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Fact Check: ब्रेड से कैंसर का ‘खतरा’ के दावे वाली CSE की रिपोर्ट 2016 की है, हाल का बताकर किया जा रहा शेयर

सीएसई की 2016 की रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित न्यूज बुलेटिन को हालिया संदर्भ में भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 2016 में सीएसई के हवाले से दावा किया गया था कि उसकी स्टडी रिपोर्ट में 84 फीसदी सैंपल जांच में फेल साबित हुए और उनमें हानिकारक रसायन पोटैशियम ब्रोमेट और आयोडेट जैसे केमिकल्स  या रसायनों की मौजूदगी पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ये वो रसायन हैं, जिनसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स हिंदी न्यूज चैनल आज तक के वीडियो बुलेटिन के क्लिप को शेयर कर रहे हैं। इस बुलेटिन में सीएसई के हवाले से दावा किया गया है कि उसकी स्टडी रिपोर्ट में 84 फीसदी सैंपल जांच में फेल साबित हुए और उनमें हानिकारक रसायन पोटैशियम ब्रोमेट और आयोडेट जैसे केमिकल्स या रसायनों की मौजूदगी पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ये वो रसायन हैं, जिनसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। वीडियो क्लिप को पिछले कुछ दिनों से लगातार शेयर किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि यह हाल की रिपोर्ट है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को भ्रामक पाया। वायरल हो रहा वीडियो हाल का नहीं, बल्कि 2016 का है, जब सीएसई ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि दिल्ली में बेची जाने वाली ब्रेड में पोटैशियम ब्रोमेट/आयोडेट के अंश मिले है। रिपोर्ट के मुताबिक, पोटैशियम ब्रोमेट को श्रेणी 2बी कार्सिनोजेन (कैंसर को पैदा करने वाला) में रखा जाता है, जो अधिकांश देशों में प्रतिबंधित है। हालांकि, भारत में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

गौरतलब है कि 21 फरवरी 2018 में एफएसएसएआई ने विनिर्मताओं या मैन्युफैक्चर्स को एडिटिव के तौर पर खाद्य उत्पादों में पोटैशियम ब्रोमेट का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था।

क्या है वायरल?

सोशल मीडिया यूजर ‘जी के बोहरा पार्थसारथी’ ने वायरल वीडियो क्लिप (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, “*ब्रेड जिसे पाव रोटी, डबल रोटी के नाम से बेची जाती हैं, वह कितनी घातक है, कृपया सावधान हो जायँ।*

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट।

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो क्लिप को समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

वायरल वीडियो क्लिप के आधार पर की-वर्ड सर्च करने पर हमें आज तक के आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल पर ऑरिजिनल रिपोर्ट मिली, जिसमें 2016 में शेयर किया गया है।

24 मई 2016 की यह रिपोर्ट सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरन्मेंट (सीएसई) की स्टडी पर आधारित है, जिसमें दिल्ली से एकत्रित किए गए 84 प्रतिशत ब्रेड और बेकरी के नमूनों में पोटैशियम ब्रोमेट, पोटेशियम आयोडेट या दोनों के अवशेष मिलने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, पोटैशियम आयोडेट से थायरॉयड संबंधी समस्या हो सकती हैं, जिससे ऑटोइम्यून थायरॉयडिटिस की घटना बढ़ती है और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

ऑरिजिनल वीडियो रिपोर्ट में इस जांच अध्ययन के सामने आने के बाद तत्कालीन सरकार की तरफ से जांच के आदेश दिए गए थे। उस वक्त के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए लोगों से पैनिक न होने की अपील करते हुए कहा था कि उन्होंने इस मामले में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) को जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया था।

साथ ही इस रिपोर्ट में हमें सीएसई के हेड के तौर पर चंद्रभूषण का बयान मिला, जो अब सीएसई के साथ जुड़े हुए नहीं हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की 20 सितंबर 2019 की न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, 22 सालों तक सीएसई तक जुड़े रहने के बाद चंद्र भूषण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

लिंक्डइन की प्रोफाइल के मुताबिक, चंद्र भूषण फिलहाल इंटरनेशनल  फोरम फॉर एन्वायरन्मेंट सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आईफॉरेस्ट) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं।

सर्च में हमें सीएसई की वेबसाइट पर ऑरिजिनल स्टडी रिपोर्ट मिली, जिसे  23 मई 2016 को प्रकाशित किया गया है। इसी रिपोर्ट के आधार पर उस वक्त कई समाचार संगठनों ने इस स्टडी के निष्कर्षों को प्रकाशित किया था। अन्य न्यूज रिपोर्ट्स को यहां और यहां देखा जा सकता है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की 26 मई 2016 की रिपोर्ट में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तत्कालीन डायरेक्टर एम सी मिश्रा का बयान मिला, जिसमें उन्होंने ब्रेड में पोटैशियम ब्रोमेट और पोटैशियम आयोडेट की मौजूदगी को लेकर लोगों से नहीं घबराने की अपील की थी।

उन्होंने कहा, “इसमें कुछ खतरा हो सकता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति रोजाना ब्रेड के पूरे पैकेट को नहीं खाता है…अधिकांश लोग एक या दो ब्रेड रोजाना खाते हैं, इसलिए लंबे समय में इसे लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है, जैसा कि एफएसएसएआई  भी कह चुका है।”

21 फरवरी 2018 में एफएसएसएआई ने विनिर्मताओं या मैन्युफैक्चर्स को एडिटिव के तौर पर खाद्य उत्पादों में पोटैशियम ब्रोमेट का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था।

वायरल वीडियो क्लिप को लेकर हमने इंडिया टुडे के फैक्ट चेक के एग्जीक्यूटिव  एडिटर बाल कृष्ण से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि यह 2016 की रिपोर्ट है। वायरल वीडियो को शेयर करने वाले यूजर की प्रोफाइल से विचारधारा विशेष से प्रेरित सामग्री को शेयर किया जाता रहा है।

निष्कर्ष: सीएसई की 2016 की रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित न्यूज बुलेटिन को हालिया संदर्भ में भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। 2016 में सीएसई के हवाले से दावा किया गया था कि उसकी स्टडी रिपोर्ट में 84 फीसदी सैंपल जांच में फेल साबित हुए और उनमें हानिकारक रसायन पोटैशियम ब्रोमेट और आयोडेट जैसे केमिकल्स  या रसायनों की मौजूदगी पाई गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ये वो रसायन हैं, जिनसे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।

  • Claim Review : CSE की रिपोर्ट का दावा, ब्रेड खाने से हो सकता है कैंसर।
  • Claimed By : FB User-जी के बोहरा पार्थसारथी
  • Fact Check : भ्रामक

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