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Fact Check: धातु के पहियों वाले ट्रैक्टर की यह तस्वीर भारत की नहीं, किसान आंदोलन से नहीं है कोई संबंध

  • By Vishvas News
  • Updated: February 4, 2021

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज़)। सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हो रहा है, जिसमें एक ट्रैक्टर के धातु से बने पहियों को देखा जा सकता है। इस तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि सरकार द्वारा सड़कों पर कीलें लगाने का जवाब देने के लिए किसानों ने ये नया ट्रैक्टर बनाया है।

Vishvas News की जांच में दावा फर्जी निकला। यह फोटो 2013 से इंटरनेट पर मौजूद है। इसका किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है।

क्याल हो रहा है वायरल

फेसबुक पर ‘Ghulam Rasool Rizvi’ नाम के यूजर ने इस ट्रैक्टर की तस्वीर को शेयर किया और साथ में लिखा, “किसानों ने निकाला कीलों का तोड़।”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

हमने इस तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज टूल में अपलोड करके सर्च किया। हमें Bontrager Entertainment नाम के एक यूट्यूब चैनल पर 27 जून 2013 को एक वीडियो अपलोडेड मिला, जिसके थंब इमेज में इस वायरल इमेज का इस्तेमाल किया गया था। वीडियो को पूरा देखने पर इस ट्रैक्टर को देखा जा सकता है। वीडियो के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा था, “Brief history of farming and reason for using steel wheels by the Horse & Buggy Mennonites of New York.”

हमने कीवर्ड सर्च से ढूंढ़ने की कोशिश की कि क्या किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहे किसानों ने ऐसा कोई ट्रैक्टर बनाया है। हमें कहीं भी ऐसी कोई खबर नहीं मिली।

इसके बाद हमने हमारे सहयोगी दैनिक जागरण के संवाददाताओं से संपर्क किया, जो अलग-अलग स्थानों पर किसानों के प्रदर्शन को कवर कर रहे हैं। सिंधु बॉर्डर कवर कर रहे संवाददाता सोनू राणा और टिकरी बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे भगवान झा ने पुष्टि की कि वायरल तस्वीर जैसा कोई ट्रैक्टर उन्होंने यहाँ नहीं देखा है।

वायरल दावे को साझा करने वाले फेसबुक यूजर ‘Ghulam Rasool Rizvi’ के अकाउंट की सोशल स्कैनिंग से पता चला कि प्रोफ़ाइल के 15,814 फ़ॉलोअर्स हैं।

निष्कर्ष: Vishvas News की जांच में दावा फर्जी निकला। यह फोटो 2013 से इंटरनेट पर मौजूद है। इसका किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है।

  • Claim Review : सरकार द्वारा सड़कों पर कीलें लगाने का जवाब देने के लिए किसानों ने ये नया ट्रैक्टर बनाया है
  • Claimed By : Ghulam Rasool Rizvi
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