Fact Check: सिंगापुर में कोविड-19 मरीज के पोस्टमॉर्टम का दावा फेक
सिंगापुर में कोरोना के किसी मरीज का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है। सिंगापुर हेल्थ मिनिस्ट्री की तरफ से इन दावों को झूठ बताया गया था।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: May 29, 2025 at 04:48 PM
- Updated: Jun 4, 2025 at 04:50 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। देश में फिर से कोरोना की दस्तक के साथ ही इससे जुड़ी पोस्ट वायरल होने लगी हैं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक पोस्ट में दावा किया गया कि सिंगापुर में कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति के शव का पोस्टमॉर्टम किया गया, जिसमें पता चला कि यह एक वायरस नहीं, बल्कि बैक्टीरिया है। पोस्ट में इस जानकारी का सोर्स स्वास्थ्य मंत्रालय को बताया गया है।
विश्वास न्यूज की जांच में वायरल दावा फेक निकला। जून 2021 में सिंगापुर हेल्थ मिनिस्ट्री ने इस मैसेज को फेक बताते हुए स्पष्ट किया था कि सिंगापुर ने ऐसे किसी शव का परीक्षण नहीं किया है।
वायरल पोस्ट
विश्वास न्यूज के टिपलाइन नंबर 9599299372 पर एक यूजर ने इस पोस्ट का भेजकर इसकी सच्चाई बताने का अनुरोध किया।

फेसबुक यूजर Pankaj Mishra ने भी 29 मई को एक पोस्ट (आकाईव लिंक) शेयर की है। इसमें लिखा है,
“सिंगापुर कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति के शव का पोस्टमार्टम करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
गहन जांच के बाद पता चला कि कोविड-19 वायरस के रूप में नहीं, बल्कि एक बैक्टीरिया के रूप में मौजूद है, जो विकिरण के संपर्क में आता है और खून में थक्का जमने से इंसान की मौत का कारण बनता है। पाया गया कि कोविड-19 बीमारी के कारण इंसान में खून के थक्के जम जाते हैं, जिससे नसों में खून जम जाता है, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है; क्योंकि दिमाग, दिल और फेफड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे लोग जल्दी मर जाते हैं। सांस लेने की शक्ति कम होने का कारण जानने के लिए सिंगापुर के डॉक्टरों ने डब्ल्यूएचओ प्रोटोकॉल को नहीं माना और कोविड-19 का पोस्टमार्टम कर दिया। डॉक्टरों ने हाथ, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों को खोलकर ध्यान से जांच की, तो उन्होंने देखा कि रक्त वाहिकाएं फैली हुई थीं और खून के थक्कों से भरी हुई थीं, जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो रहा था और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह भी कम हो रहा था, जिससे मरीज की मौत हो रही थी। इस शोध के बारे में जानने के बाद सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 उपचार प्रोटोकॉल में तुरंत बदलाव किया और अपने पॉजिटिव मरीजों को एस्पिरिन 100mg और इमरोमैक देना शुरू कर दिया। नतीजतन, मरीज ठीक होने लगे और उनकी सेहत में सुधार होने लगा। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक दिन में 14,000 से ज़्यादा मरीजों को निकालकर घर भेज दिया।
वैज्ञानिक खोज के दौर के बाद, सिंगापुर के डॉक्टरों ने उपचार की विधि को यह कहकर समझाया कि यह बीमारी एक वैश्विक धोखा है, “यह कुछ और नहीं बल्कि इंट्रावैस्कुलर कोएगुलेशन (रक्त के थक्के) और उपचार की एक विधि है। एंटीबायोटिक गोलियाँ सूजनरोधी और एंटीकोआगुलंट्स (एस्पिरिन) लें। यह दर्शाता है कि बीमारी ठीक हो सकती है।
सिंगापुर के अन्य वैज्ञानिकों के अनुसार, वेंटिलेटर और गहन देखभाल इकाई (आईसीयू) की कभी ज़रूरत नहीं पड़ी। इस उद्देश्य के लिए प्रोटोकॉल सिंगापुर में पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं। चीन को यह पहले से ही पता है, लेकिन उसने कभी अपनी रिपोर्ट जारी नहीं की। अपने परिवार, पड़ोसियों, परिचितों, दोस्तों और सहकर्मियों के साथ यह जानकारी साझा करें ताकि वे कोविड-19 के डर को दूर कर सकें और महसूस कर सकें कि यह कोई वायरस नहीं है, बल्कि एक बैक्टीरिया है जो केवल विकिरण के संपर्क में आया है। केवल बहुत कम प्रतिरक्षा वाले लोगों को ही सावधान रहना चाहिए। यह विकिरण सूजन और हाइपोक्सिया का कारण भी बनता है। पीड़ितों को एस्प्रिन-100mg और एप्रोनिक या पैरासिटामोल 650mg लेना चाहिए।
स्रोत : – सिंगापुर स्वास्थ्य मंत्रालय।“

पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने सबसे पहले कीवर्ड से इस बारे में गूगल पर सर्च किया। सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के फेसबुक पेज पर 7 जून 2021 को एक पोस्ट की गई है। इसमें लिखा है,
“हमें एक ऐसे वायरल मैसेज के बारे में जानकारी मिली है, जिसमें दावा किया गया है कि सिंगापुर ने एक COVID-19 के मरीज के शव का परीक्षण किया है और उपचार प्रोटोकॉल में कथित बदलाव किए है। इस मैसेज को सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया गया है। यह सच नहीं है।
तथ्य- सिंगापुर ने ऐसे किसी शव का परीक्षण नहीं किया है। मैसेज में COVID-19 संक्रमण के पैथोफिज़ियोलॉजी के बारे में गलत जानकारी दी गई है, जो वर्तमान सबूतों से पुष्ट नहीं होती है। यह मैसेज पहले सिंगापुर के बजाय रूस के दावे से वायरल हो चुका है, वह भी झूठा पाया गया था।
हम लोगों से आग्रह करते हैं कि वे निराधार जानकारी न फैलाएं, जिससे लोगों में चिंता पैदा हो सकती है।”

स्ट्रेट टाइम्स की वेबसाइट पर भी इससे संबंधित खबर को देखा जा सकता है।
7 सितंबर 2021 को पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट की तरफ से इस तरह के मैसेज को फेक बताया गया था। इसमें यह भी जानकारी दी गई थी कि कोविड 19 वायरस है, बैक्टीरिया नहीं। इसे एस्पिरिन जैसी एंटीकोएगुलंट्स से ठीक नहीं किया जा सकता।
एंटीकोएगुलंट्स ऐसी दवाएं हैं, जो रक्त के थक्कों को रोकने में मदद करती हैं। इन्हें उन लोगों को दिया जाता है, जिनमें थक्के बनने का जोखिम अधिक होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वेबसाइट पर दिया गया है कि COVID-19 बैक्टीरिया से नहीं, बल्कि वायरस से होता है। COVID-19 का कारण बनने वाला वायरस कोरोनाविरिडे नामक वायरस के परिवार से है। एंटीबायोटिक्स वायरस के खिलाफ काम नहीं करते हैं। कुछ लोग जो COVID-19 से बीमार हो जाते हैं, उनमें जटिलता के रूप में बैक्टीरियल संक्रमण भी हो सकता है। इस मामले में, एक्सपर्ट द्वारा एंटीबायोटिक्स की सिफारिश की जा सकती है।

इस मामले में हमने सिंगापुर हेल्थ मिनिस्ट्री से मेल के जरिए संपर्क किया। उनका कहना है, हमें हाल ही में फिर से वायरल हुए एक पुराने फेक मैसेज के बारे में जानकारी है। इसमें झूठा दावा किया गया है कि सिंगापुर दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है, जिसने कोविड-19 मरीज के शव का पोस्टमार्टम किया और पाया कि कोविड-19 वायरस के रूप में नहीं बल्कि एक बैक्टीरिया के रूप में मौजूद है। यह मैसेज पहली बार 2021 में वायरल हुआ था। जैसा कि मंत्रालय ने 2021 में स्पष्ट किया था कि सिंगापुर ने ऐसे किसी शव का परीक्षण नहीं किया है। यह भी सच नहीं है कि कोविड-19 एक बैक्टीरिया के कारण होता है।
वहीं, सिंगापुर के ‘द बिजनेस टाइम्स’ के वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि 2021 में हेल्थ मिनिस्ट्री ने इस दावे को झूठ बता दिया था।
29 मई को दैनिक जागरण की वेबसाइट पर छपी खबर के अनुसार, देश में सक्रिय मामलों की संख्या 1252 हो गई है, जबकि कुल मृतकों की संख्या 13 पहुंच गई है। सबसे ज्यादा 430 केस केरल में मिले हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 325 केस हैं।

कोरोना को लेकर गलत पोस्ट करने वाले यूजर की प्रोफाइल को हमने चेक किया। यूजर के करीब 10 हजार फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: सिंगापुर में कोरोना के किसी मरीज का पोस्टमॉर्टम नहीं हुआ है। सिंगापुर हेल्थ मिनिस्ट्री की तरफ से इन दावों को झूठ बताया गया था।
- Claim Review : सिंगापुर में कोविड-19 से संक्रमित व्यक्ति के शव का पोस्टमार्टम किया गया
- Claimed By : FB User- Pankaj Mishra
- Fact Check : झूठ
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