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Explainer: पाकिस्तान को फिर से FATF की ग्रे लिस्ट में रखने की मांग, जानें कैसे प्रभावित होती है अर्थव्यवस्था?

पाकिस्तान पिछले कई वर्षों तक ग्रे लिस्ट में शामिल रहा और 2022 में वह इस सूची से बाहर हुआ था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए  भारत ने कहा था कि एफएटीएफ की निगरानी की वजह से पाकिस्तान को 26/11 मुंबई हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बताते चलें कि 2021 में एफएटीएफ की अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के आरोपी और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर जकी-उर-रहमान को टेरर फंड्स का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

  • By: Abhishek Parashar
  • Published: May 15, 2025 at 04:11 PM
  • Updated: May 28, 2025 at 05:17 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के करीब दो हफ्ते बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाली जम्मू-कश्मीर (POK) में कुल नौ आतंकी शिविरों को निशाना बनाते हुए उस पर एयर स्ट्राइक किया।भारत की यह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद हुई कई असैन्य और रणनीतिक कार्रवाई के बाद हुई, जिसमें सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने समेत कई अन्य फैसले लिए गए। इस दौरान भारत की तरफ से पाकिस्तान को एक बार फिर से फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट में डाले जाने की कूटनीतिक कवायद की व्यापक चर्चा हुई। 

यूएनआई इंडिया.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले में संलिप्तता के लिए पाकिस्तान के खिलाफ अपना कूटनीतिक अभियान तेज कर दिया है तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और अन्य अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से पाकिस्तान को धनराशि उपलब्ध न कराने को कहा है। इसके अलावा भारत ने पश्चिमी देशों से पाकिस्तान को वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची में डालने को कहा है। बताते चलें कि एफएटीएफ की अगली बैठक जून महीने में प्रस्तावित है।

पाकिस्तान पिछले कई वर्षों तक ग्रे लिस्ट में शामिल रहा और 2022 में वह इस सूची से बाहर हुआ था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए  भारत ने कहा था कि एफएटीएफ की निगरानी की वजह से पाकिस्तान को 26/11 मुंबई हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

बताते चलें कि 2021 में एफएटीएफ की अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने मुंबई हमलों के आरोपी और लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशनल कमांडर जकी-उर-रहमान को टेरर फंड्स का इस्तेमाल करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

एफएटीएफ ने 27 प्वाइंट एक्शन प्लान को जारी करते हुए पाकिस्तान को 2018 में ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। यह एक्शन प्लान मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग पर रोक लगाने की कार्रवाई से संबंधित था।

अब एक बार फिर से पाकिस्तान को इस सूची में शामिल किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।

क्या है FATF?

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) वैश्विक तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग की निगरानी करने वाली संस्था है। पेरिस स्थित 40 सदस्यों वाली इस संस्था की स्थापना 1989 में हुई थी।

एफएटीएफ अपने सभी निर्णय एफएटीएफ प्लेनरी के जरिए लेता है और साल में तीन बार इसकी बैठक होती है। इस बैठक में उन देशों की जवाबदेही तय की जाती है, जो इसके मानकों का पालन नहीं करते हैं।

क्या है ग्रे और ब्लैक लिस्ट?

एफएटीएफ की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, यदि कोई देश एफएटीएफ के मानकों को लागू करने में विफल रहता है, तो उसे बढ़ी हुई निगरानी (इनक्रीज्ड मॉनिटरिंग) और अधिक जोखिम वाले क्षेत्राधिकार (हाई रिस्क ज्यूरिसडिक्शंस) में डाला जाता है और इसे ही सामान्य भाषा में ग्रे और ब्लैक लिस्ट कहा जाता है।

ब्लैक लिस्ट में वे देश शामिल हैं, जहां मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने के लिए गंभीर रणनीतिक क्षमता का अभाव होता है।

इस सूची में फिलहाल तीन देश शामिल हैं: डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया, ईरान और म्यांमार।

वहीं, बढ़ी हुई निगरानी वाले क्षेत्राधिकार, जिन्हें ग्रे लिस्ट कहा जाता है, में वे देश शामिल होते हैं जो एफएटीएफ के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग को रोकने की दिशा में काम करने के लिए जरूरी रणनीतिक क्षमता की कमजोरियों को सुधारने की कोशिश करते हैं।

यानी जब किसी देश को इस सूची में शामिल किया जाता है, तो उसका समान्य मतलब यह होता है कि ये देश सहमत समय-सीमा के भीतर पहचानी गई रणनीतिक कमियों को तेजी से दूर करने की दिशा में काम करेंगे।

सामान्य शब्दों में समझें तो वे तय समय सीमा के भीतर उन उपायों को लागू करेंगे, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग पर नकेल कसी जा सके।

ग्रे लिस्ट में शामिल देशों के नाम हैं, अल्जीरिया, अंगोला, बुल्गारिया, बुरकिना फासो, कैमरन, कोत दिव्वार (पुराना नाम आईवरी कोस्ट), क्रोएशिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कॉन्गो, हैती, केन्या, लाओस, लेबनान, माली, मोनैको, मोजाम्बिक, नामीबिया, नेपाल, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण सूडान, सीरिया, तंजानिया, वेनेजुएला, वियतनाम और यमन।

(Source: FATF आंकड़ें 21 फरवरी 2025 तक के हैं.)

एफएटीएफ की प्रेसिडेंट एलिसा डी एंडा मादराजो हैं और बतौर प्रेसिडेंट उनका कार्यकाल 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच होगा। इनसे पहले सिंगापुर के टी राजा कुमार एफएटीएफ के प्रेसिडेंट थे।

वहीं, एफएटीएफ के वाइस प्रेसिडेंट जेरेमी वेल हैं।

ग्रे लिस्ट में शामिल होने का आर्थिक खमियाजा

2021 में लिखे गए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पेपर के मुताबिक, ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद कैपिटल इनफ्लो औसतन जीडीपी का 7.6 प्रतिशत तक घट जाता है।

इस पेपर के मुताबिक, ग्रे लिस्ट में शामिल होने वाले देश में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में जीडीपी के मुकाबले तीन प्रतिशत और पोर्टफोलियो निवेस में जीडीपी के मुकाबले 2.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, अन्य निवेश में भी गिरावट आई, जो जीडीपी के मुकाबले 3.6 फीसदी तक की कमी है।

जैसा कि ऊपर बताया गया कि एफएटीएफ अपने फैसले एफएटीएफ प्लेनरी के जरिए लेता है और इसकी साल में तीन बार बैठक होती है। एफएटीएफ की यह बैठक अमूमन अक्तूबर, फरवरी और जून महीने में होती है। इस लिहाज से एफएटीएफ की आगामी बैठक जून में होगी।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस मामले को लेकर हमने अर्थशास्त्री अरुण कुमार से संपर्क किया। उन्होंने कहा, “किसी देश के एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल होने का आर्थिक संदर्भ यह है कि उस देश की सॉवरेन रेटिंग प्रभावित हो सकती है और कर्ज जुटाने के मामले में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।”

उन्होंने कहा, हमें यह ध्यान रखना होगा कि पाकिस्तान के मामले में केवल एफएटीएफ में होने वाली कार्रवाई बहुत असरदार नहीं हो सकती है क्योंकि उसे चीन और अमेरिका का समर्थन हासिल है और यही वजह है कि उसे आईएमएफ से मदद मिल गई। लेकिन यह जरूर है कि जब कोई देश ग्रे लिस्ट में शामिल होता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए निवेश करने के मामले में यह एक फैक्टर जरूर होता है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय  मुद्रा कोष (आईएमएफ) की अप्रैल की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में पाकिस्तान की जीडीपी वृद्धि दर 2.6 फीसदी रहने की उम्मीद है, जबकि इसी वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.2 फीसदी  रहने की उम्मीद है।

बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों की विस्तृत जानकारी प्रदान करती एक्सप्लेनर रिपोर्ट को विश्वास न्यूज के एक्सप्लेनर सेक्शन में पढ़ा जा सकता है।

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