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Fact Check : गुजरात सरकार के फरमान के नाम पर शेयर की गई 2018 की पुरानी खबर, भ्रामक है वायरल पोस्‍ट

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। दरअसल वर्ष 2018 की एक खबर को अब गलत संदर्भ के साथ वायरल करके झूठ फैलाया जा रहा है।

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्‍लेटफॉर्म पर जनसत्ता की एक खबर का स्‍क्रीनशॉट शेयर करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधाा जा रहा है। इस खबर में बताया गया कि बच्‍चों को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए पंक्चर सही करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इस खबर को काफी वायरल किया जा रहा है।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। दरअसल वर्ष 2018 की एक खबर को अब गलत संदर्भ के साथ वायरल करके झूठ फैलाया जा रहा है। हाल-फिलहाल में ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। उस वक्‍त गुजरात में विजय रूपाणी मुख्‍यमंत्री थे, जिनका कुछ समय पहले ही प्‍लेन क्रैश में निधन हो चुका है।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर Rejaul Makshud ने आठ जुलाई को जनसत्ता के नाम से वायरल एक खबर का स्‍क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें दावा किया गया कि गुजरात सरकार का फ़रमान : 6 से 8 तक के बच्चों को अब स्कूल में पंचर बनाना सिखाया जाएगा।

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की सच्‍चाई जानने के लिए सबसे पहले गूगल ओपन सर्च टूल का इस्‍तेमाल किया। हमें सर्च के दौरान जनसत्ता डॉट कॉम पर असली खबर मिली। इसे 25 मई 2018 को प्रकाशित किया गया। कई साल पुरानी इस खबर में लिखा गया, “गुजरात सरकार का एक फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए टॉयर का पंक्चर सही करने की ट्रेनिंग देने का फैसला हुआ है। इस बाबत शासन ने बाल मेला आयोजन की तैयारी की है। जिसका आधिकारिक पत्र भी जारी किया गया है। सोशल मीडिया पर इस पत्र को लेकर लोग मौज ले रहे हैं। कह रहे हैं कि पकौड़ा के बाद अब पंक्चर बनाना सरकार सिखाने जा रही है। दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में खबर के पीछे शासन की ओर से जारी आदेश का हवाला दिया गया है। जिसके मुताबिक, कक्षा पांचवीं तक के प्राथमिक स्कूलों में बाल मेला और जूनियर हाईस्कूल यानी छठी से आठवीं कक्षा वाले स्कूलों में जीवनकौशल मेले का आयोजन होगा। जीवकौशल मेले के तहत कई चीजें जूनियर हाईस्कूल के छात्रों को सिखाई जाएंगी। इसमें टायर का पंक्चर बनाना, फ्यूज बांधना, कील लगाने, कुकर बंद करने आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी।”

विश्‍वास न्‍यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण, गुजरात के वरिष्‍ठ संवाददाता शत्रुघ्न शर्मा से संपर्क किया। उन्‍होंने बताया कि वर्ष 2018 में गुजरात सरकार ने स्कूली छात्रों में कौशल विकास कार्यक्रम का परिपत्र जारी किया था। उसमें इस तरह के काम सिखाकर आत्मनिर्भर बनाने की बात थी। वायरल पोस्‍ट में इस्‍तेमाल की गई खबर पुरानी है।

जांच के अंत में फेसबुक यूजर की जांच की गई। इसे पांच हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर जमशेदपुर का रहने वाला है।

निष्‍कर्ष : विश्‍वास न्‍यूज की जांच में वायरल पोस्‍ट भ्रामक साबित हुई। वर्ष 2018 में स्‍कूली छात्रों को जीवनकौशल मेले के तहत कई चीजें सीखाने की बात कही गई थी। इसमें पंचर बनाना भी शामिल था। 2018 की पुरानी खबर को अब 2025 में पोस्‍ट करके झूठ फैलाया जा रहा है।

  • Claim Review : गुजरात सरकार का फ़रमान : 6 से 8 तक के बच्चों को अब स्कूल में पंचर बनाना सिखाया जाएगा।
  • Claimed By : FB user Rejaul Makshud
  • Fact Check : भ्रामक

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