X

Fact Check: आर्टिस्ट की कला को 1965 की जंग में शहीद जवान का कंकाल बताकर किया जा रहा है वायरल

  • By Vishvas News
  • Updated: January 7, 2021

नई दिल्‍ली (विश्‍वास न्‍यूज)। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक कंकाल देखा जा सकता है। तस्वीर में कंकाल के हाथ में एक बंदूक भी देखी जा सकती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि यह कंकाल 1965 पकिस्तान से युद्ध में शहीद हुए एक भारतीय जवान का है।

हमारी पड़ताल में हमने पाया कि यह दावा गलत है। असल में यह कंकाल असली नहीं है, बल्कि इसे एक आर्टिस्ट ने बनाया था।

क्‍या है वायरल पोस्‍ट में

वायरल फोटो में एक कंकाल देखा जा सकता है। तस्वीर में कंकाल के हाथ में एक बंदूक भी देखी जा सकती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि यह कंकाल “1965 पकिस्तान से युद्ध के 3 महीने बाद जब शहीद के पार्थिव शरीर मिला तो उनकी #उंगलियांबंदूकोंके_ट्रिगर पर थीं नमन हैं देश पर शहीद होने वाले वीरों को  “मेरे देश के सैनिक अमर रहे हैं! -DPS”

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां क्लिक कर देखा जा सकता है।

पड़ताल

इस पोस्ट की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले इस फोटो को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस सर्च में हमें यही तस्वीर Mustafa Uğur नाम के फेसबुक पेज पर भी मिली। इस पोस्ट में इस कंकाल को एक तुर्की के जवान का बताया गया था।

हमें यह तस्वीर feldgrau.info पर भी मिली, जहाँ इसे एक मॉडल बताया गया था। मॉडल के साथ लिखी जानकारी के अनुसार इसे Dilip Sarkar MBE नाम के आर्टिस्ट ने बनाया था।

कीवर्ड्स के साथ ढूंढ़ने पर हमें यह तस्वीर  Dilip Sarkar MBE के फेसबुक पेज पर भी 16 जनवरी 2018 को अपलोडेड मिली। पोस्ट के साथ लिखा था (अनुवादित) “एक इतिहासकार के रूप में मैं कई वर्षों से शहीद हुए दूसरे विश्व युद्ध के ‘लापता’ की पहचान करने के प्रोग्राम के साथ जुड़ा रहा हूं। हालांकि, लाखों लोग लापता हैं, पर इनके बारे में बहुत कम जानकारी मौजूद है। मैं विशेष रूप से रॉयल नीदरलैंड आर्मी रिकवरी एंड आइडेंटिफिकेशन यूनिट के साथ मिलकर काम करता हूं, जिसमें सालाना लगभग चालीस मामले जांचे जाते हैं। कुछ साल पहले, एक 19 वर्षीय पैंजर ग्रेनेडियर को अर्नहेम और निजमेगेन के बीच की रेतीली मिट्टी से बरामद किया गया था। विंटेज एयरफिक्स 1/6 स्केल के कंकाल और ड्रैगन एक्शन के आंकड़े बिट्स पर आधारित यह चित्रावली, एक मैगज़ीन के लेख के लिए बनायीं गयी थी, जिसके ज़रिये इस मुद्दे के बारे में जागरूकता बढ़ाई जानी थी।”

हमने इस विषय में Dilip Sarkar से मेल के ज़रिये संपर्क किया। उन्होंने हमारे सवाल का जवाब देते हुए लिखा “There is absolutely no truth whatsoever that the photograph is of a missing Indian soldier from the 1965 war. I am disgusted that my photograph of my model has effectively been stolen online and misrepresented in this disrespectful and insensitive way. It has certainly not been published with my knowledge or consent. It was probably found on a scale modelling Facebook page and downloaded therefrom. This is a model which I made for a feature article in the former Military Modelling magazine, highlighting the fact that millions remain missing from the Second World War in Europe, especially on the Eastern Front, from which the German authorities still recover the remains of 30,000 – 40,000 missing soldiers annually, and the Russians an equally huge amount. There are many people, officially and unofficially involved, professional and amateur, dedicated to this grim task and seeing these missing men properly buried, even oif in many cases they cannot be identified. My article, link to which below, highlighted and raised awareness of this issue. The skeleton was made from a vintage 1/6 scale Airfix plastic kit, the weapons etc are Dragon 1/6 scale. The model depicts a missing German machine-gunner, armed with a German MG42 weapon. “

जिसका हिंदी अनुवाद होता है “इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है कि यह तस्वीर 1965 के युद्ध में लापता भारतीय सैनिक की है। मुझे इस बात पर बहुत गुस्सा है कि मेरे मॉडल की तस्वीर को चुराया गया है और इस अपमानजनक और असंवेदनशील तरीके से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस तस्वीर का इस्तेमाल करने से पहले मेरी सहमति नहीं ली गयी थी। यह एक मॉडल है जिसे मैंने पूर्व सैन्य मॉडलिंग पत्रिका में एक फीचर लेख के लिए बनाया था, इस तथ्य पर प्रकाश डालने के लिए कि लाखों लोग द्वितीय विश्व युद्ध से गायब हैं। …….कंकाल एक विंटेज 1/6 स्केल एयरफिक्स प्लास्टिक किट से बनाया गया था, हथियार आदि ड्रैगन 1/6 scale हैं। मॉडल में एक जर्मन एमजी 42 हथियार से लैस एक लापता जर्मन मशीन-गनर दिखाया गया है। “

पुष्टि के लिए हमने भारतीय आर्मी पीआरओ के अरुण के साथ भी यह तस्वीर साझा की। उन्होंने कहा “यह तस्वीर भारतीय आर्मी से जुड़ी हुई नहीं है।”

इस पोस्ट को Indian Army Fans Club नाम के एक फेसबुक ने शेयर किया था। पेज के 7,451 फ़ॉलोअर्स हैं।

निष्कर्ष: हमारी पड़ताल में हमने पाया कि यह दावा गलत है। असल में यह कंकाल असली नहीं है, बल्कि इसे एक आर्टिस्ट ने बनाया था।

  • Claim Review : 1965 पकिस्तान से युद्ध के 3 महीने बाद जब शहीद के पार्थिव शरीर मिला तो उनकी उंगलियां बंदूकों के ट्रिगर पर थीं
  • Claimed By : Indian Army Fans Club
  • Fact Check : झूठ
झूठ
    फेक न्यूज की प्रकृति को बताने वाला सिंबल
  • सच
  • भ्रामक
  • झूठ

पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं

सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...

टैग्स

संबंधित लेख

Post saved! You can read it later