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Quick Fact Check: हवा में तैरती चट्टान की यह तस्वीर फिरसे सोशल मीडिया पर वायरल

  • By Vishvas News
  • Updated: April 10, 2020

नई दिल्‍ली विश्‍वास न्‍यूज । सोशल मीडिया पर फिरसे जमीन के ऊपर तैरती एक चट्टान की तस्वीर वायरल हो रही है। पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा गया है कि यह येरुशलम की फ्लोटिंग रॉक या हवा में तैरती चट्टान है। हमने इस तस्वीर की पहले भी पड़ताल की थी और पाया था कि यह दावा गलत है। यह तस्वीर सऊदी अरेबिया के अल ट्वाइथीर गांव की एक चट्टान की है और असली तस्वीर में यह चट्टान तीन छोटे-छोटे पत्थरों पर टिकी हुई है।

क्या हो रहा है वायरल?

Chidi Chindah नाम के फेसबुक यूजर ने वायरल पोस्ट को शेयर किया। वायरल पोस्ट में एक चट्टान देखी जा सकती है। देखने में चट्टान हवा में तैरती हुई नजर आ रही है। पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन लिखा है “येरुशलम में “फ्लोटिंग रॉक” हजारों वर्षों से हवा में तैर रहा है। कई शोधों के बाद भी इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं है! अद्भुत !!!! – अद्भुत लग रहा है।”

इस पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहाँ देखा जा सकता है।

पड़ताल

इस पोस्ट की पड़ताल करने पर हमारे हाथ 11 अगस्त 2016 को अपलोड किया हुआ एक वीडियो लगा था जिसमें इस पत्थर को दिखाया गया था। इस वीडियो को Mustansar Ali नाम के एक यूट्यूब चैनल द्वारा अपलोड किया था। यह बात वीडियो में साफ तौर पर देखी भी जा सकती है कि यह बड़ा-सा पत्थर तीन छोटे पत्थरों पर टिका हुआ है। इस वीडियो के डिस्क्रिप्शन में लिखा था “सऊदी अरब में अल हस्सा फ्लोटिंग स्टोन।”

हमें पड़ताल में पता लगा था कि ये चट्टान सऊदी अरब के अल कराह इलाके के अल ट्वाइथीर गांव में है।

ढूंढने पर हमें पता लगा कि इस चट्टान के पास अल कराह मिडिल स्कूल है। हमने इस चट्टान को लेकर ज़्यादा पुष्टि के लिए अल कराह मिडिल स्कूल के स्कूल हेड Abd al-Uzza से बात की। उन्होंने हमें बताया कि “यह चट्टान असल में तीन छोटी चट्टानों पर टिकी हुई है जो अपने आप में अचरज की बात है पर यह दावा बिल्कुल गलत है कि यह चट्टान हवा में तैर रही है।”

हमने इस तस्वीर की पहले भी पड़ताल की थी । इस पूरी पड़ताल को यहाँ पढ़ा जा सकता है।

निष्कर्ष: हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह तस्वीर गलत है। इस तस्वीर को फोटोशॉप करके ऐसा दिखाने की कोशिश की गई है कि यह चट्टान हवा में तैर रही है, जबकि असल में यह चट्टान तीन छोटी चट्टानों पर टिकी हुई है। यह तस्वीर येरुशलम की भी नहीं है। यह तस्वीर सऊदी अरेबिया के अल ट्वाइथीर गांव की है।

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