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Fact Check : दिल्‍ली पुलिस के समर्थन में नारेबाजी का वायरल वीडियो 2019 का है

दिल्‍ली पुलिस के समर्थन में वायरल वीडियो 2019 का है। इसका जहांगीरपुरी में हुई हिंसा से कोई संबंध नहीं है। विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में यह भी पता चला कि सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को हालिया समझकर अलग-अलग प्‍लेटफॉर्म पर वायरल कर रहे हैं।

  • By Vishvas News
  • Updated: April 19, 2022

नई दिल्‍ली (विश्‍वास न्‍यूज)। दिल्‍ली के जहांगीरपुरी इलाके में शोभायात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद से एक वीडियो वायरल हो रहा है। 30 सेकेंड के इस वीडियो में लोगों के हुजूम को ‘मोदी जी लठ बजाओ हम तुम्‍हारे साथ हैं…दिल्‍ली पुलिस लट्ठ बजाओ हम तुम्‍हारे साथ हैं…’ जैसे नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को दिल्‍ली हिंसा के बाद से वायरल कर रहे हैं।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की विस्‍तार से जांच की तो सच सामने आ गया। दरअसल इस वीडियो का जहांगीरपुरी से संबंध नहीं है। जांच में पता चला कि दिल्‍ली के लक्ष्‍मीनगर में 2019 में CAA के पक्ष में निकली गई रैली के पुराने वीडियो को जहांगीरपुरी हिंसा के बाद से वायरल किया जा रहा है।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर मनोज परिहार ने वायरल वीडियो को अपने अकाउंट पर अपलोड करते हुए लिखा : ‘मौका भी है…दस्तूर भी है…लट्ठ के साथ साथ दिल्ली में भी एक बुलडोजर बाबा चाहिए। #DelhiPolice #DelhiRiots2022’

फैक्ट चेक के उद्देश्य से पोस्ट में लिखी गई बातों को यहां ज्यों का त्यों पेश किया गया है। इस पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां क्लिक कर देखा जा सकता है। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी कई अन्य यूजर्स ने इसे समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की तह में जाने के लिए सबसे पहले वायरल वीडियो को ध्‍यान से देखा। इसमें भीड़ में मौजूद बहुत-से लोग स्‍वेटर, जैकेट पहने हुए नजर आए। मतलब साफ था कि यह अभी का वीडियो नहीं है। यह सर्दी के मौसम के दौरान निकाली गई किसी रैली का वीडियो है। जांच को आगे बढ़ाते हुए विश्‍वास न्‍यूज ने यूट्यूब पर जाकर नारों के आधार पर कीवर्ड बनाकर सर्च करना शुरू किया। वायरल वीडियो हमें 2019 में कई यूट्यूब चैनल पर अपलोड मिला।

पड़ताल के दौरान हमें 22 दिसंबर 2019 की तारीख को एक फेसबुक अकाउंट पर भी वायरल वीडियो का लंबा वर्जन मिला। इस वीडियो में भीड़ को सीएए के पक्ष में नारेबाजी करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो को ध्‍यान से देखने पर हमें एक दुकान पर भूटानी संस और वर्मा ज्‍वैलर्स लिखा हुआ नजर आया।

गूगल में जब हमने सर्च करना शुरू किया तो पता चला कि यह दुकान दिल्‍ली के लक्ष्‍मी नगर में हैं। जस्‍ट डायल वेबसाइट की मदद से यह जानकारी मिली। यहां साफ देखा जा सकता है कि भूटानी संस के ठीक बगल में वर्मा ज्‍वैलर्स का बोर्ड लगा है, जैसा नारेबाजी वाले वीडियो में दिखा था। इसे यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए विश्‍वास न्‍यूज ने भूटानी संस में संपर्क किया। उन्‍होंने कन्‍फर्म किया कि वायरल वीडियो उनकी दुकान के सामने का ही है। यह पुराना है।

जांच के अंत में हमने दिल्‍ली के पुराने वीडियो को अब फिर से वायरल करने वाले यूजर की जांच की। फेसबुक यूजर मनोज परिहार की सोशल स्‍कैनिंग में पता चला कि यूजर एक राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। इस अकाउंट को जनवरी 2014 में बनाया गया था। यूजर इटावा के रहने वाले हैं। वर्तमान में दिल्‍ली में रहते हैं।

निष्कर्ष: दिल्‍ली पुलिस के समर्थन में वायरल वीडियो 2019 का है। इसका जहांगीरपुरी में हुई हिंसा से कोई संबंध नहीं है। विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में यह भी पता चला कि सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को हालिया समझकर अलग-अलग प्‍लेटफॉर्म पर वायरल कर रहे हैं।

  • Claim Review : जहांगीरपुरी हिंसा के बाद का वीडियो
  • Claimed By : फेसबुक यूजर मनोज परिहार
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