Explainer: नकली नोटों की चुनौती और बैंक धोखाधड़ी का बदलता चेहरा, जानें RBI रिपोर्ट के अहम खुलासे!
आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में बैंक आधारित धोखाधड़ी के मामलों का विश्लेषण यह बताता है कि निजी क्षेत्र के बैंकों ने धोखाधड़ी के अधिक मामलों की सूचना दी, वहीं नुकसान की रकम के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी अधिक रही। 2023-24 में जहां धोखाधड़ी के कुल मामलों की संख्या 36,060 और इसमें शामिल रकम 12,330 करोड़ रुपये रही। 2024-25 में धोखाधड़ी के मामलों में कमी आई और यह संख्या घटकर 23,953 हो गई लेकिन धोखाधड़ी में नुकसान रकम की मात्रा पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये हो गई।
- By: Abhishek Parashar
- Published: Jun 2, 2025 at 07:52 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद 2023-24 में भारत की अर्थव्यवस्था ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया और 2024-25 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की यह आर्थिक वृद्धि दर उत्साहजनक है, हालांकि, यह 2023-24 की 9.2 फीसदी की आर्थिक वृद्धि की तुलना में चार साल का निचला स्तर होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 और 2025 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं (एई) की वृद्धि दर 2024 में पिछले साल के 1.6 फीसदी के मुकाबले 1.7 फीसदी रहने की उम्मीद है। वहीं, उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) की वृद्धि दर 4.2 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो पिछले साल की 4.3 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले मामूली रूप से कम है।
गौरतलब है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ईएमडीई की श्रेणी में आती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की घेरलू अर्थव्यवस्था का परिदृश्य बेहतर है, जिसकी वजह वृहद आर्थिक फंडामेंटल्स की मजबूती, तेजी से विकसित होता वित्तीय और कॉरपोरेट क्षेत्र और मजबूत एक्सटरनल सेक्टर है। राजकोषीय स्थिति को लगातार बेहतर करने की कोशिश और निवेश और खपत को बढ़ावा देते उपभोक्ता व व्यावसायिक रुझान के साथ सरकार की तरफ से लगातार किया जा रहा पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है।
कुल मिलाकर भारतीय अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक आर्थिक स्थिति और उतार-चढ़ाव वाले वित्तीय माहौल के बीच दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

आईएमएफ के मुताबिक, 2025 और 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर क्रमश: 6.2 और 6.3 फीसदी रहने का अनुमान है, वहीं चीन की आर्थिक वृद्धि दर क्रमश: 4.0 और 4.0 फीसदी रहने का अनुमान है।
गोल्ड रिजर्व में इजाफा
सोना आरबीआई की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों में से एक है और 31 मार्च 2025 तक आरबीआई का कुल गोल्ड भंडार 879.58 मीट्रिक टन रहा, जो 31 मार्च 2024 के 822.10 मीट्रिक टन के मुकाबले 57.48 मीट्रिक टन अधिक है।
बैंकिंग विभाग की परिसंपत्ति के रूप में रखे गए सोने (गोल्ड डिपॉजिट सहित) का मूल्य 31 मार्च, 2024 को 2,74,714.27 करोड़ रुपये से 57.12 प्रतिशत बढ़कर 31 मार्च, 2025 को 4,31,624.80 करोड़ रुपये हो गया। यह इजाफा 54.13 मीट्रिक टन सोने की वृद्धि, सोने की कीमत में इजाफा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट की वजह से है।

कुल गोल्ड रिजर्व में से जहां 200.60 मीट्रिक टन भारत में रखा गया है, वहीं 367.60 मीट्रिक टन सोना विदेश में रखा गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 24 में आरबीआई ने पोलैंड और तुर्की के बाद सबसे ज्यादा गोल्ड की खरादीरी की है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के अर्थशास्त्रियों की लिखी रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआई की तरफ से गोल्ड की भारी खरीदारी की वजह फॉरेक्स होल्डिंग में विविधता लाना और उतार-चढ़ाव वाले वित्तीय माहौल में सुरक्षित बफर का निर्माण करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में भी आरबीआई के गोल्ड होल्डिंग को बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
बैंक धोखाधड़ी – संख्या घटी, लेकिन नुकसान की रकम बढ़ी
आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में बैंक आधारित धोखाधड़ी के मामलों का विश्लेषण यह बताता है कि निजी क्षेत्र के बैंकों ने धोखाधड़ी के अधिक मामलों की सूचना दी, वहीं नुकसान की रकम के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी अधिक रही।
संख्या के लिहाज से देखें तो डिजिटल पेमेंट (कार्ड/इंटरनेट) की श्रेणी में सर्वाधिक धोखाधड़ी के मामले सामने आए, वहीं नुकसान की रकम के आधार पर देखें तो लोन सर्वाधिक प्रभावित श्रेणी रहा।

2023-24 में जहां धोखाधड़ी के कुल मामलों की संख्या 36,060 और इसमें शामिल रकम 12,330 करोड़ रुपये रही। 2024-25 में धोखाधड़ी के मामलों में कमी आई और यह संख्या घटकर 23,953 हो गई लेकिन धोखाधड़ी में नुकसान रकम की मात्रा पिछले साल के मुकाबले बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये हो गई।
2024-25 में धोखाधड़ी की रकम में जो बढ़ोतरी दिखी, उसकी मुख्य वजह पहले के वित्त वर्षों में रिपोर्ट किए गए 122 मामलों (जिनमें 18,674 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल था) को अब धोखाधड़ी की श्रेणी से हटा दिया गया है। इन मामलों को सुप्रीम कोर्ट के 27 मार्च 2023 के फैसले के आधार पर दोबारा जांचा गया और उसे फिर से चालू वित्त वर्ष में नए सिरे से रिपोर्ट किया गया है।
निजी बैंकों में कार्ड/इंटरनेट से होने वाली धोखाधड़ी के मामले सबसे ज्यादा थे, जबकि सरकारी बैंकों में धोखाधड़ी ज्यादातर लोन से जुड़े मामलों में हुई।
500 रुपये के नकली नोटों में भारी इजाफा
2024-25 में बैंकिंग सेक्टर में पकड़े गए नकली नोटों में 4.7 फीसदी नोट आरबीआई ने पकड़ा। 10, 20, 50, 100 और 2000 रुपये के नकली नोटों की संख्या में 2024-25 में गिरावट आई, वहीं 200 और 500 रुपये की श्रेणी में नकदी नोटों की संख्या में क्रमश: 14 फीसदी और 37 फीसदी की उछाल देखने को मिली।

2023-24 में जहां 500 रुपये की करेंसी में कुल 85,711 नकली नोट पकड़े गए, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1,18 लाख गई।
विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल
2024 के मुकाबले 2025 में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में उछाल दर्ज किया गया है। आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2024 तक भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व) 646.41 अरब डॉलर था, जो 31 मार्च 2025 तक बढ़कर 668.33 अरब डॉलर हो गया।

भारत में FDI (इक्विटी) के शीर्ष स्रोत देश
आरबीआई की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में जहां भारत में सर्वाधिक एफडीआई सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका, नीदरलैंड्स और यूएई रहा। भारत में आए कुल एफडीआई में इन स्रोतों की हिस्सेदारी तीन-चौथाई रही। वहीं, जिन क्षेत्रों को सर्वाधिक एफडीआई मिला, उनमें सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिसिटी और अन्य एनर्जी, रिटेल एंड होलसेल ट्रेड और ट्रांसपोर्ट था।

डीपीआईआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सर्विस सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 55% है। अर्थव्यवस्था में इतनी बड़ी हिस्सेदारी के बावजूद सर्विस सेक्टर में कीमतों के उतार-चढ़ाव को मापने के लिए किसी प्राइसिंग इंडेक्स का अभाव बना हुआ है।
यूनाइटेड नेशंस कॉन्फ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) के मुताबिक, भारत वैश्विक तौर पर एफडीआई का उभरता हुआ केंद्र है।

गौरतलब है कि पिछले 10 वित्तीय वर्षों में भारत में एफडीआई दोगुना हो चुका है। डीपीआईआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 2004-14 के बीच भारत में कुल 304.06 बिलियन डॉलर की एफडीआई आई, जो 2014-24 के बीच 120 फीसदी बढ़कर 667.74 बिलियन डॉलर हो गई। यह पिछले 24 वर्षों में भारत में आए कुल एफडीआई (991.32 बिलियन डॉलर) का करीब 67 फीसदी हिस्सा है।
बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़े अन्य मामलों की विस्तृत जानकारी प्रदान करती एक्सप्लेनर रिपोर्ट को विश्वास न्यूज के एक्सप्लेनर सेक्शन में पढ़ा जा सकता है।
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