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Fact Check: सावरकर के नाम से वायरल हो रही वीडियो क्लिप असली नहीं है

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि, वायरल हो रहा वीडियो विनायक दामोदर सावरकर का कोई असली दुर्लभ वीडियो नहीं है। यह वीडियो वास्तव में भारत सरकार द्वारा बनाई गयी एक डॉक्युमेंट्री का हिस्सा है।

  • By Vishvas News
  • Updated: June 28, 2021

Vishvas News (नई दिल्ली): सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो एक ब्रिटिश पत्रकार द्वारा अंडमान जेल में शूट किया गया और वीडियो में दिख रहे व्यक्ति विनायक दामोदर सावरकर का मूल वीडियो हैं। पोस्ट में आगे दावा किया गया है कि दुर्लभ वीडियो अब बीबीसी द्वारा प्रसारित किया गया है। विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया।

क्या है वायरल पोस्ट में

फेसबुक यूजर चंद्रशेखर चांदोरकर ने 1 जून को फेसबुक पर 1 मिनट 39 सेकेंड की एक क्लिप साझा की और लिखा: एक ब्रिटिश पत्रकार द्वारा शूट किया गया यह दुर्लभ वीडियो, जब स्वातंत्र्यवीर सावरकर अंडमान जेल में थे। अब इसे बीबीसी द्वारा प्रसारित किया गया है। इस वीडियो में सावरकर को सेल्युलर जेल में ‘कोलू’ (तेल निकालने की मशीन) पर काम करते देखा जा सकता है।”

पोस्ट और उसके आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वीडियो क्लिप देखी। इसमें देखा जा सकता है कि इसमें ‘भूगोल’ का लोगो था न कि बीबीसी का। हमें यह वीडियो बीबीसी की सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर भी नहीं मिला।

की-फ्रेम्स पर कीवर्ड सर्च और सामान्य गूगल रिवर्स इमेज सर्च करने पर विश्वास न्यूज ने पाया कि यह वीडियो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है।

इस मंच पर अपलोड किए गए 40 मिनट 58 सेकेंड के इस वीडियो में ‘श्री विनायक दामोदर सावरकर के जीवन’ को दर्शाया गया है। वीडियो 14 अगस्त 2014 को अपलोड किया गया था।

विवरण में कहा गया है, “श्री विनायक दामोदर सावरकर एक निडर स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, लेखक, नाटककार, कवि, इतिहासकार, राजनीतिक नेता और दार्शनिक थे। सावरकर के विचार राष्ट्र निर्माण के लगभग हर पहलू को छूते हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। फिल्म में उनके जीवन की विभिन्न महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया गया है।”

वायरल क्लिप का हिस्सा इस यूट्यूब वीडियो में 25 मिनट से देखा जा सकता है।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के फिल्म डिवीजन के अनुसार, ये फिल्म प्रेम वैद्य द्वारा निर्देशित और फिल्म डिवीजन द्वारा निर्मित है। इसे साल 1983 में बनाया गया था।

इस वीडियो के बारे में अधिक जानकारी के लिए विश्वास न्यूज ने वीर सावरकर पर एक शोधकर्ता और एक लेखक, अक्षय जोग के साथ बातचीत की। अक्षय ने ‘स्वतंत्रवीर सावरकर: अक्षय अनी वास्तव’ नामक पुस्तक भी लिखी है। उन्होंने विश्वास न्यूज को बताया, “वायरल वीडियो प्रेम वैद्य द्वारा बनाई गई सावरकर पर बनी सरकारी डॉक्युमेंट्री का हिस्सा है, जब इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री थीं।”

विश्वास न्यूज ने अब वायरल वीडियो को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर का सोशल बैकग्राउंड चेक किया। हमें पता चला कि चंद्रशेखर चांदोरकर नासिक के रहने वाले हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में पाया कि, वायरल हो रहा वीडियो विनायक दामोदर सावरकर का कोई असली दुर्लभ वीडियो नहीं है। यह वीडियो वास्तव में भारत सरकार द्वारा बनाई गयी एक डॉक्युमेंट्री का हिस्सा है।

  • Claim Review : *स्वातंत्र्यवीर सावरकर अंदमान कारावासात असताना एका ब्रिटिश पत्रकाराने चित्रित केलेला हा दुर्लभ व्हिडीओ बीबीसीने प्रसारित केला आहे.* *यात त्या छोट्या कोठडीत व कोलू चालवताना सावरकर दिसत आहेत..*
  • Claimed By : Chandrashekhar Chandorkar
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