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Fact Check: पीएम मोदी के 2016 के पुराने वीडियो को यूजीसी मामले से जोड़कर गलत दावे से किया जा रहा है वायरल

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि पीएम मोदी के 2016 के पुराने वीडियो को यूजीसी (UGC) मामले से जोड़कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। असल में यह बयान 2016 में तेलंगाना में एक जनसभा के दौरान दिया गया था।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर हुए विवाद के बीच सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पीएम मोदी को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “और मैंने देखा कि मेरे इन दलित एंटरप्रेन्योर्स में देश बदलने की ताकत है। मैं उनको बल दे रहा हूं, ताकत दे रहा हूं, इसके कारण कुछ लोगों को परेशानी हो रही है।” यूजर्स इस वीडियो को हालिया बताते हुए दावा कर रहे हैं कि पीएम मोदी ने यह बयान यूजीसी के नए नियमों के संदर्भ में दिया है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत पाया। वायरल हो रहा वीडियो वर्तमान का नहीं, बल्कि अगस्त 2016 का है, जिसका यूजीसी (UGC) के हालिया विवाद से कोई संबंध नहीं है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

Bihar ki awaaz‘ नाम के फेसबुक यूजर ने 30 जनवरी 2026 को वायरल रील को साझा करते हुए इसे यूजीसी विवाद से जोड़कर पेश किया। पोस्ट के साथ दावा किया गया कि पीएम मोदी ने यूजीसी को लेकर यह टिप्पणी की है।

पड़ताल

जांच की शुरुआत के लिए हमने वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स लेंस सर्च और संबंधित कीवर्ड्स के जरिए खोजा। खोज के दौरान हमें ‘ABP Majha’ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 7 अगस्त 2016 को अपलोड किया गया एक वीडियो मिला, जिसमें वायरल फुटेज से मिलते-जुलते दृश्य देखे जा सकते हैं। यहां इसे हैदराबाद का बताया गया।

इसके बाद, संबंधित कीवर्ड सर्च की मदद से हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 7 अगस्त 2016 को अपलोड हुआ यह पूरा वीडियो मिला। यह वीडियो तेलंगाना के गजवेल में आयोजित एक सार्वजनिक सभा का था। वायरल हिस्सा इस वीडियो में 12 मिनट 40 सेकंड के बाद देखा जा सकता है, जहां पीएम मोदी दलितों के खिलाफ हिंसा और दलित उद्यमियों के सशक्तीकरण पर बात कर रहे थे। स्पष्ट है कि यह वीडियो लगभग 10 साल पुराना है और इसका यूजीसी मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री से संपर्क किया। उन्होंने इस पोस्ट को फेक बताते हुए कहा, “पीएम मोदी का यह वीडियो 2016 का है। हाल में उन्होंने यूजीसी मामले को लेकर ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा पूरी तरह निराधार है।”

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नोटिस जारी किया है। ख़बरों के अनुसार चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान नए नियमों के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है और आदेश दिया है कि आगामी 19 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई तक वर्ष 2012 के रेगुलेशन ही प्रभावी रहेंगे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि नए नियमों की धारा 3C के तहत दी गई ‘भेदभाव’ की परिभाषा संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। अदालत अब इस मामले में सरकार और यूजीसी के पक्ष पर विचार करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला सुनाएगी।

वायरल पोस्ट को साझा करने वाले यूजर ‘Bihar ki awaaz’ के प्रोफाइल विश्लेषण से पता चला कि फेसबुक पर इस यूजर के 2.5 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि पीएम मोदी के 2016 के पुराने वीडियो को यूजीसी (UGC) मामले से जोड़कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है। असल में यह बयान 2016 में तेलंगाना में एक जनसभा के दौरान दिया गया था।

  • Claim Review : पीएम मोदी ने हाल ही में यूजीसी (UGC) को लेकर बयान देते हुए कहा कि वह दलित उद्यमियों को ताकत दे रहे हैं।
  • Claimed By : Facebook user 'Bihar ki awaaz'
  • Fact Check : झूठ

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