर्क करता था। आरोपी यूजर को कहते थे कि उनका सिस्टम हैक हो गया है। वह यूजर के सिस्टम को एनीडेस्क से जोड़कर उसका कंट्रोल ले लेते थे। इसके बदले में वे 100-500 डॉलर के गिफ्ट कार्ड ले लेते थे। उनको क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से भी पैसे मिलते थे। गिफ्ट कार्डों या क्रिप्टो करेंसी को वे भारत में एजेंट के माध्यम से भुनाते थे।

क्या है ईमेल बॉम्बिंग या ब्लास्टिंग?
नियंत्रक एवं महलेखापरीक्षक की वेबसाइट पर अपलोड जानकारी के अनुसार, जब किसी यूजर की मेल पर काफी बड़ी संख्या में ईमेल भेजी जाती हैं, जिसके कारण ईमेल अकाउंट या सर्वर क्रैश हो जाता है, तो उसे ईमेल बॉम्बिंग कहा जाता है।

अमेरिकी सरकार की हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज विभाग की वेबसाइट पर भी इस बारे में जानकारी दी गई है। इसमें लिखा है, इसे मेल बम या लेटर बम हमले के रूप में भी जाना जाता है। एक बॉटनेट सैकड़ों या हजारों ईमेल के साथ एक ईमेल पते या सर्वर को भर देता है। वे एक प्रकार के डिनायल ऑफ सर्विस (DoS) हमले हैं, जो ठगों को पीड़ित के मेलबॉक्स को बेकार करके एक अनजान इनबॉक्स में वैध लेनदेन और सुरक्षा संदेशों को छुपाने के मकसद से होते हैं। इनबॉक्स को ओवरलोड करके ठगों को लगता है कि पीड़ित महत्वपूर्ण ईमेल जैसे खाता साइन-इन प्रयास, संपर्क जानकारी के अपडेट, वित्तीय लेनदेन विवरण या ऑनलाइन ऑर्डर पुष्टिकरण को मिस कर देगा।

अधिकांश ठग सामान्य वेबसाइटों से वैध न्यूजलेटर साइन-अप का उपयोग करते हैं। ई-मेल ऑटोमेटेड बॉट का उपयोग करता है, जो वेब को क्रॉल करता है। यह न्यूजलेटर साइन-अप पेज या फॉर्म की खोज करता है। ठग इन कमजोर साइटों की सूची बनाए रखते हैं। ई-मेल बम का ऑर्डर देने के बाद इसे शेड्यूल कर दिया जाता है। बॉट एक यूजर को एक साथ ये मेल साइन-अप कर देगा। इससे पीड़ित के पास तुरंत हजारों ई-मेल आती हैं।
जब बड़े अटैचमेंट वाली कई ई-मेल भेजी जाती हैं, तो अटैचमेंट अटैक होता है। इन्हें सर्वर स्टोरेज स्पेस को जल्दी से ओवरलोड करने और इसे बेकार करने के लिए डिजाइन किया गया है।
डार्क वेब पर कई लोग हैं, जो किसी को भी ईमेल बम भेज सकते हैं। ये ईमेल बम के लिए ईमेल एड्रेस और शुरू करने का समय पूछते हैं। ईमेल बम के लिए अलग-अलग रेट होते हैं। हालांकि, ठग प्रति 5,000 संदेशों के लिए लगभग 15 डॉलर चार्ज करता है।

ऐसे बचें
– इस तरह का हमला होने की स्थिति में अगर कोई नंबर दिया गया है तो उस पर बात करने की कोई जरूरत नहीं है। बातचीत करने से ईमेल की बाढ़ बढ़ सकती है और स्थिति और खराब हो सकती है।
– संभावित मैलवेयर संक्रमण से बचने के लिए संदिग्ध ई-मेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट खोलने से बचना जरूरी है।
– आईटी या साइबर एक्सपर्ट की सलाह या मदद लें।
– संदिग्ध लेन-देन के लिए अपने अकाउंट्स की समीक्षा करें। बैंक, क्रेडिट कार्ड, निवेश, लॉयल्टी प्रोग्राम और अन्य की जांच करने की आवश्यकता हो सकती है।
– कोई संदिग्ध लेन-देन मिलने पर तुरंत अपने वित्तीय संस्थान को इसकी सूचना दें।
– टू फैक्टर वेरिफिकेशन को एक्टिव करना चाहिए।
– अकाउंट का पासवर्ड बदल दें और एक जटिल पासवर्ड बनाएं।
सिस्टम को भी कंट्रोल कर सकते हैं
इस बारे में साइबर एक्सपर्ट एवं इंडियन साइबर आर्मी के संस्थापक किसलय चौधरी का कहना है कि एक मेल आईडी पर प्रत्येक पांच से 10 सेकंड में एक मेल आना ईमेल बॉम्बिंग है। यह सैकड़ों की संख्या में आती हैं, लेकिन यह अलग-अलग नहीं होती हैं। मान लीजिए कि एक ही तरह की एक ईमेल की 500 कॉपियां आपके पास आ गईं तो यह ईमेल बॉम्बिंग है। जीमेल की क्षमता 15 जीबी है, इससे ज्यादा डेटा आने पर मेल काम करना बंद कर देगी। इसके जरिए ठग फिशिंग लिक्स या मैलवेयर भी भेज सकते हैं। इसमें भेजे गए नंबर पर कॉल करने से आरोपी किसी सॉफ्टवेयर के जरिए आपके सिस्टम को भी कंट्रोल में ले सकते हैं। यह जरूरी नहीं कि एक ही समय में हो। बॉट के जरिए रोजाना भी ईमेल ब्लास्टिंग हो सकती है।

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं
सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...












