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Fact Check: असम का पुराना वीडियो बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद अवैध घुसपैठियों को निकालने के झूठे दावे के साथ वायरल 

लोगों को बस में लेकर जाने के नाम पर वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। यह वीडियो बंगाल का नहीं, बल्कि असम का है।

  • By: Pragya Shukla
  • Published: May 14, 2026 at 12:32 PM
  • Updated: May 14, 2026 at 12:57 PM

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को विधानसभा चुनाव में जीत मिली है। इस जीत के साथ ही बीजेपी ने राज्य में सरकार बना ली है। इसके बाद से रोते हुए कुछ लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोगों को बस में बैठाकर ले जाया जा रहा है और उनके परिजन रो रहे हैं। इस वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह पश्चिम बंगाल का है। वहां अवैध तरीके से रह रहे बांग्लादेशियों को बीजेपी सरकार ने वापस भेजना शुरू कर दिया है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। यह वीडियो बंगाल का नहीं, बल्कि असम का है। दरअसल, साल 2024 में असम के बरपेटा में विदेशी न्यायाधिकरण ने 28 लोगों को गैर-नागरिक घोषित किया था। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट कैंप भेजा गया था। यह वीडियो उसी घटना का है। पुराने और असंबंधित वीडियो को अब बंगाल का बताकर वायरल किया जा रहा है।

क्या हो रहा है वायरल?

फेसबुक यूजर ‘शिवा नारायण’ ने 13 मई 2026 को वायरल वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “कितना दुखद है, विपक्ष के वोटर को भर-भरकर बांग्लादेश के बॉर्डर पर बंगाल-असम से भेजना शुरू हो गया। अब ये कभी भी, कैसे जीतेंगे? सच में बहुत बुरा हो रहा है इन कंगलुओं के साथ… feeling sad for momota didi”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल 

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने वीडियो के कई कीफ्रेम निकाले और उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें वायरल वीडियो ‘IndiaTodayNE’ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मिला। वीडियो को 3 सितंबर 2024 को अपलोड किया गया था। कैप्शन के अनुसार, असम के बरपेटा स्थित विदेशी न्यायाधिकरण ने विदेशी घोषित किए गए 28 लोगों को गोलपाड़ा के नजरबंदी शिविर में भेजने का आदेश दिया था। इनमें नौ महिलाएं और 19 पुरुष शामिल थे। इस समूह को भारी सुरक्षा व्‍यवस्‍था के बीच नजरबंदी शिविर में ले जाया गया था।

‘Deccan Chronicle’ की वेबसाइट पर 4 सितंबर 2024 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, असम पुलिस का कहना था कि बरपेटा जिले में विदेशी न्यायाधिकरणों (एफटी) की ओर से गैर-नागरिक घोषित किए गए 28 लोगों को गोलपाड़ा जिले के मटिया स्थित एक ‘ट्रांजिट कैंप’ में भेजा गया था। ये सभी लोग बंगाली मुस्लिम समुदाय से थे।

अन्य न्यूज रिपोर्ट्स को यहां पढ़ा जा सकता है। 

अधिक जानकारी के लिए हमने कोलकाता में दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ जेके बाजपेयी से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल वीडियो बंगाल का नहीं है। 

क्या है संदर्भ?

पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन चुकी है। पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री बनाया है। पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को 207 सीटें मिली हैं। वहीं, तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमटकर रह गई।

अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के फेसबुक अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को करीब छह हजार लोग फॉलो करते हैं। यूजर एक खास विचारधारा से जुड़ी पोस्ट शेयर करता है। 

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि लोगों को बस में लेकर जाने के नाम पर वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। यह वीडियो बंगाल का नहीं, बल्कि असम का है। दरअसल, साल 2024 में असम के बरपेटा में विदेशी न्यायाधिकरण ने 28 लोगों को गैर-नागरिक घोषित किया था। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट कैंप भेजा गया था। यह वीडियो उसी घटना का है। पुराने और असंबंधित वीडियो को अब बंगाल का बताकर वायरल किया जा रहा है।

  • Claim Review : BJP की जीत के बाद बंगाल के अवैध घुसपैठिए को निकालने का वीडियो।
  • Claimed By : FB User शिवा नारायण
  • Fact Check : झूठ

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