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Quick Fact Check: भगवान का भेजा दुर्लभ फूल नहीं है ये, फर्जी दावा फिर हुआ वायरल

  • By Vishvas News
  • Updated: October 23, 2020

नई दिल्ली (विश्वास टीम)। सोशल मीडिया पर एक अलग-से दिखने वाले फूल की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि यह फूल भगवान का भेजा गया एक विशेष फूल है और यह पचास सालों में केवल एक बार ही खिलता है। विश्वास न्यूज ने इस दावे की पहले भी पड़ताल की थी और उस समय पाया था कि यह दावा गलत है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

फेसबुक पर Vikas Navare नाम के यूजर ने इस तस्वीर को शेयर किया, जिसके ऊपर मराठी भाषा में लिखा था, “अनिवादित: यह विचित्र फूल स्वामी समर्थ महाराज का फूल उडुम्बर या उम्बर (क्लस्टर फिग) है। दर्शन करें व आशीर्वाद लें। यह फूल किसी को दिखता नहीं है। यह ओम्कार फूल है और 50 साल में एक बार ही खिलता है। यह प्रकृति की महिमा है। इसे फॉरवर्ड करें, ताकि लोग इसके दर्शन कर सकें।” पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा था, “Rare flower of Swami Samarth Maharaj’s Audumbara.”

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है।

पड़ताल

वायरल दावे की पड़ताल हमने पहले भी की थी। उस समय हमें न्यू इंडियन एक्सप्रेस के एक आर्टिकल का लिंक मिला था। मार्च 2017 में प्रकाशित हुए इस आर्टिकल के अनुसार, यह डायनासोर के समय का फॉसिल ट्री है। पौधों का सबसे पुराना ग्रुप, जिसने 20 करोड़ से भी ज्यादा सालों के बाद भी अपने अस्तित्व को बचा कर रखा। इसलिए ही इन्हें लिविंग फॉसिल्स भी कहा जाता है।

हमें यह तस्वीर विकिपीडिया पर भी मिली। यहां इस तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा गया है: विचित्र नुकीले माइक्रोस्पोरोफिल्स के साथ साइकस आरिक्सेंसिस का मेल कोन।

इससे यह पुख्ता हो गया कि न तो यह क्लस्टर फिग है और न ही शिवलिंग फ्लावर। विश्वास न्यूज ने अरान्या एन्वायरन्मेंटल ऑर्गेनाइजेशन के वाइस प्रेसिडेंट प्रणय तिजारे से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि की कि तस्वीर में दिख रहा पौधा 50 साल में एक बार खिलने वाला ओम्कार फूल या क्लस्टर फिग नहीं है। यह साइकस परिवार का एक पौधा है।

पूरी पड़ताल यहाँ पढ़ें।

फेसबुक पर यह पोस्ट “Vikas Navare” नामक यूजर ने साझा की थी। जब हमने यूजर की प्रोफाइल को स्कैन किया तो पाया कि यूजर पुणे से है। उसने यह प्रोफाइल सितंबर 2016 में बनाया था।

निष्कर्ष: वायरल पोस्ट में नजर आ रहा पौधा विचित्र फूल उडुम्बर या क्लस्टर फिग ट्री या शिवलिंग फ्लावर नहीं है। यह साइकस प्लांट की तस्वीर है। वायरल क्लेम फर्जी है।

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